30 अक्टूबर 2026 को पॉडार वर्ल्ड स्कूल (PWS), गांधीनगर, भोपाल के ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में 9 से 15 वर्ष तक के बच्चों ने अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया। बच्चों ने साहित्य, प्रकृति, विज्ञान और मानवीय मूल्यों को रंगमंच के माध्यम से प्रस्तुत कर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
भोपाल में बच्चों ने मंच पर जीवंत किए तीन नाटक, ‘किंग लियर’ में बालिका बनी राजा; पंचतत्त्वों का दिखा अनोखा रूप

मुख्य बिंदुQuick Read
- भोपाल में दी आर्ट रिवोल्यूशन के तत्वावधान में तीन नाटकों का मंचन हुआ।
- आशीर्वाद झा ने तीनों नाटकों का लेखन और निर्देशन किया।
- ‘किंग लियर’ में बालिका ने राजा की मुख्य भूमिका निभाई।
- ‘पंचतत्त्व महाभूतम्’ में पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को पात्र बनाया गया।
किंग लियर में बालिका ने निभाई राजा की भूमिका
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विश्वप्रसिद्ध नाटक 'किंग लियर' का स्कूली मंच पर प्रदर्शन रहा। आयोजकों के अनुसार, मध्य प्रदेश के किसी अकादमिक स्कूल में इस नाटक का मंचन करने का यह पहला प्रयास है। प्रस्तुति में एक खास रंगमंचीय प्रयोग भी देखने को मिला, जब राजा किंग लियर की केंद्रीय भूमिका एक बालिका ने निभाई। पारंपरिक कास्टिंग से अलग इस प्रयोग ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
पंचतत्त्व महाभूतम् में प्रकृति का संदेश
दूसरी प्रस्तुति 'पंचतत्त्व महाभूतम्' में पृथ्वी, अग्नि, जल, वायु और आकाश को जीवंत पात्रों के रूप में मंच पर उतारा गया। नाटक के माध्यम से सृष्टि की उत्पत्ति, मानव विकास, प्रकृति के दोहन और मानव तथा प्रकृति के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाया गया।
इस प्रस्तुति के जरिए बताया गया कि प्रकृति के संतुलन की अनदेखी मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। बच्चों ने पंचतत्त्वों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संतुलन का संदेश दिया।
बिना प्रॉप्स के माइम में दिखाई मानव विकास की कहानी
तीसरी प्रस्तुति 'माइम — मानव विकास की गाथा' में बच्चों ने बिना किसी प्रॉप्स के केवल शारीरिक गतिविधियों, भाव-भंगिमाओं और सामूहिक मंचीय संरचनाओं का उपयोग किया। मूक अभिनय के जरिए आदिमानव से लेकर आधुनिक तकनीक तक मानव विकास की यात्रा को दर्शाया गया।
बच्चों ने अपने शरीर को माध्यम बनाकर आग, हवा, आकाश, मशीनों और रॉकेट विज्ञान जैसी अवधारणाओं को मंच पर साकार किया। इस प्रस्तुति ने दिखाया कि बिना संवाद और बाहरी वस्तुओं के भी शारीरिक अभिव्यक्ति के जरिए प्रभावशाली कहानी कही जा सकती है।
शिक्षा में रंगमंच की भूमिका को सामने लाने की पहल
तीनों नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य, प्रकृति, विज्ञान और मानवीय मूल्यों को रंगमंच से जोड़ने का प्रयास किया गया। यह आयोजन थिएटर इन एजुकेशन यानी शिक्षा में रंगमंच की भूमिका को सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
इन प्रस्तुतियों में बच्चों ने केवल अभिनय कौशल ही नहीं दिखाया, बल्कि कल्पनाशीलता, अनुशासन, आपसी सहयोग और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी परिचय दिया। आशीर्वाद झा के निर्देशन में हुए इन नाटकों ने स्कूली शिक्षा में रंगमंच के नए प्रयोगों की संभावनाओं को रेखांकित किया।
Bhopal News: भोपाल में आयोजित यह नाट्य आयोजन बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा और रंगमंच के प्रति उनकी समझ को प्रदर्शित करने वाला रहा। तीनों प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि थिएटर बच्चों के व्यक्तित्व विकास और सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।