कृषि-उद्यमी का काम केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं होता। वह किसानों को तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकता है, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग कर सकता है या गांव में जरूरत के अनुसार कोई सेवा आधारित व्यवसाय शुरू कर सकता है। हालांकि, कारोबार शुरू करने से पहले स्थानीय मांग, लागत, प्रशिक्षण और उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी जुटाना जरूरी है।
क्या है केंद्र सरकार की प्रगति पहल?
केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 में 'प्रगति' नाम से राष्ट्रीय पहल शुरू की। इसका उद्देश्य 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में विकसित करना और देश के 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों तक कृषि सेवाएं पहुंचाने में मदद करना है। इस पहल में मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं, कृषि संबंधी सलाह, मशीनों की उपलब्धता, वित्तीय संस्थानों से संपर्क और बाजार तक पहुंच जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया है। सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में इस लक्ष्य की जानकारी दी गई है।
इस पहल का मकसद गांवों में कृषि सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर कारोबार के अवसर तैयार करना है। मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में इस मॉडल के जरिए कृषि सेवाओं का विस्तार करने की योजना है। इच्छुक युवाओं को कार्यक्रम में भागीदारी और चयन की प्रक्रिया के लिए संबंधित आधिकारिक संस्थाओं से जानकारी लेनी चाहिए।
कृषि कारोबार के लिए प्रशिक्षण और अनुदान का अवसर
कृषि से जुड़े नए विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए प्रशिक्षण और इनक्यूबेशन कार्यक्रम भी चलाए जाते हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर ने पीएम-आरकेवीवाई नवाचार एवं कृषि उद्यमिता कार्यक्रम के कोहोर्ट 8.0 के तहत कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में नए विचारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, चयनित प्रतिभागियों को एक महीने का प्रशिक्षण और पात्रता व चयन की शर्तों के अधीन 25 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता का अवसर दिया जाना था।
इस कार्यक्रम के लिए बताई गई आवेदन की अंतिम तारीख 21 सितंबर 2026 थी, जो अब बीत चुकी है। इसलिए इच्छुक युवाओं को इसे खुला आवेदन अवसर मानने के बजाय अगले चरण या नए आवेदन की घोषणा के लिए विश्वविद्यालय के आधिकारिक माध्यमों पर जानकारी देखनी चाहिए।
डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण में भी कारोबार की संभावना
कृषि-उद्यमिता के अंतर्गत केवल खेती से संबंधित सेवाएं ही नहीं, बल्कि दूध और दुग्ध उत्पाद, अनाज की सफाई व पैकेजिंग, फल-सब्जियों का प्रसंस्करण, स्थानीय खाद्य उत्पाद और वन उपज से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने जैसे कारोबार भी आते हैं। ऐसे व्यवसायों में बाजार की मांग, कच्चे माल की उपलब्धता, भंडारण, पैकेजिंग और बिक्री व्यवस्था की योजना बनाना जरूरी होता है।
झारखंड में कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े स्टार्टअप्स को आगे बढ़ाने के लिए राज्य की स्टार्टअप नीति तथा खाद्य प्रसंस्करण संबंधी नीतियों का उल्लेख किया गया है। इनका उद्देश्य उद्यमियों को व्यवसाय विकसित करने, मार्गदर्शन प्राप्त करने और बाजार से जुड़ने में मदद देना है। हालांकि, किसी सहायता का लाभ संबंधित योजना की पात्रता और स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
कृषि-उद्यमियों को किन योजनाओं की जानकारी रखनी चाहिए?
कृषि आधारित कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे युवाओं के लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLISFPI) जैसी पहलों की जानकारी उपयोगी हो सकती है। इन योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग श्रेणियों में खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा देना है। हर योजना के लाभ, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और वित्तीय सहायता की शर्तें अलग हो सकती हैं।
आवेदन करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान दिशा-निर्देश, आवेदन की स्थिति और जरूरी दस्तावेजों की जांच करें। किसी एजेंट के दावे पर भरोसा करके अग्रिम भुगतान न करें और अनुदान को बिना शर्त मिलने वाली राशि न समझें।
गांव में कृषि-उद्यमी बनने की तैयारी कैसे करें?
- स्थानीय जरूरत पहचानें: पता करें कि आसपास के किसानों को मिट्टी जांच, मशीन किराये, तकनीकी सलाह, भंडारण या बाजार तक पहुंच में किस तरह की मदद चाहिए।
- व्यवसाय की योजना बनाएं: शुरुआती लागत, नियमित खर्च, संभावित ग्राहक और आमदनी का व्यावहारिक आकलन करें।
- प्रशिक्षण लें: कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय या संबंधित सरकारी संस्थाओं में उपलब्ध प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी जुटाएं।
- वित्तीय विकल्प समझें: बैंक ऋण, पात्रता के अनुसार अनुदान और उद्यमिता सहायता कार्यक्रमों की शर्तें जांचें।
- बाजार से संपर्क बनाएं: किसानों, सहकारी समितियों, स्थानीय व्यापारियों और संभावित खरीदारों के साथ संपर्क विकसित करें।
कृषि-उद्यमिता ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का एक विकल्प बन सकती है, लेकिन सफलता के लिए सही व्यवसाय का चुनाव, स्थानीय जरूरतों की समझ और वित्तीय योजना जरूरी है। किसी योजना में आवेदन करने से पहले उसकी वर्तमान स्थिति और आधिकारिक शर्तों की पुष्टि करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
