शारदीय नवरात्र की षष्ठी तिथि मां भगवती के अमोघ फलदायी स्वरूप देवी कात्यायनी की पूजा के लिए समर्पित है। महर्षि कात्यायन के आश्रम में प्रकट होकर महिषासुर का वध करने वाली मां कात्यायनी को युद्ध और विजय की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इनकी उपासना करने से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।
मां कात्यायनी का तेजोमय स्वरूप
मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और स्वर्ण के समान चमकीला है। देवी की चार भुजाएं हैं। दाईं ओर की ऊपर वाली भुजा अभय मुद्रा में भक्तों को सुरक्षा प्रदान करती है और नीचे वाली भुजा वरद मुद्रा में है। बाईं ओर की ऊपरी भुजा में मां ने चमचमाती तलवार धारण कर रखी है और नीचे वाली भुजा में खिला हुआ श्वेत-लाल कमल पुष्प सुशोभित है। मां का वाहन भव्य सिंह है।
षष्ठी तिथि: सरल पूजा विधि
नवरात्र के छठे दिन प्रातः काल स्नानादि के बाद पीले अथवा लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की शुद्धि कर देवी कात्यायनी का ध्यान करें:
- मां की प्रतिमा या चित्र पर गंगाजल अर्पित कर चौकी पर लाल या पीला पुष्प अर्पित करें।
- देवी को अक्षत, रोली, चंदन, हल्दी और सुगंधित धूप-दीप अर्पित करें।
- मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना विशेष फलदायी माना जाता है, इसलिए भोग में शुद्ध शहद या मीठा पान अवश्य शामिल करें।
- देवी के बीज मंत्र और स्तुति मंत्र का 108 बार या यथासंभव जप करें।
- पूजा के अंत में दुर्गा चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से मां की आरती कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
मां कात्यायनी के सिद्ध मंत्र
साधना के दौरान शुद्ध उच्चारण के साथ निम्न मंत्रों का जप करना फलदायी माना गया है:
प्रार्थना मंत्र:
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥शीघ्र विवाह के लिए मंत्र:
कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि।
नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः॥
इस दिन क्या करें और क्या न करें
षष्ठी तिथि की पूजा के दौरान निम्न नियमों का ध्यान रखें:
- क्या करें: कन्याओं के विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए इस दिन देवी को पीले फूलों की माला और हल्दी की गांठ अर्पित करें। मन में संयम और परोपकार की भावना रखें।
- क्या न करें: घर में कटु वचन, क्रोध और विवाद से पूरी तरह बचें। तामसिक भोजन और नशीले पदार्थों का सेवन वर्जित रखें। नीले या काले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से बचें।
