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चीनी ₹70 किलो तक पहुंची, गुड़ और मक्के का आटा भी महंगा: आखिर क्यों बढ़ रहे दाम, एथेनॉल पर केंद्र ने क्या कहा?

✍️ विशेष संवाददाताPublished On 22nd Aug, 2026 @ 5:01 PM
Updated On 22nd Aug, 2026 @ 5:02 PM
महंगाई और रसोई बजट: चीनी ₹70 किलो तक पहुंची, गुड़ और मक्के का आटा भी महंगा: आखिर क्यों बढ़ रहे दाम, एथेनॉल पर केंद्र ने क्या कहा?
चीनी ₹70 किलो तक पहुंची, गुड़ और मक्के का आटा भी महंगा: आखिर क्यों बढ़ रहे दाम, एथेनॉल पर केंद्र ने क्या कहा?साभार: The City Express

देश के कई बाजारों में चीनी का खुदरा भाव ₹70 किलो तक पहुंचने की खबरों के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि इसके लिए चीनी को एथेनॉल बनाने में भेजना जिम्मेदार नहीं है। सरकार के अनुसार 2025-26 में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा, गन्ने की फसल को बीमारी और मौसम से नुकसान हुआ, त्योहारों से पहले मांग बढ़ी और कुछ जगह जमाखोरी-सट्टेबाजी ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। इस बीच सरकारी आंकड़ों में चीनी और गुड़, दोनों के औसत दाम तेजी से बढ़े हैं। मक्का आधारित एथेनॉल की बढ़ती भूमिका के कारण मक्के की मांग भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनकर उभरी है।

📌 इस खबर की बड़ी बातें (Quick Read)

  • 21 अगस्त 2026 को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य ₹58.23/kg दर्ज हुआ, लेकिन कुछ बाजारों में भाव ₹70/kg तक पहुंचने की रिपोर्ट है।
  • केंद्र ने कहा है कि एथेनॉल के लिए चीनी का उपयोग कीमत बढ़ने की मुख्य वजह नहीं है; 2025-26 में इसका हिस्सा करीब 9% रहा, जो 2022-23 में करीब 12% था।
  • सरकार के मुताबिक इस सीजन में चीनी उत्पादन शुरुआती 343 लाख टन के अनुमान से घटकर करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है।
  • गुड़ का राष्ट्रीय औसत खुदरा भाव ₹63.19/kg पहुंच गया है, जबकि मक्का आधारित एथेनॉल को बढ़ावा मिलने से मक्के की मांग पर भी असर पड़ रहा है।
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चाय से लेकर मिठाई, बच्चों के दूध से लेकर त्योहारों की रसोई तक इस्तेमाल होने वाली चीनी अचानक आम परिवारों की चिंता बन गई है। देश के कुछ बाजारों में खुदरा भाव 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि पूरे देश का औसत इससे काफी नीचे है।

उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी प्रणाली के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 58.23 रुपये प्रति किलो था। इसके मुकाबले 18 अगस्त को औसत खुदरा मूल्य 53 रुपये से थोड़ा अधिक और 19 अगस्त को 54.06 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया था। अलग-अलग शहरों, गुणवत्ता और बाजार के हिसाब से कीमतों में बड़ा अंतर हो सकता है।

यानी किसी शहर में 65 से 70 रुपये किलो का भाव मिलना और राष्ट्रीय औसत का करीब 58 रुपये रहना, दोनों बातें एक साथ संभव हैं। राष्ट्रीय औसत 555 बाजार केंद्रों से लिए गए आंकड़ों पर आधारित होता है, जबकि स्थानीय बाजार में सप्लाई, ब्रांड, गुणवत्ता और व्यापारिक लागत के अनुसार दाम अलग हो सकते हैं।

केंद्र सरकार ने क्या कहा, क्या एथेनॉल की वजह से महंगी हुई चीनी?

चीनी महंगी होने के साथ सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या गन्ने और चीनी को एथेनॉल उत्पादन में भेजे जाने के कारण घरेलू बाजार में चीनी कम पड़ रही है। केंद्र सरकार ने इस दावे को खारिज किया है।

सरकार के अनुसार, 2022-23 में करीब 12% चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल हुई थी, जबकि 2025-26 सीजन में यह हिस्सा घटकर करीब 9% रह गया है। इसलिए सरकार का तर्क है कि मौजूदा तेजी को केवल एथेनॉल डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है।

सरकारी स्पष्टीकरण में यह भी कहा गया कि देश में बनने वाले एथेनॉल का अब बड़ा हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से आ रहा है और लगभग तीन-चौथाई उत्पादन अनाज, खासकर मक्का जैसे फीडस्टॉक से जुड़ा है।

फिर चीनी इतनी महंगी क्यों हुई? 5 बड़ी वजहें

1. चीनी उत्पादन का अनुमान घट गया

सरकार के अनुसार, गन्ना उत्पादक राज्यों ने 2025-26 सीजन की शुरुआत में करीब 343 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन का अनुमान दिया था। बाद में इसे घटाकर करीब 306 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया। यानी शुरुआती अनुमान की तुलना में उत्पादन में लगभग 11% की कमी का अनुमान है।

