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दिल्ली में पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों पर रोक: GRAP-1 लागू होते ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्ती

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दिल्ली में GRAP-1 के तहत पुराने वाहनों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP-1 लागू, वाहन उत्सर्जन और धूल नियंत्रण पर जोर।

मुख्य बिंदुQuick Read

  • दिल्ली का AQI 244 पहुंचने के बाद GRAP-1 लागू किया गया।
  • पुराने वाहनों पर कार्रवाई लागू कानूनी आदेशों और नियमों के अनुसार होगी।
  • सड़क की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे।
  • खुले में कचरा जलाने और सड़क किनारे कोयला-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक संबंधी उपाय सख्ती से लागू होंगे।

दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया गया है। 21 अक्टूबर 2026 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 244 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए वाहन उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और कचरा जलाने से जुड़े नियमों के पालन पर जोर दिया गया है।

दिल्ली में GRAP-1 लागू, प्रदूषण रोकने के लिए ये उपाय

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) का ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने पर चरणबद्ध कार्रवाई का ढांचा है। इसके पहले चरण को खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति में लागू किया जाता है। संबंधित एजेंसियों को सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए जाते हैं।

पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर क्या नियम हैं?

दिल्ली में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को लेकर पहले से कानूनी प्रतिबंध लागू हैं। सामान्य रूप से 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों को लेकर नियमों का उल्लेख किया जाता है। हालांकि, वाहन पर कार्रवाई की स्थिति लागू न्यायिक आदेशों, संबंधित निर्देशों और वाहन की श्रेणी पर निर्भर करती है।

इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि GRAP-1 लागू होते ही दिल्ली-NCR के हर पुराने वाहन पर एक समान नया प्रतिबंध लग गया है। वाहन मालिकों को परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों की ताजा आधिकारिक जानकारी के अनुसार ही अपने वाहन के इस्तेमाल का निर्णय लेना चाहिए।

सड़कों पर धूल कम करने के लिए क्या होगा?

GRAP-1 के तहत सड़कों की नियमित मशीनों से सफाई और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव किया जाता है। इसका उद्देश्य सड़क पर जमा धूल को हवा में फैलने से रोकना है। सफाई से निकलने वाली धूल और निर्माण व तोड़फोड़ के मलबे का उचित निपटान भी प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में शामिल है।

निर्माण स्थलों पर भी सख्ती

निर्माण और तोड़फोड़ वाले स्थानों पर धूल को नियंत्रित करने के उपाय जरूरी हैं। इसमें पानी का छिड़काव, धूल रोकने के इंतजाम और निर्माण सामग्री को खुले में फैलने से रोकना शामिल है। जहां निर्धारित मानकों के अनुसार धूल नियंत्रण के बिना काम किया जा रहा हो, वहां संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

खुले में कचरा जलाने पर रोक

खुले में कचरा जलाने से धुआं और सूक्ष्म कण हवा में फैलते हैं। GRAP-1 के तहत कचरा जलाने की गतिविधियों को रोकने और ठोस कचरे का नियमित उठाव सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है। नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों को ऐसे मामलों पर निगरानी रखनी होती है।

होटल और ढाबों में कोयला-लकड़ी के इस्तेमाल पर नियंत्रण

प्रदूषण नियंत्रण उपायों में सड़क किनारे भोजनालयों और व्यावसायिक रसोई में कोयले या लकड़ी जैसे ईंधन के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंधों का पालन भी शामिल है। संबंधित प्रतिष्ठानों को अपने क्षेत्र में लागू निर्देशों के अनुसार स्वच्छ ईंधन या अनुमत विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए।

GRAP के अलग-अलग चरण कब लागू होते हैं?

  • GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच, खराब श्रेणी।
  • GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच, बहुत खराब श्रेणी।
  • GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच, गंभीर श्रेणी।
  • GRAP-4: AQI 450 से ऊपर, गंभीर से भी अधिक श्रेणी के लिए निर्धारित उपाय।

GRAP के चरणों के साथ प्रतिबंध और कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। कौन-से उपाय किस समय लागू हैं, इसकी पुष्टि CAQM के नवीनतम आदेश से की जानी चाहिए।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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