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सावन सोमवार स्पेशल: शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय किस दिशा में होना चाहिए मुख, जानें शिव पुराण का प्रामाणिक नियम, कथा

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शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही दिशा नियम शिव पुराण पूजा विधि सावन सोमवार
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय रखें उत्तर दिशा की ओर मुख, जानें शिव पुराण में वर्णित प्रामाणिक विधि और जलाभिषेक का सही क्रम।साभार: AI

मुख्य बिंदुQuick Read

  • उत्तर दिशा (उदङ्मुख) का नियम: शिव पुराण के प्रसंग अनुसार शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय साधक का मुख सदैव उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • भगवान विष्णु व ब्रह्मा जी का उपदेश: कष्टों से मुक्ति के लिए भगवान विष्णु के निर्देश पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने शिवलिंगों का निर्माण किया और ब्रह्मा जी ने ऋषियों को सही पूजा विधि बताई।

TCE धर्म डेस्क। सावन मास और विशेषकर सावन सोमवार के दिन देवाधिदेव महादेव के शिवलिंग स्वरूप पर जलाभिषेक करने का विशेष धार्मिक महत्व है। लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन शिवालयों में जाकर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं, लेकिन सनातन शास्त्रों और शिव पुराण में जलाभिषेक की दिशा और विधि को लेकर अत्यंत स्पष्ट एवं कड़े नियम बताए गए हैं। गलत दिशा में खड़े होकर या बिना सही क्रम के जल अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। पौराणिक प्रसंगों के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय साधक का मुख सदैव उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, जिसे शास्त्रों में 'उदङ्मुख' कहा गया है।

शिव पूजा की विधि से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं और शिव पुराण के प्रसंग के अनुसार, जब समस्त देवता अपने जीवन में कष्टों और विपदाओं से घिर गए, तब वे भगवान श्री हरि विष्णु की शरण में पहुंचे। भगवान विष्णु ने देवताओं को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि सभी दुखों, पापों और बाधाओं के समूल निवारण के लिए भगवान शिव की नियमित और विधिवत आराधना ही एकमात्र मार्ग है।

देवताओं के अनुरोध पर भगवान विष्णु के आदेश से देवशिल्पी विश्वकर्मा ने अलग-अलग देवताओं के लिए विशेष शिवलिंगों का निर्माण किया। इसके पश्चात भगवान विष्णु ने शिव पूजा की संपूर्ण और प्रामाणिक विधि जगतपिता ब्रह्मा जी को समझाई। ब्रह्मा जी ने वही शास्त्रीय विधि समस्त ऋषियों, मुनियों और देवताओं को विस्तार से बताई।

ब्रह्मा जी द्वारा बताई गई पूजा की तैयारी और संकल्प

ब्रह्मा जी ने ऋषियों को उपदेश देते हुए कहा कि शिव आराधना शुरू करने से पहले साधक को शारीरिक और मानसिक शुचिता का पालन करना अनिवार्य है। इसके तहत नियम इस प्रकार हैं:

  • प्रातः स्नान व स्वच्छ वस्त्र: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर पूर्णतः स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • त्रिपुंड और रुद्राक्ष: मस्तक पर पवित्र भस्म से त्रिपुंड लगाएं और गले में श्रद्धापूर्वक रुद्राक्ष की माला धारण करें।
  • दिशा व आचमन: भगवान शिव के पास शुद्ध आसन बिछाकर बैठें। पूजा शुरू करने से पहले अपना मुख उत्तर दिशा की ओर रखें और पवित्र जल से आचमन कर पूजा का संकल्प लें।

शिवलिंग अभिषेक का सही और शास्त्रीय क्रम

शिव पुराण में वर्णित पूजा क्रम के अनुसार, शिवलिंग के जलाभिषेक को तीन प्रमुख चरणों में संपन्न किया जाता है:

  • 1. जल से धोना (प्रथम स्नान): सबसे पहले तांबे या पीतल के पात्र से शुद्ध एवं शीतल जल शिवलिंग पर अर्पित कर उन्हें स्नान कराया जाता है।
  • 2. पंचद्रव्य से स्नान: इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शर्करा (पंचामृत/पंचद्रव्य) से शिवलिंग का भावपूर्वक अभिषेक किया जाता है।
  • 3. जलधारा से निरंतर अभिषेक: पंचद्रव्य अर्पण के उपरांत पुनः गंगाजल या शुद्ध जल की निरंतर और पतली धारा बनाकर शिवलिंग पर अभिषेक किया जाता है, जिससे महादेव शीतलता प्राप्त करते हैं।

उत्तर दिशा की ओर मुख करना क्यों माना गया है श्रेष्ठ?

शास्त्रों के अनुसार उत्तर दिशा को भगवान शिव और माता पार्वती का वास स्थान (कैलाश पर्वत की दिशा) माना गया है। इसके अलावा, शिवलिंग की जलधारी (अरघा) का मुख भी सामान्यतः उत्तर दिशा की ओर ही होता है। जब साधक उत्तर की ओर मुख करके बैठता है या जल अर्पित करता है, तो वह शिवलिंग के ठीक सामने या उत्तर दिशा में स्थित होकर शिव-शक्ति दोनों के अनुकूल प्रवाह क्षेत्र में रहता है। पूर्व दिशा की ओर मुख करने से पीठ पश्चिम की ओर होती है, जबकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। इसलिए शिव पुराण के विधान के अनुसार जलाभिषेक करते समय पूजक को सदैव उत्तराभिमुख (उदङ्मुख) ही रहना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए?

शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय पूजक का मुख हमेशा उत्तर दिशा (उदङ्मुख) की ओर होना चाहिए।

2. शिव पूजा शुरू करने से पहले क्या धारण करना आवश्यक बताया गया है?

पूजा का संकल्प लेने से पहले मस्तक पर भस्म का त्रिपुंड और कंठ में रुद्राक्ष धारण करने का विधान है।

3. शिवलिंग अभिषेक के तीन प्रमुख चरण कौन से हैं?

पहला शुद्ध जल से स्नान, दूसरा पंचद्रव्य (पंचामृत) से स्नान और तीसरा पुनः जलधारा से निरंतर अभिषेक करना।

4. देवताओं के लिए विभिन्न शिवलिंगों का निर्माण किसने किया था?

भगवान विष्णु के निर्देश पर देवशिल्पी विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए शिवलिंगों का निर्माण किया था और ब्रह्मा जी ने उसकी पूजा विधि ऋषियों को समझाई थी।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

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