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नागपंचमी और सावन सोमवार का दुर्लभ संयोग: जानें नाग देवता की संपूर्ण पूजन विधि, प्रभावशाली मंत्र और कालसर्प दोष मुक्ति के उपाय

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नागपंचमी और सावन सोमवार के पावन संयोग पर नाग देवता की संपूर्ण पूजा विधि, प्रभावशाली मंत्र और कालसर्प दोष निवारण के उपाय।साभार: AI

मुख्य बिंदुQuick Read

  • दुर्लभ त्रिवेणी संयोग: सावन का तीसरा सोमवार और नागपंचमी एक ही दिन पड़ने से पूजा-अर्चना का फल कई गुना फलदायी माना गया है।
  • कालसर्प व राहु-केतु दोष शांति: इस पावन दिन भगवान शिव के रुद्राभिषेक और नाग देवता के विधिवत अर्चन से कुंडली के गंभीर दोषों से मुक्ति मिलती है।

TCE धर्म डेस्क। सनातन धर्म में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। इस वर्ष नागपंचमी का पर्व अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग में मनाया जा रहा है, क्योंकि 17 अगस्त को इस पावन तिथि के साथ सावन का तीसरा सोमवार भी पड़ रहा है। भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार और उनके कंठहार नाग देवता की पंचमी तिथि का एक साथ होना साधकों, भक्तों और ज्योतिषीय दोषों से पीड़ित जातकों के लिए एक महापर्व के समान है। इस दुर्लभ संयोग में की गई उपासना से न केवल नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि भगवान भोलेनाथ भी शीघ्र प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

नागपंचमी और सावन सोमवार के संयोग का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता को पाताल लोक का स्वामी और भगवान विष्णु की शैया तथा भगवान शिव का आभूषण माना गया है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है और सोमवार उनका प्रिय वार है। जब नागपंचमी और सावन सोमवार एक ही दिन पड़ते हैं, तो शिव और नाग शक्ति की संयुक्त ऊर्जा प्रवाहित होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन जातकों की जन्मकुंडली में कालसर्प दोष, राहु-केतु की प्रतिकूल महादशा या पितृ दोष मौजूद है, उनके लिए इस दिन का अनुष्ठान अचूक माना जाता है। इस दिन नागों की पूजा करने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है, विषैले जीवों से सुरक्षा मिलती है और वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नाग देवता की संपूर्ण पूजन विधि (Step-by-Step Vidhi)

नागपंचमी के दिन प्रात:काल से ही शुद्ध अंतःकरण के साथ पूजा का विधान है:

  • स्नान व संकल्प: प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और हाथ में जल लेकर व्रत व पूजन का संकल्प लें।
  • नाग प्रतिमा की स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर मिट्टी, चांदी, तांबे या पीतल से निर्मित नाग देवता की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। कई क्षेत्रों में मुख्य द्वार के दोनों ओर गाय के गोबर या गेरू से नाग स्वरूप बनाने की भी परंपरा है।
  • जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक: नाग देवता को पहले गंगाजल और शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके पश्चात गाय के कच्चे दूध में थोड़ा गंगाजल मिलाकर अभिषेक करें। ध्यान रहे कि जीवित सांप को दूध पिलाने के बजाय केवल प्रतिमा पर ही दूध अर्पित करना शास्त्रों और जीव दया के अनुकूल है।
  • पूजन सामग्री अर्पण: नाग देवता को रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत (बिना टूटे चावल), पुष्प, दूर्वा और सुगंधित धूप अर्पित करें। इसके बाद उन्हें बेलपत्र और कनेर के पुष्प चढ़ाएं।
  • भोग व आरती: नाग देवता को भुने हुए चने, लावा (धान की खील), ऋतु फल और गाय के दूध से बनी खीर का नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद कर्पूर और धूपबत्ती से आरती उतारें।

द्वादश नाग स्मरण और अचूक पूजन मंत्र

पूजा के समय नाग गायत्री और पौराणिक द्वादश नाग स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

द्वादश नाग स्तोत्र:

"सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले।
ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥
ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।
ये च वापीतड़ागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥"

नाग गायत्री मंत्र:
"ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्॥" अथवा "ॐ नागदेवताय नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार रुद्राक्ष की माला से जाप करें।

कालसर्प दोष और राहु शांति के अचूक उपाय

सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ होने के कारण कालसर्प योग से मुक्ति पाने का यह सबसे उत्तम अवसर है:

  • चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा: चांदी से निर्मित नाग-नागिन के जोड़े का विधिवत पूजन कर उन्हें बहते हुए शुद्ध जल या नदी में प्रवाहित करें।
  • शिव मंदिर में रुद्राभिषेक: शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करते हुए 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करें।
  • दान का महत्व: पूजा के उपरांत ब्राह्मणों, संतों अथवा जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धातु के नाग का दान करें। इससे राहु और केतु जनित मानसिक तनाव और व्यापारिक रुकावटें दूर होती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या नागपंचमी के दिन जीवित सांप को दूध पिलाना चाहिए?

नहीं, जीवित सांप मांसाहारी जीव होते हैं और दूध उनके पाचन तंत्र के लिए हानिकारक होता है। शास्त्रों के अनुसार, केवल धातु या मिट्टी से बनी प्रतिमा पर ही दुग्धाभिषेक करना चाहिए।

2. नागपंचमी पर किस दिशा में मुख करके पूजा करनी चाहिए?

नाग देवता और भगवान शिव की पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए।

3. नागपंचमी और सावन सोमवार एक साथ पड़ने का क्या विशेष महत्व है?

भगवान शिव नागों को आभूषण के रूप में धारण करते हैं। सावन सोमवार और नागपंचमी का एक साथ होना शिव कृपा और सर्प दोष से मुक्ति का महासंयोग बनाता है।

4. कालसर्प दोष की शांति के लिए इस दिन क्या उपाय करना चाहिए?

शिवलिंग पर महामृत्युंजय जाप के साथ जलाभिषेक करें और चांदी के नाग-नागिन के जोड़े का पूजन कर उन्हें जल में प्रवाहित करें।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

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