पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर बोलते हुए खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके संबोधन के दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री के समर्थन में टिप्पणी की थी। इसके बाद खरगे ने यह जवाब दिया और कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति बन गई।
पटना में खरगे ने पीएम मोदी को लेकर क्या कहा?
पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम में खरगे भाजपा सरकारों और केंद्र की नीतियों पर निशाना साध रहे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र और हरियाणा की सरकारों को कथित तौर पर वोट चोरी से बनी सरकार बताया। इसी दौरान सभा में एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाएंगे। जवाब में खरगे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।”
इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हुआ। मीडिया रिपोर्टों में विरोध करने वाले व्यक्ति के साथ हाथापाई होने की बात भी कही गई है।
खरगे के बयान के बाद आगबबूला हुई भाजपा
कांग्रेस अध्यक्ष के प्रधानमंत्री के खिलाफ विवादित बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता आगबबूला हो गए हैं। वहीं सोशल मीडिया में भी मोदी समर्थक लगातार खरगे और कांग्रेस को निशाना बना रहे हैं।
खरगे ने भाजपा और RSS पर लगाए आरोप
अपने भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में सामाजिक विभाजन बढ़ रहा है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव है। खरगे ने कहा कि जब तक RSS की विचारधारा का प्रभाव खत्म नहीं होगा, तब तक देश में शांति कायम करना मुश्किल होगा।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करते हुए इसे रोकने की मांग की। खरगे ने आगामी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी की। उन्होंने पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने और संबंधित सरकारों को हटाने की मांग उठाई। ये खरगे और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप व मांगें हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
महंगाई और प्याज की कीमतों पर भी सरकार को घेरा
खरगे ने महंगाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम लोगों के लिए दाल और प्याज जैसी रोजमर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगी होती जरूरी वस्तुओं का बोझ गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की आलोचना की।
उन्होंने संसद की कार्यवाही और विपक्ष के मुद्दों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। खरगे ने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर लड़ाई लड़ रहे हैं और कांग्रेस आगे भी सरकार को घेरती रहेगी।
नीतीश कुमार पर भी साधा निशाना
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र करते हुए खरगे ने कहा कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं का भाजपा और RSS के साथ जाना वैचारिक कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने नीतीश कुमार की राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए और कांग्रेस की विचारधारा को सामाजिक न्याय तथा संविधान की रक्षा से जोड़ा।
खरगे ने अपने भाषण में महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। उन्होंने राहुल गांधी के संघर्ष का भी जिक्र किया और पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक लड़ाई जारी रखने की अपील की।
छुआछूत और हल्द्वानी की घटना का किया जिक्र
खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में हवन कार्यक्रम के बाद मंच के शुद्धिकरण से जुड़ी घटना का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी छुआछूत से जुड़ी मानसिकता क्यों बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और RSS से जुड़े लोगों की विचारधारा में सामाजिक भेदभाव दिखाई देता है।
उन्होंने बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के सामाजिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जमींदारी प्रथा समाप्त करने और कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने के लिए काम किया। खरगे ने बैद्यनाथ धाम मंदिर में दलितों के प्रवेश से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग का भी उल्लेख किया।
अयोध्या और राम मंदिर के चंदे पर क्या बोले खरगे?
कांग्रेस अध्यक्ष ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े चंदे और गहनों को लेकर भाजपा पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस सरकारों के कामों का श्रेय लेती है और अपनी सरकार के समय की गलतियों के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराती है।
राम मंदिर के चंदे और गहनों को लेकर खरगे की टिप्पणी एक राजनीतिक आरोप है। इस भाषण के आधार पर किसी चोरी या वित्तीय अनियमितता को प्रमाणित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता। इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच या आधिकारिक दस्तावेज जरूरी होंगे।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
खरगे ने अपने संबोधन में कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए लोगों को आवाज उठानी होगी। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी संरक्षण देने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार की आलोचना की।
पटना के इस कार्यक्रम में खरगे के बयान के साथ-साथ भाजपा, RSS, चुनाव प्रक्रिया, महंगाई और सामाजिक न्याय पर उनकी टिप्पणियां भी चर्चा में रहीं। प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हुए हंगामे ने राजनीतिक बयानबाजी और सार्वजनिक मंचों पर भाषा की मर्यादा को लेकर बहस तेज कर दी है।