रीवा। रीवा जीआरपी ने दुष्कर्म के एक मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को छतरपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी की तलाश के दौरान उसके छतरपुर बस स्टैंड के पास मौजूद होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ा और रीवा लेकर आई। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
आरोपी की पहचान प्रमोद नाथ सपेरा (34), पिता कमलनाथ सपेरा, निवासी इटमा, थाना लवकुशनगर, जिला छतरपुर के रूप में बताई गई है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।
छतरपुर बस स्टैंड के पास मिला आरोपी
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान और तलाश के लिए टीम को छतरपुर भेजा गया था। पुलिस उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकाने के बारे में जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि वह छतरपुर बस स्टैंड के पास बैठा है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद उसे रीवा लाया गया। पुलिस अब मामले में पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।
10 जून को मिली थी मामले की सूचना
इस मामले की सूचना 10 जून को मिली थी। इसके बाद छतरपुर के सिविल लाइन थाने में जीरो पर कायमी की गई। प्रारंभिक कार्रवाई के बाद प्रकरण रीवा जीआरपी को भेज दिया गया।
संबंधित डायरी प्राप्त होने के बाद रीवा जीआरपी ने अपराध कायम कर जांच शुरू की। इसके बाद मामले में आरोपी की पहचान और तलाश के लिए कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर के निर्देश पर बनी टीम
पुलिस अधीक्षक रेल जबलपुर के निर्देश पर आरोपी की तस्दीक और तलाश के लिए पुलिस टीम रवाना की गई थी। टीम आरोपी के बारे में जानकारी जुटा रही थी। इसी दौरान उसके छतरपुर बस स्टैंड के पास होने की सूचना मिली, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
रीवा जीआरपी कर रही मामले की जांच
मामले की शुरुआती कार्रवाई छतरपुर के सिविल लाइन थाने में हुई थी, जबकि आगे की जांच रीवा जीआरपी ने संभाली। आरोपी को गिरफ्तार कर रीवा लाए जाने के बाद पुलिस मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना की विस्तृत परिस्थितियों और अन्य संबंधित तथ्यों का उल्लेख नहीं है। पुलिस जांच के बाद ही मामले से जुड़े बाकी विवरण स्पष्ट होंगे। दुष्कर्म के मामले में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
