इस परियोजना के लिए अमरोहा जिले के 52 गांवों के 975 किसानों की कुल 555.94 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जानी है। किसानों की ओर से दाखिल दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद प्रशासन ने आगे की प्रक्रिया तेज कर दी है।
हसनपुर और मंडी धनौरा के गांवों की जमीन होगी अधिग्रहीत
हरिद्वार एक्सप्रेसवे के लिए हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्रों के गांवों की जमीन ली जाएगी। इनमें हसनपुर तहसील के 17 गांव और मंडी धनौरा तहसील के 35 गांव शामिल हैं। इस तरह कुल 52 गांवों की भूमि परियोजना के दायरे में आएगी।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे अमरोहा जिले में हसनपुर तहसील के मंगरौला टी-प्वाइंट से शुरू होकर मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र की ओर जाएगा। जिले में इसकी लंबाई करीब 49 किलोमीटर प्रस्तावित बताई गई है।
दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत प्रभावित किसानों से जमीन के स्वामित्व और अन्य संबंधित मामलों में दावे-आपत्तियां मांगी गई थीं। प्रशासन के अनुसार, इनका निस्तारण किया जा चुका है। अब संबंधित अधिकारियों के माध्यम से जमीनों के बैनामे शुरू कराने की तैयारी है।
किसानों को मिलेगा नियमानुसार मुआवजा
एक्सप्रेसवे के लिए जमीन देने वाले किसानों को नियमानुसार प्रतिकर दिया जाएगा। मुआवजे की राशि संबंधित भूमि के रकबे, निर्धारित दरों और लागू नियमों के आधार पर तय होगी। किसानों के लिए बैनामे की शुरुआत और भुगतान की प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ने से परियोजना के निर्माण से जुड़ी अगली प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, प्रत्येक किसान की रजिस्ट्री और मुआवजे की वास्तविक स्थिति संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
