CJP Protest | Supreme Court | New Delhiदेश

[ब्रेकिंग न्यूज़]CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: मेट्रो स्टेशन बंद करने और हिरासत पर केंद्र को नोटिस, इंटरनेट बहाल रखने के निर्देश; शांति भंग न करने की शर्त पर दीपके, सौरव और आशुतोष रिहा

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रिहाई के बाद दीपके, सौरव और आशुतोष
दिल्ली में CJP प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों की बंदी और हिरासत के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया।
  • DMRC से बंद और खुले मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा गया।
  • कोर्ट ने मेट्रो सेवाएं सामान्य रखने, इंटरनेट बहाल करने और लोगों की आवाजाही पर रोक न लगाने की बात कही।
  • CJP के तीन नेताओं को शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया; प्रदर्शन के दौरान करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा है।

नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन बंद करने, इंटरनेट सेवाओं पर रोक और लोगों को हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट सेवाएं बहाल रहनी चाहिए और आम लोगों की आवाजाही पर अनावश्यक रोक नहीं लगनी चाहिए। कोर्ट ने वकीलों की हिरासत से जुड़े मामले को भी गंभीरता से लिया और कहा कि सभी संबंधित वकीलों की बात सुनी जाएगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं करने के निर्देश के बावजूद 10 अक्टूबर को कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने इंटरनेट बंद होने, ट्रेनों के संचालन में बाधा और लोगों को हिरासत में लेने पर भी सवाल उठाए।

मेट्रो स्टेशन बंद करने के मामले में केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लेने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

कोर्ट ने पहले दिए गए आदेश के पालन की रिपोर्ट भी मांगी है। संबंधित अधिकारियों को मंगलवार तक अंतरिम जवाब देने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई में यह जांचने का मुद्दा भी उठा कि सार्वजनिक परिवहन को लेकर पहले दिए गए आदेश का पालन किस तरह किया गया।

DMRC से बंद मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) से ऐसा नक्शा पेश करने को कहा है, जिसमें यह स्पष्ट हो कि प्रदर्शन के दौरान कौन-कौन से मेट्रो स्टेशन बंद थे और कौन से खुले रहे। सुनवाई में बताया गया कि शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने का प्रस्ताव था, जबकि बाद में 45 स्टेशनों को बंद रखने की बात सामने आई।

पीठ ने सवाल उठाया कि यदि किसी मेट्रो रूट के बीच के स्टेशन बंद कर दिए जाएं, लेकिन दोनों छोर के स्टेशन खुले रहें, तो यात्री उस सेवा का व्यावहारिक इस्तेमाल कैसे कर पाएंगे। अदालत ने सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों के असर और यात्रियों को हुई असुविधा के बारे में भी जानकारी मांगी।

अधिकारियों ने कहा- रात तक मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बहाल

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि शनिवार रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन दोबारा खोल दिए गए थे और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गई थीं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधों के कारण आम लोगों को परेशानी हुई और कुछ स्थानों पर लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि वहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू नहीं थी।

इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का जवाब और अदालत के सामने प्रस्तुत रिकॉर्ड आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल कोर्ट ने मामले में जवाब मांगा है; अवमानना की कार्रवाई शुरू करने या आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष को लेकर आगे की न्यायिक प्रक्रिया बाकी है।

वकीलों की हिरासत पर कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान वकीलों की हिरासत का मुद्दा भी उठा। अदालत ने कहा कि वह सभी संबंधित वकीलों की बात सुनेगी और मामले को मामूली घटना की तरह नहीं देख रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई और आवाजाही पर लगी पाबंदियों की न्यायिक समीक्षा जरूरी है।

CJP के तीन नेता 23 घंटे बाद रिहा

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों ने 50 हजार रुपये का बेल बॉन्ड भी भरा।

तीनों नेताओं को शनिवार को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाली थी। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। ये आरोप पार्टी के दावे हैं; इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान हजारों लोगों को हिरासत में लेने का दावा

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्ट में करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लेने का दावा किया गया है। हालांकि, हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या और अलग-अलग स्थानों पर हुई कार्रवाई के बारे में आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। इसके चलते मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, यातायात में बदलाव और कुछ रेल सेवाओं के प्रभावित होने की खबरें भी सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट की मौजूदा सुनवाई का मुख्य सवाल यही है कि सुरक्षा व्यवस्था के दौरान सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियां पहले के न्यायिक निर्देशों के अनुरूप थीं या नहीं।

अब मंगलवार तक जवाब पर नजर

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों से अंतरिम जवाब मांगा है और DMRC को बंद तथा खुले मेट्रो स्टेशनों का नक्शा प्रस्तुत करने को कहा है। आगे की सुनवाई में अदालत के सामने अधिकारियों का पक्ष, मेट्रो संचालन का रिकॉर्ड और पहले दिए गए आदेश के अनुपालन की जानकारी रखी जाएगी।

मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण अधिकारियों का जवाब और अदालत की आगे की टिप्पणी होगी। तब तक मेट्रो सेवाओं, इंटरनेट प्रतिबंधों और हिरासत से जुड़े आरोपों को याचिकाकर्ताओं के दावों तथा अधिकारियों के जवाब के रूप में अलग-अलग समझना जरूरी है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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