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[ट्रेंडिंग खबर]शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन 14 अक्टूबर 2026: मां कूष्मांडा की पूजा, व्रत, मंत्र और नियम

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शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा विधि, मंत्र और व्रत नियम
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है।
  • जानें पूजन विधि, मंत्र, भोग, व्रत के नियम और क्या नहीं करना चाहिए।

शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को है। नवरात्रि के इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है। भक्त इस दिन मां की आराधना करके सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के साथ व्रत, मंत्र जाप, दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती करने की परंपरा है। अगर आप भी इस दिन व्रत रख रहे हैं, तो जानिए मां का स्वरूप, पूजा की विधि, मंत्र, भोग और उन नियमों के बारे में जिनका ध्यान रखना चाहिए।

नवरात्रि के चौथे दिन किस देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में उनका चौथा स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि की रचना की। इसी वजह से उन्हें ब्रह्मांड की सृजनकर्ता देवी कहा जाता है।

मां कूष्मांडा का स्वरूप तेजस्वी माना जाता है। उनकी आठ भुजाएं बताई गई हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सहित विभिन्न आयुध तथा वस्तुएं दर्शाई जाती हैं। उनका वाहन सिंह है।

मां कूष्मांडा की पूजा का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना करने से भक्तों को साहस, ऊर्जा और आत्मविश्वास की प्रेरणा मिलती है। उन्हें सृष्टि में प्रकाश और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धालु मां से परिवार की सुख-शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

पूजा का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव के साथ मां की आराधना करना है। पूजा में किसी विशेष सामग्री की कमी होने पर भी भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, फूल, दीपक और स्वच्छ जल अर्पित कर सकते हैं।

मां कूष्मांडा की पूजा विधि

नवरात्रि के चौथे दिन घर पर मां कूष्मांडा की पूजा सरल तरीके से की जा सकती है। पूजा करते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।

  1. सुबह स्नान करें: सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
  2. दीपक जलाएं: मां दुर्गा या मां कूष्मांडा की तस्वीर अथवा प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
  3. संकल्प लें: मन में व्रत और पूजा का संकल्प लेकर मां का ध्यान करें।
  4. गणेश जी का स्मरण करें: पूजा की शुरुआत गणेश जी के स्मरण से करें।
  5. मां को फूल अर्पित करें: मां कूष्मांडा को फूल, अक्षत, रोली, चंदन और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें।
  6. भोग लगाएं: मां को फल, मालपुआ या अपनी परंपरा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें।
  7. मंत्र जाप करें: मां कूष्मांडा के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इच्छानुसार 108 बार जाप कर सकते हैं।
  8. पाठ और आरती करें: दुर्गा चालीसा, मां कूष्मांडा की स्तुति या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती करें।
  9. प्रसाद बांटें: पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।

मां कूष्मांडा का मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के दौरान इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है।

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥

भक्त अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं। मंत्र का जाप करते समय मन को शांत रखें और मां का ध्यान करें।

मां कूष्मांडा की स्तुति

या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इस स्तुति में मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को नमन किया जाता है। इसे पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक पढ़ा या सुना जा सकता है।

मां कूष्मांडा को किस चीज का भोग लगाएं?

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ अर्पित करने की परंपरा कई पूजा पद्धतियों में प्रचलित है। इसके अलावा फल, मिठाई और घर में तैयार किया गया सात्विक प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है। कुछ परंपराओं में कद्दू से बने व्यंजन भी पूजा में शामिल किए जाते हैं।

भोग बनाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार भोग तैयार कर सकते हैं। भोग अर्पित करने के बाद उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करें और दूसरों में बांटें।

नवरात्रि के चौथे दिन व्रत कैसे रखें?

नवरात्रि में व्रत रखने के अलग-अलग तरीके प्रचलित हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे दिन फलाहार करते हैं, जबकि कुछ लोग अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार एक समय भोजन करते हैं। व्रत का तरीका चुनते समय अपनी सेहत और दिनचर्या का ध्यान रखना जरूरी है।

  • सुबह पूजा के बाद व्रत का संकल्प लें।
  • फल, दूध, दही, मेवे या व्रत में मान्य भोजन अपनी परंपरा के अनुसार लें।
  • यदि आपके व्रत में अनाज और नमक वर्जित है, तो उसी नियम का पालन करें। सेंधा नमक का इस्तेमाल भी अपनी व्रत परंपरा के अनुसार करें।
  • दिनभर मां का स्मरण करें और समय मिलने पर मंत्र जाप करें।
  • शाम को पूजा और आरती के बाद फलाहार करें, यदि आपकी व्रत पद्धति इसकी अनुमति देती है।

बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास रखने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लें। धार्मिक आस्था के साथ शरीर की आवश्यकताओं की अनदेखी न करें।

नवरात्रि के चौथे दिन क्या नहीं करना चाहिए?

नवरात्रि के चौथे दिन पूजा और व्रत के दौरान कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में नियमों में अंतर हो सकता है।

  • पूजा स्थल को गंदा न रखें: पूजा से पहले स्थान और पूजा सामग्री की सफाई करें।
  • व्रत के नियमों की अनदेखी न करें: आपने जिस व्रत पद्धति को अपनाया है, उसके अनुसार भोजन करें।
  • तामसिक भोजन से बचें: व्रत और पूजा के दौरान अपनी परंपरा के अनुसार मांसाहार, शराब और अन्य निषिद्ध पदार्थों से दूर रहें।
  • क्रोध और कटु वाणी से बचें: परिवार और आसपास के लोगों से शांतिपूर्वक व्यवहार करें।
  • दिखावे से बचें: पूजा में महंगी सामग्री अनिवार्य नहीं है। श्रद्धा और स्वच्छता को प्राथमिकता दें।
  • स्वास्थ्य की अनदेखी न करें: कमजोरी या अस्वस्थता होने पर कठोर उपवास जारी रखने के बजाय उचित भोजन और चिकित्सा सलाह को महत्व दें।

नवरात्रि के चौथे दिन कौन-सा रंग पहनें?

नवरात्रि के हर दिन के लिए रंग चुनने की परंपरा प्रचलित है। 14 अक्टूबर 2026 के लिए कुछ रंग-सूचियों में रॉयल ब्लू यानी गहरा नीला रंग बताया गया है, जबकि अन्य सूचियों में अंतर मिल सकता है। इसलिए रंग को अनिवार्य धार्मिक नियम न मानें। श्रद्धालु अपनी पसंद और स्थानीय परंपरा के अनुसार कपड़े पहन सकते हैं।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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