नवमी श्राद्ध 2026: पितृ पक्ष में 4 अक्टूबर 2026, रविवार को नवमी श्राद्ध किया जाएगा। इस दिन को मातृ नवमी भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह दिन दिवंगत माता, दादी-नानी और अन्य महिला पूर्वजों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है। इसके अलावा जिन परिजनों की मृत्यु शुक्ल या कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध भी इस दिन किया जाता है।
पंचांग के अनुसार आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे शुरू होगी और 5 अक्टूबर को सुबह 3:53 बजे समाप्त होगी। इसलिए नवमी श्राद्ध 4 अक्टूबर को ही किया जाएगा। तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म के लिए दिन के मध्याह्न के मुहूर्त महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
4 अक्टूबर 2026 नवमी श्राद्ध का मुहूर्त
प्रकाशित पंचांग गणनाओं के अनुसार 4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त लगभग सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त लगभग 12:25 बजे से 1:13 बजे तक रहेगा। इसके बाद अपराह्न काल में भी श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।
- नवमी श्राद्ध: रविवार, 4 अक्टूबर 2026
- नवमी तिथि शुरू: 4 अक्टूबर, सुबह 5:51 बजे
- नवमी तिथि समाप्त: 5 अक्टूबर, सुबह 3:53 बजे
- कुतुप मुहूर्त: 11:37 AM से 12:25 PM के आसपास
- रौहिण मुहूर्त: 12:25 PM से 1:13 PM के आसपास
- अपराह्न काल: 1:13 PM से 3:37 PM के आसपास
अलग-अलग शहरों के पंचांग में सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर के कारण मुहूर्त में कुछ मिनट का बदलाव हो सकता है। इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना बेहतर है।
नवमी श्राद्ध या मातृ नवमी पर किसका श्राद्ध करें?
नवमी श्राद्ध को मातृ नवमी भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह दिन विशेष रूप से दिवंगत माता और महिला पूर्वजों के श्राद्ध से जुड़ा है। परिवार की परंपरा के अनुसार दिवंगत दादी, नानी या अन्य महिला पूर्वजों के लिए भी श्राद्ध किया जा सकता है।
इसके अलावा जिन परिजनों की मृत्यु शुक्ल या कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को हुई हो, उनका तिथि श्राद्ध भी नवमी के दिन किया जाता है।
नवमी श्राद्ध की सरल विधि
श्राद्ध कर्म के दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पितरों का स्मरण करें। इसके बाद अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के निर्देश के अनुसार संकल्प लें। श्राद्ध कर्म के दौरान पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
- स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पितरों का स्मरण करके श्राद्ध का संकल्प लें।
- जल में काले तिल और कुश मिलाकर तर्पण करें।
- परंपरा के अनुसार चावल, तिल और घी से पिंड तैयार करके पितरों के निमित्त अर्पित करें।
- श्राद्ध कर्म के बाद पंचबलि और भोजन की व्यवस्था परिवार की परंपरा के अनुसार करें।
- ब्राह्मण या योग्य पात्र को भोजन कराकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।
पिंडदान की सामग्री और पिंडों की संख्या अलग-अलग परिवारों की परंपरा के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसी विशेष विधि को अनिवार्य मानने के बजाय स्थानीय पुरोहित या परिवार की परंपरा का पालन करना उचित है।
नवमी श्राद्ध में तर्पण कैसे करें?
तर्पण के लिए साफ पात्र में जल लें और उसमें काले तिल तथा उपलब्ध होने पर कुश रखें। पितरों का स्मरण करते हुए परंपरा के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण किया जाता है। तर्पण की सटीक विधि और मंत्र परिवार की परंपरा तथा पुरोहित के निर्देश के अनुसार रखे जा सकते हैं।
तर्पण के लिए सरल मंत्र
तर्पण करते समय पितर का नाम और गोत्र जानते हों तो उसका उच्चारण करते हुए स्वधा मंत्र का प्रयोग किया जाता है। एक प्रचलित मंत्र इस प्रकार है:
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वधा नमः।
व्यक्तिगत पितर के तर्पण में उनके नाम और गोत्र का उच्चारण करने की परंपरा भी है। यदि मंत्र या संकल्प की पूरी विधि की जानकारी नहीं है तो स्थानीय पुरोहित से सही उच्चारण और विधि पूछना बेहतर है।
पिंडदान के समय क्या करें?
पिंडदान में सामान्य तौर पर पके हुए चावल, काले तिल और घी जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। परिवार की परंपरा के अनुसार पिंड तैयार करके पितरों के निमित्त अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक कर्मकांड की विस्तृत विधि क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
नवमी श्राद्ध पर क्या करें?
- पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
- यथाशक्ति तर्पण और पिंडदान करें।
- सात्विक भोजन तैयार करें।
- परंपरा के अनुसार पंचबलि करें।
- ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन और दान दें।
- पितरों के नाम से अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
नवमी श्राद्ध पर क्या नहीं करें?
- श्राद्ध कर्म में दिखावे या अनावश्यक खर्च से बचें।
- क्रोध, विवाद और अपशब्दों से बचने की परंपरा मानी जाती है।
- श्राद्ध कर्म में मांसाहार और नशे जैसी चीजों से बचने की धार्मिक परंपरा है।
- बिना जानकारी के किसी विशेष कर्मकांड को अनिवार्य मानकर न करें; परिवार की परंपरा और पुरोहित के निर्देश को प्राथमिकता दें।
- तिथि और मुहूर्त को लेकर भ्रम होने पर स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।
नवमी श्राद्ध का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में श्राद्ध को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना गया है। मातृ नवमी विशेष रूप से दिवंगत माताओं और महिला पूर्वजों के स्मरण से जुड़ी है। इस दिन किए जाने वाले तर्पण, पिंडदान और दान को पितरों के प्रति सम्मान अर्पित करने की परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
पितृ पक्ष 2026 में श्राद्ध की तिथियां आगे भी जारी रहेंगी और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा।
