Jio Platforms IPO को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। देश के सबसे बड़े पब्लिक इश्यू के लिए सब्सक्रिप्शन 23 अक्टूबर को बंद हो गया। अंतिम उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ₹30,213 करोड़ का यह IPO कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ। इश्यू को करीब 1.39 करोड़ आवेदन मिले, जिससे यह भारतीय IPO बाजार में आवेदन संख्या के लिहाज से नया रिकॉर्ड बन गया।
इस इश्यू में सबसे ज्यादा मांग संस्थागत निवेशकों की ओर से आई। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) कैटेगरी 70.55 गुना सब्सक्राइब हुई। वहीं, आम निवेशकों के लिए आरक्षित रिटेल पोर्शन को 2.72 गुना बोलियां मिलीं। इन आंकड़ों से साफ है कि बड़े निवेशकों के साथ खुदरा निवेशकों ने भी इश्यू में हिस्सा लिया। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन अपने आप में लिस्टिंग पर मुनाफे की गारंटी नहीं है।
1.39 करोड़ आवेदन के साथ बना रिकॉर्ड
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को करीब 1.39 करोड़ आवेदन मिले। इससे पहले यह रिकॉर्ड वारी एनर्जीज के नाम था, जिसके IPO को अक्टूबर 2024 में लगभग 97.34 लाख आवेदन मिले थे। आवेदन संख्या निवेशकों की भागीदारी दिखाती है, जबकि सब्सक्रिप्शन मल्टीपल बताता है कि उपलब्ध शेयरों के मुकाबले कितनी गुना मांग आई।
इश्यू के अंतिम दिन तक निवेशकों ने 19.75 करोड़ उपलब्ध शेयरों के मुकाबले लगभग 438.3 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई। इस आधार पर कुल सब्सक्रिप्शन 22.19 गुना रहा। पब्लिक इश्यू में लगाई गई बोलियों की कुल मांग और कंपनी को वास्तव में मिलने वाली रकम अलग-अलग चीजें हैं। कंपनी को इश्यू के तय आकार के अनुसार ही पूंजी मिलेगी।
किस कैटेगरी में कितनी मांग आई?
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB): 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन
- नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशक (NII): लगभग 14 गुना सब्सक्रिप्शन
- रिटेल निवेशक: 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन
- कर्मचारी कैटेगरी: 2.93 गुना सब्सक्रिप्शन
- शेयरहोल्डर कैटेगरी: 7.60 गुना सब्सक्रिप्शन
QIB कैटेगरी में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बैंकों और अन्य पात्र संस्थागत निवेशकों की बोलियां शामिल होती हैं। इस कैटेगरी में भारी मांग ने IPO के कुल सब्सक्रिप्शन को ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। रिटेल कैटेगरी का 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन यह बताता है कि आम निवेशकों की ओर से उपलब्ध शेयरों से ज्यादा आवेदन आए।
IPO का प्राइस बैंड और निवेश की न्यूनतम रकम
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने IPO के लिए प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया था। एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए न्यूनतम आवेदन राशि ₹13,428 बनती है।
रिटेल निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन कर सकते थे। अपर प्राइस बैंड पर इसकी कुल रकम ₹1,87,992 होती है। IPO में आवेदन करने और शेयरों का अलॉटमेंट मिलने के बाद भी लिस्टिंग पर शेयर का बाजार भाव तय नहीं होता; वह बाजार की मांग और कारोबार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
कंपनी ने एंकर निवेशकों से पहले ही जुटाए ₹8,110 करोड़
पब्लिक सब्सक्रिप्शन शुरू होने से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने 212 एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करके करीब ₹8,110 करोड़ जुटाए थे। एंकर निवेशक वे बड़े संस्थागत निवेशक होते हैं जिन्हें IPO आम लोगों के लिए खुलने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत शेयर आवंटित किए जाते हैं।
एंकर निवेशकों से मिली रकम कुल इश्यू का हिस्सा है। इसे आम निवेशकों के लिए खुले सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों से अलग समझना चाहिए। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का कुल आकार लगभग ₹30,213 करोड़ है, जबकि एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करने के बाद शेष इश्यू का हिस्सा अन्य पात्र निवेशक श्रेणियों के लिए उपलब्ध रहा।
IPO से मिलने वाली रकम का क्या करेगी कंपनी?
जियो प्लेटफॉर्म्स ने यह IPO पूरी तरह नए शेयर जारी करके लाया है। यानी इश्यू में मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी बेचने के बजाय नए शेयर जारी किए गए हैं। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी लगभग ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना के साथ बाजार में आई।
कंपनी की योजना IPO से मिलने वाली रकम में से अधिकतम ₹27,500 करोड़ अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करने की है। शेष रकम का उपयोग पूंजीगत खर्च, तकनीक और डिजिटल सेवाओं में निवेश तथा वर्किंग कैपिटल जैसी जरूरतों के लिए किया जाएगा।
इश्यू के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज की जियो प्लेटफॉर्म्स में हिस्सेदारी में बदलाव होगा। कंपनी के IPO दस्तावेजों के अनुसार, पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ने और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी घटने की उम्मीद है।
Jio Platforms IPO की लिस्टिंग कब होगी?
जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है। निवेशकों की नजर अब शेयर अलॉटमेंट और लिस्टिंग पर रहेगी। IPO में आवेदन करने वाले निवेशक रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अलॉटमेंट की स्थिति देख सकेंगे।
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर बाजार में अनुमान सामने आ सकते हैं, लेकिन यह अनौपचारिक बाजार का संकेत है, एक्सचेंज की आधिकारिक कीमत नहीं। GMP के आधार पर बताई जाने वाली संभावित लिस्टिंग कीमत निश्चित नहीं होती। वास्तविक लिस्टिंग प्राइस शेयर बाजार में कारोबार शुरू होने पर ही पता चलेगी।
