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कोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत दी: कहा- ‘ये Gen-Z नहीं हैं’, CJP नेताओं ने शांति भंग न करने का बांड भरा; केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर

•4 मिनट पढ़ने का समय
सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत और सुनवाई के दौरान Gen-Z पर कोर्ट की टिप्पणी
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जमानत मिली।

मुख्य बिंदुQuick Read

  • सौरव दास और आशुतोष रांका को ₹50 हजार के बॉन्ड पर जमानत मिली।
  • दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
  • सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने दोनों की उम्र और प्रदर्शन पर सवाल उठाए।
  • दिल्ली पुलिस ने दोनों नेताओं से जुड़े जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के मामलों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन बाद दिल्ली की स्पेशल कोर्ट से जमानत मिल गई है। दोनों को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए दोनों नेताओं के मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एक टिप्पणी भी चर्चा में रही। अदालत ने उनकी उम्र पूछने के बाद कहा था, 'ये Gen-Z नहीं हैं।'

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए थे दोनों नेता

सौरव दास और आशुतोष रांका 13 अक्टूबर को CJP समर्थकों के साथ तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। बताया गया कि उनके साथ करीब 8 से 10 समर्थक भी मौजूद थे। इससे एक दिन पहले, 12 अक्टूबर को सरकार ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी थी।

प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने के बाद दोनों नेताओं को शांति व्यवस्था से जुड़े नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें पांच दिन के लिए जेल भेजा गया। 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई थी।

हाईकोर्ट ने सीधे दखल देने से क्यों किया इनकार?

इस मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए।

अदालत ने सवाल उठाया कि जब मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए रिवीजन पिटीशन का विकल्प मौजूद है, तो सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट क्यों आया गया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को मौजूदा याचिका वापस लेकर रिवीजन पिटीशन दाखिल करने का विकल्प दिया गया। दोनों नेताओं ने अपनी याचिकाएं वापस ले लीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की 4 अहम टिप्पणियां

1. पहले भरे गए बॉन्ड पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं की ओर से पहले शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड का जिक्र किया। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन की आशंका सामने आई है, तो अधिकारियों का नियमों के तहत कार्रवाई करना गलत कैसे है।

2. बैरिकेड तोड़ने से बिगड़ सकती थी स्थिति

अदालत ने प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड पार करने और शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पर सवाल उठाए। कोर्ट की टिप्पणी थी कि प्रदर्शन के लिए पुलिस से अनुमति लेने पर व्यवस्था बनाए रखने और उपद्रव करने वालों को रोकने में मदद मिल सकती है।

3. उम्र पूछने पर कहा- 'ये Gen-Z नहीं हैं'

सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों याचिकाकर्ताओं की उम्र पूछी। उनके वकील ने बताया कि एक की उम्र 27 साल और दूसरे की 31 साल है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की, 'ये Gen-Z नहीं हैं।' अदालत ने उनसे यह भी पूछा कि वे कौन हैं, क्या करते हैं और जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका उद्देश्य क्या है।

4. रोक के बावजूद जंतर-मंतर क्यों पहुंचे?

अदालत ने सवाल किया कि जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने पर रोक थी, तो दोनों नेता वहां क्यों पहुंचे। सुनवाई के दौरान पहले दिए गए बॉन्ड और जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की निर्धारित सूची से हटाने से जुड़े मामले का भी जिक्र हुआ। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित होने की बात कही गई।

जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत में हुई सुनवाई

इस मामले की सुनवाई जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत में हुई। सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से एडवोकेट अभिक चिमनी ने दलीलें रखीं। दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और CGSC आशीष दीक्षित पेश हुए।

दोनों नेताओं से जुड़े केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर

दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका से जुड़े जंतर-मंतर मामले को भी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस में दर्ज मामला क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया था। अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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