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Harsiddhi Temple Ujjain: हरसिद्धि माता के दरबार में विक्रमादित्य की अनोखी आस्था, नवरात्रि में दीप स्तंभ बनते हैं आकर्षण

नीलम द्विवेदी
रिपोर्टर:नीलम द्विवेदी
•4 मिनट पढ़ने का समय
उज्जैन हरसिद्धि माता मंदिर, शक्तिपीठ की मान्यता और नवरात्रि में दीप स्तंभों का महत्व
शारदीय नवरात्रि में उज्जैन के हरसिद्धि माता मंदिर के दीप स्तंभ और धार्मिक मान्यताएंसाभार: TCE

मुख्य बिंदुQuick Read

  • शक्तिपीठ की मान्यता: उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर को माता सती से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है।
  • विक्रमादित्य की कथा: धार्मिक परंपरा में राजा विक्रमादित्य को माता हरसिद्धि का अनन्य भक्त बताया गया है।
  • दीप स्तंभों की खासियत: नवरात्रि में मंदिर के विशाल दीप स्तंभों पर जलते दीप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनते हैं।
  • मंदिर परिसर: यहां माता अन्नपूर्णा के साथ महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं।

उज्जैन / शारदीय नवरात्रि विशेष। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ माता हरसिद्धि का मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्रि के दिनों में यहां देवी दर्शन के लिए भक्त पहुंचते हैं। मंदिर की पहचान उसकी प्राचीन धार्मिक मान्यताओं, देवी उपासना और परिसर में स्थित विशाल दीप स्तंभों से जुड़ी है।

हरसिद्धि माता मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान शिव जब माता सती के शरीर को लेकर विचरण कर रहे थे, तब उनकी कोहनी उज्जैन के इस स्थान पर गिरी थी। इसी कथा के कारण मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

हरसिद्धि माता मंदिर क्यों है खास?

उज्जैन के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल हरसिद्धि मंदिर में माता की आराधना शक्ति स्वरूप में की जाती है। मंदिर के गर्भगृह में माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा विराजमान है। उनके दोनों ओर महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं हैं। परिसर में श्री यंत्र भी स्थापित है, जिसे शक्ति उपासना का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर से जुड़ी एक अन्य धार्मिक कथा में भगवान शिव और माता पार्वती के कैलाश पर रहने के दौरान चंड और प्रचंड नाम के दैत्यों का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, देवी चंडी ने इन दैत्यों का वध किया था। इसके बाद भगवान शिव ने देवी को हरसिद्धि नाम दिया।

राजा विक्रमादित्य और माता हरसिद्धि की अनोखी कथा

हरसिद्धि माता मंदिर की प्रसिद्ध लोक-परंपराओं में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य की भक्ति का उल्लेख भी मिलता है। धार्मिक कथाओं में विक्रमादित्य को माता हरसिद्धि का अनन्य भक्त और देवी का उपासक बताया गया है।

प्रचलित कथा के अनुसार, राजा विक्रमादित्य ने माता को प्रसन्न करने के लिए कई बार अपना शीश अर्पित किया। मान्यता है कि देवी की कृपा से हर बार उनका शीश फिर जुड़ जाता था। इस तरह उन्होंने 11 बार अपना शीश अर्पित किया था। यह प्रसंग मंदिर से जुड़ी धार्मिक आस्था और लोककथा का हिस्सा है, इसे प्रमाणित ऐतिहासिक घटना के बजाय परंपरागत कथा के रूप में समझना चाहिए।

नवरात्रि में दीप स्तंभों का विशेष आकर्षण

हरसिद्धि माता मंदिर की सबसे अलग पहचान इसके दो विशाल दीप स्तंभ हैं। इन पर अनेक दीप जलाने की व्यवस्था है। नवरात्रि के दौरान जब इन स्तंभों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं, तो मंदिर परिसर का दृश्य श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बन जाता है।

दीप प्रज्ज्वलन की यह परंपरा मंदिर की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। देवी आराधना, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी के बीच नवरात्रि के दौरान मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। दीप स्तंभों की बनावट में मराठा स्थापत्य शैली का प्रभाव भी दिखाई देता है।

हरसिद्धि माता मंदिर कहां स्थित है?

हरसिद्धि माता मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। यह महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के घाटों वाले प्रमुख धार्मिक क्षेत्र के निकट है। उज्जैन आने वाले श्रद्धालु माता हरसिद्धि के दर्शन के साथ शहर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं।

नवरात्रि या अन्य प्रमुख पर्वों पर दर्शन के लिए जाने से पहले मंदिर की मौजूदा व्यवस्था, दर्शन समय और विशेष आयोजन की जानकारी स्थानीय प्रशासन या मंदिर प्रबंधन से प्राप्त करना उपयोगी रहेगा। त्योहारों के दौरान भीड़ और व्यवस्था में बदलाव संभव है।

शारदीय नवरात्रि में हरसिद्धि मंदिर का धार्मिक महत्व

शारदीय नवरात्रि देवी दुर्गा और शक्ति स्वरूपों की उपासना का पर्व है। इस दौरान हरसिद्धि माता मंदिर जैसे प्रमुख देवी स्थलों पर श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। उज्जैन की धार्मिक परंपरा में यह मंदिर शक्तिपूजा, देवी से जुड़ी कथाओं और दीप स्तंभों की परंपरा के कारण विशेष स्थान रखता है।

हरसिद्धि माता मंदिर की महत्ता केवल इसकी प्राचीनता से नहीं, बल्कि इससे जुड़ी मान्यताओं, लोककथाओं और पीढ़ियों से चली आ रही पूजा परंपराओं से भी बनती है। नवरात्रि में मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये विशेषताएं इसे उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करती हैं।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
नीलम द्विवेदी
सत्यापित रिपोर्टर व लेखक • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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