TCE रीवा न्यूज डेस्क। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित ऐतिहासिक एवं विशाल गोविंदगढ़ जलाशय में पानी के रिसाव की खबर सामने आने के बाद रीवा और नवगठित मैहर जिले के प्रशासनिक महकमे में अचानक हलचल तेज हो गई। बांध से पानी रिसने की खबर फैलते ही आसपास के निचले ग्रामीण इलाकों और किसानों के बीच बांध की सुरक्षा को लेकर भय और चिंता की स्थिति निर्मित हो गई। सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों और जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बांध के संवेदनशील हिस्सों का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि रिसाव अत्यंत मामूली है और बांध की संरचना पूरी तरह सुरक्षित है।
आरडी 3750 से 3800 मीटर के बीच मिला मामूली रिसाव
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मैहर कलेक्टर विदिशा मुखर्जी के निर्देश पर अमरपाटन तहसीलदार प्रवीण त्रिपाठी जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों के साथ गोविंदगढ़ तालाब पहुंचे। संयुक्त जांच दल ने बांध के उस हिस्से का बारीकी से परीक्षण किया जहां से ग्रामीणों द्वारा जल रिसाव की सूचना दी गई थी।
तकनीकी टीम के अनुसार, बांध की आरडी 3750 से 3800 मीटर के मध्य दो अलग-अलग बिंदुओं पर पानी का रिसाव पाया गया। हालांकि, यह रिसाव आधा एचपी (हॉर्स पावर) के प्रवाह से भी कम है। इंजीनियरों ने जांच में पाया कि रिसने वाला पानी पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी है, जो इस बात का प्रमाण है कि बांध के भीतरी भराव या मिट्टी का क्षरण (इरोजन) नहीं हो रहा है। तकनीकी दल ने पुष्टि की है कि बांध के किसी भी हिस्से में दरार या बड़े कटाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
ग्रामीणों में आशंका के चलते प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
गोविंदगढ़ बांध से रिसाव की खबर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैलने के बाद बांध के डाउनस्ट्रीम में बसे गांवों के लोगों में अनहोनी की आशंका बन गई थी। ग्रामीणों का कहना था कि यदि रिसाव का दायरा बढ़ता है तो निचले रिहायशी इलाकों और फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बांध पर 24 घंटे निगरानी बढ़ा दी है। एसडीएम आरती सिंह ने रीवा एसडीएम और गोविंदगढ़ नगर परिषद के सीएमओ से दूरभाष पर विस्तृत चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली। स्थानीय राजस्व और मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वे जलाशय के जलस्तर और रिसाव वाले दोनों बिंदुओं पर लगातार नजर बनाए रखें।
रबी फसल की सिंचाई के बाद शुरू होगा मरम्मत कार्य
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में मानसून और आगामी रबी सीजन की सिंचाई को देखते हुए जलाशय में पर्याप्त जलभराव बना हुआ है। भरे हुए पानी के बीच बड़े स्तर का तकनीकी उपचार करना संभव नहीं है।
विभाग की योजना के अनुसार, जैसे ही रबी फसल के लिए पानी छोड़ने के बाद जलाशय का जलस्तर नीचे जाएगा, जल संसाधन विभाग की विशेष विंग द्वारा बांध के संबंधित हिस्से का तकनीकी उपचार (ग्राउटिंग व पिचिंग) कराया जाएगा। इससे रिसाव की समस्या को हमेशा के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। प्रशासन ने आम जनता और किसानों से किसी भी प्रकार की भ्रामक अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. गोविंदगढ़ तालाब में रिसाव की स्थिति क्या है?
जल संसाधन विभाग की जांच में रिसाव आधा एचपी से भी कम और बेहद मामूली पाया गया है। पानी पूरी तरह साफ है और बांध को कोई खतरा नहीं है।
2. बांध के किस हिस्से में पानी रिसने की जानकारी मिली थी?
निरीक्षण के दौरान बांध की आरडी 3750 से 3800 मीटर के बीच दो स्थानों पर हल्का जल रिसाव दर्ज किया गया है।
3. क्या रिसाव से आसपास के गांवों को कोई खतरा है?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है। बांध टूटने या किसी भी प्रकार के खतरे की कोई संभावना नहीं है।
4. बांध की मरम्मत का स्थायी कार्य कब कराया जाएगा?
रबी फसलों की सिंचाई पूरी होने और जलाशय का जलस्तर कम होने के बाद जल संसाधन विभाग द्वारा बांध का स्थायी तकनीकी उपचार कार्य कराया जाएगा।
