8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को पितृ पक्ष की त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार जिन पितरों का निधन त्रयोदशी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है। इसे त्रयोदशी श्राद्ध या तेरस श्राद्ध भी कहा जाता है।
पंचांग गणना के अनुसार त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात करीब 11:16 बजे के बाद शुरू होकर 8 अक्टूबर की रात करीब 10:15-10:16 बजे तक रहेगी। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। श्राद्ध के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर माना जाता है।
8 अक्टूबर को किसका श्राद्ध किया जाता है?
त्रयोदशी श्राद्ध उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनका निधन त्रयोदशी तिथि को हुआ हो। धार्मिक परंपराओं में इस दिन को विशेष रूप से पितरों के तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। कुछ परंपराओं में त्रयोदशी श्राद्ध को मृत बच्चों के श्राद्ध के लिए भी उपयुक्त बताया गया है।
त्रयोदशी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त
श्राद्ध कर्म के लिए पितृ पक्ष में कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और उसके बाद का अपराह्न काल महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना में 8 अक्टूबर को कुतुप मुहूर्त करीब सुबह 11:39 से दोपहर 12:27 बजे तक, रौहिण मुहूर्त करीब 12:27 से 1:14 बजे तक और अपराह्न काल करीब 1:14 से 3:37 बजे तक बताया गया है। शहर के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
त्रयोदशी श्राद्ध की विधि
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पितरों का स्मरण करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ तर्पण किया जाता है। परंपरा के अनुसार जल में काले तिल मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित किया जाता है।
इसके बाद पिंडदान और श्राद्ध कर्म किया जाता है। पितरों की पसंद के अनुसार सात्विक भोजन तैयार करके ब्राह्मण भोजन या जरूरतमंद को भोजन कराने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है। गाय, कौआ और कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा भी अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में प्रचलित है।
तर्पण के समय कौन सा मंत्र बोलें?
तर्पण करते समय पितरों का नाम और गोत्र लेकर श्रद्धा से जल अर्पित किया जा सकता है। सामान्य रूप से यह मंत्र बोला जाता है:
ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।
इसके अलावा अपने कुल की परंपरा के अनुसार पितृ तर्पण के मंत्र और विधि का पालन करना उचित माना जाता है। यदि परिवार में किसी पुरोहित या आचार्य से नियमित रूप से श्राद्ध कराया जाता है तो उसी परंपरा को प्राथमिकता दें।
श्राद्ध में क्या करें?
- पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- काले तिल और जल से तर्पण करें।
- पिंडदान और श्राद्ध कर्म स्थानीय परंपरा के अनुसार करें।
- सात्विक भोजन तैयार करें।
- जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या दान दें।
- परिवार की परंपरा के अनुसार ब्राह्मण भोजन कराएं।
श्राद्ध में क्या नहीं करना चाहिए?
- श्राद्ध के दिन नशे और मांसाहार से बचें।
- घर में अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचना चाहिए।
- श्राद्ध कर्म को दिखावे या उत्सव की तरह नहीं करना चाहिए।
- तर्पण और पिंडदान में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।
- स्थानीय और पारिवारिक परंपरा से अलग कोई कर्म करने से पहले पुरोहित से सलाह लेना बेहतर है।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष 2026 का समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
इसलिए 8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध के बाद 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी।
