इस सड़क के तैयार होने से इंदौर से उज्जैन आने-जाने वाले यात्रियों, रोजाना अपडाउन करने वाले लोगों और श्रद्धालुओं को फायदा मिलने की उम्मीद है। सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए भी इस मार्ग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इंदौर से उज्जैन तक सिक्सलेन सड़क का काम अंतिम चरण में
इंदौर के अरविंदो मेडिकल कॉलेज क्षेत्र से उज्जैन के हरिफाटक चौराहे तक सड़क को चार लेन से छह लेन में विकसित किया गया है। परियोजना की लंबाई 46.475 किलोमीटर है। सड़क चौड़ी होने से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
परियोजना से जुड़े मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के अधिकारी के अनुसार, निर्माण कार्य का 97.54 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो चुका है। प्रमुख संरचनाओं का निर्माण भी पूरा होने की जानकारी दी गई है। अब परियोजना के कुछ शेष कार्यों को पूरा किया जाना है।
त्रिवेणी क्षेत्र के नए ब्रिज पर आवाजाही शुरू
उज्जैन के त्रिवेणी क्षेत्र में नवनिर्मित ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने की जानकारी दी गई है। इससे इस हिस्से में यात्रा करने वाले वाहन चालकों को सुविधा मिल सकती है। परियोजना में बनाए गए फ्लाईओवर, अंडरपास और सर्विस रोड का उद्देश्य मुख्य मार्ग पर यातायात को व्यवस्थित करना और स्थानीय आवाजाही को सुगम बनाना है।
तीन फ्लाईओवर और छह अंडरपास बनाए गए
इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन परियोजना में तीन फ्लाईओवर और छह अंडरपास बनाए गए हैं। इसके अलावा प्रमुख स्थानों पर जंक्शन और सर्विस रोड भी विकसित की गई हैं। इन संरचनाओं से मुख्य सड़क पर यातायात का दबाव कम करने और स्थानीय वाहनों की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फ्लाईओवर और अंडरपास होने से प्रमुख चौराहों पर वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकती है। वहीं, सर्विस रोड स्थानीय यातायात को मुख्य मार्ग से जोड़ने में सहायक होगी। इससे इंदौर और उज्जैन के बीच रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को लाभ मिल सकता है।
उज्जैन शहर की सीमा में यह काम बाकी
परियोजना के तहत उज्जैन शहर की सीमा में सर्विस रोड पर पीक्यूसी यानी पेवमेंट क्वालिटी कंक्रीट बिछाने का काम बाकी बताया गया है। यह काम नगर निगम की पाइपलाइन और चैंबर से संबंधित कार्य पूरे होने के बाद किया जा सकेगा।
पाइपलाइन और चैंबर का काम पूरा होने के बाद सर्विस रोड के शेष हिस्से को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद परियोजना के बाकी कार्य पूरे करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। नवंबर 2026 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य इसी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
सिंहस्थ-2028 से पहले कनेक्टिविटी मजबूत करने की तैयारी
सिंहस्थ-2028 के दौरान उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में इंदौर से उज्जैन के बीच बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण होगा। सिक्सलेन मार्ग पर अधिक यातायात क्षमता और बेहतर संरचनाओं से वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
इंदौर से उज्जैन पहुंचने वाले यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक यात्रा समय ट्रैफिक, मार्ग की स्थिति और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
नवंबर में लोकार्पण का लक्ष्य
परियोजना को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देवउठनी ग्यारस के आसपास इसके लोकार्पण की तैयारी है। परियोजना का भूमिपूजन 19 सितंबर 2024 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया था।
अब शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर और उज्जैन के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के साथ सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
