नई दिल्ली। विदेशी क्लाइंट या कंपनियों से कमाई करने वाले भारतीय फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, डिजिटल एजेंसी और कुछ कंटेंट क्रिएटरों के लिए विदेशी मुद्रा से जुड़े नियम बदल गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए Foreign Exchange Management (Export and Import of Goods and Services) Regulations, 2026 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं।
नए नियमों में सेवाओं के निर्यात के लिए Export Declaration Form (EDF) की व्यवस्था की गई है। इसका मतलब यह है कि भारत में रहकर विदेश में किसी क्लाइंट या प्राप्तकर्ता को पात्र सेवा देने वाले लोगों को अपनी सेवा निर्यात की जानकारी निर्धारित तरीके से घोषित करनी पड़ सकती है।
किस तरह के लोगों पर असर पड़ सकता है?
यह नियम केवल किसी व्यक्ति के डॉलर में भुगतान पाने से अपने आप लागू नहीं होता। इसका संबंध इस बात से है कि संबंधित लेनदेन FEMA के तहत सेवा निर्यात की श्रेणी में आता है या नहीं। इसलिए विदेशी क्लाइंट के लिए काम करने वाले फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, एजेंसी और कुछ डिजिटल कंटेंट क्रिएटर इसके दायरे में आ सकते हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मिलने वाली विदेशी कमाई में भी वास्तविक लेनदेन की प्रकृति देखना जरूरी होगा। इसलिए YouTube, Meta, Upwork या Fiverr जैसे प्लेटफॉर्म से भुगतान पाने वाले हर व्यक्ति को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा।
EDF में क्या करना होगा?
नए नियमों के तहत सेवा निर्यातक को सेवाओं के पूरे निर्यात मूल्य की जानकारी Export Declaration Form (EDF) में देनी होगी। एक महीने में एक या अधिक विदेशी प्राप्तकर्ताओं को की गई सेवाओं के लिए एक ही EDF जमा किया जा सकता है।
नियमों के अनुसार सामान्य स्थिति में सेवा की इनवॉइस जिस महीने में जारी हुई है, उसके समाप्त होने के 30 दिन के भीतर EDF जमा किया जा सकता है। सॉफ्टवेयर से अलग सेवाओं के मामले में भुगतान प्राप्त होने की तारीख तक भी EDF जमा करने का प्रावधान है।
उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी फ्रीलांसर ने अक्टूबर 2026 में किसी विदेशी क्लाइंट के लिए सेवा दी और अक्टूबर में ही उसका इनवॉइस जारी किया। ऐसे मामले में संबंधित EDF की रिपोर्टिंग के लिए नवंबर 2026 की शुरुआत में लागू समय-सीमा का ध्यान रखना होगा। वास्तविक प्रक्रिया सेवा की प्रकृति और बैंक के साथ लेनदेन के तरीके पर निर्भर कर सकती है।
भुगतान मिलने की समय-सीमा भी महत्वपूर्ण
नए FEMA नियमों में सेवा निर्यात से मिलने वाली रकम को भारत में वापस लाने की समय-सीमा भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध नियमों और हालिया व्याख्याओं के अनुसार सामान्य सेवा निर्यात में निर्धारित समय-सीमा का पालन करना जरूरी है। भुगतान में देरी होने की स्थिति में अधिकृत डीलर बैंक से नियमों के अनुसार विस्तार का अनुरोध किया जा सकता है।
बैंक की भूमिका बढ़ी
सेवा निर्यात से जुड़े EDF और विदेशी मुद्रा लेनदेन में अधिकृत डीलर बैंक की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। RBI के निर्देशों के तहत बैंक निर्यात और आयात से जुड़े लेनदेन की रिपोर्टिंग और FEMA अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।
इसलिए विदेश से भुगतान पाने वाले फ्रीलांसर या कंटेंट क्रिएटर के लिए अपने बैंक से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उसका विशेष लेनदेन सेवा निर्यात की किस श्रेणी में आता है और EDF की प्रक्रिया उसके मामले में कैसे लागू होगी।
क्या हर विदेशी भुगतान पर EDF लगेगा?
नहीं। केवल विदेश से पैसा आने के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर भुगतान पर EDF अनिवार्य है। पहले यह देखना होगा कि भुगतान किस सेवा के बदले मिला है, भुगतान करने वाला विदेशी प्राप्तकर्ता कौन है और लेनदेन FEMA के तहत सेवा निर्यात की परिभाषा में आता है या नहीं।
इसलिए विदेशी कमाई करने वाले लोगों को अपने बैंक और जरूरत पड़ने पर पेशेवर कर या FEMA सलाहकार से अपने विशेष मामले की पुष्टि करनी चाहिए।