2. गन्ने की फसल को बीमारी और मौसम का नुकसान

सरकार ने उत्पादन घटने के पीछे केवल सामान्य मौसम को जिम्मेदार नहीं बताया है। गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों का असर भी बताया गया है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश और जलभराव ने फसल को नुकसान पहुंचाया।

3. त्योहारों से पहले मांग बढ़ना

अगस्त से नवंबर के बीच गणेशोत्सव, नवरात्रि, दशहरा, दीपावली और अन्य त्योहारों के कारण मिठाई, खाद्य प्रसंस्करण और घरेलू उपयोग में चीनी की मांग बढ़ती है। सरकार ने भी बढ़ती मौसमी मांग को कीमतों पर दबाव का एक कारण माना है।

4. वैश्विक बाजार में भी दबाव

सरकार के अनुसार चीनी आपूर्ति का दबाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उत्पादन और मौसम को लेकर चिंता बनी हुई है। इससे घरेलू बाजार में भी कीमतों की धारणा और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

5. जमाखोरी और सट्टेबाजी

केंद्र ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कुछ वर्गों द्वारा की गई सट्टेबाजी और जमाखोरी भी कीमतों में तेजी की वजहों में शामिल है। यही कारण है कि सरकार ने पहले डीलरों और बाद में बड़े उपभोक्ताओं के स्टॉक पर नियंत्रण के कदम उठाए।

सरकार ने दाम रोकने के लिए क्या कदम उठाए?

केंद्र सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई की है। जुलाई 2026 में सरकार ने चीनी डीलरों के लिए स्टॉक सीमा लागू की, ताकि जरूरत से ज्यादा भंडारण और कृत्रिम कमी को रोका जा सके। यह आदेश 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक लागू किया गया।

इसके बाद बड़े चीनी उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक सीमा तय करने की कार्रवाई की गई। इसके अलावा सरकार ने घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह कदम घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और त्योहारों के मौसम में कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान कम होने के बावजूद नई पेराई शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

एथेनॉल में आखिर कितनी चीनी इस्तेमाल हो रही है?

यही इस पूरी बहस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। एथेनॉल केवल चीनी से नहीं बनता। भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का रस, चीनी सिरप, B-Heavy Molasses, C-Heavy Molasses के अलावा मक्का, क्षतिग्रस्त अनाज और कुछ अन्य स्वीकृत फीडस्टॉक का भी उपयोग किया जाता है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीनी सीजन 2022-23 में लगभग 43 लाख टन चीनी एथेनॉल की ओर डायवर्ट की गई थी। 2023-24 में यह लगभग 24 लाख टन रही और 2024-25 में करीब 34 लाख टन। सरकार ने 2025-26 के लिए मौजूदा हिस्सेदारी करीब 9% बताई है।

इसलिए यह कहना कि आज बाजार में चीनी की पूरी महंगाई केवल एथेनॉल की वजह से है, उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाता। मौजूदा सरकारी रुख के अनुसार उत्पादन में कमी, फसल नुकसान, मांग, वैश्विक स्थिति और बाजार में जमाखोरी-सट्टेबाजी का संयुक्त असर ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मक्का और मक्के का आटा क्यों चर्चा में है?

चीनी से अलग एक बड़ी आर्थिक कहानी मक्के की है। एथेनॉल उद्योग में अब मक्का एक महत्वपूर्ण कच्चा माल बन चुका है। सरकार द्वारा निर्धारित एथेनॉल खरीद मूल्य में मक्का आधारित एथेनॉल को 71.86 रुपये प्रति लीटर का दर समर्थन मिला हुआ है, जो कई अन्य फीडस्टॉक से अधिक है।

जुलाई 2026 में एथेनॉल सप्लाई में अनाज आधारित एथेनॉल की हिस्सेदारी करीब 76% रही और मक्का प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल रहा। इसका अर्थ यह है कि मक्के की मांग अब केवल भोजन, पशु आहार और पोल्ट्री तक सीमित नहीं है; ऊर्जा क्षेत्र भी इसका बड़ा उपभोक्ता बन चुका है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। केंद्र सरकार की रोजाना उपभोक्ता मूल्य निगरानी सूची में मक्के का आटा अलग से शामिल नहीं है। इसलिए पूरे देश के लिए “मक्के का आटा इतने रुपये महंगा हुआ” जैसी एक आधिकारिक राष्ट्रीय औसत कीमत उपलब्ध नहीं है। स्थानीय दुकानों, ब्रांड, गुणवत्ता और क्षेत्र के आधार पर भाव काफी अलग हो सकते हैं।

लेकिन मक्का आधारित एथेनॉल की बढ़ती मांग को देखते हुए यह कहना उचित है कि मक्के के बाजार पर नई औद्योगिक मांग का दबाव बढ़ा है। इसका असर आगे चलकर मक्का आधारित खाद्य उत्पादों और आटे की कीमतों पर पड़ सकता है, हालांकि किसी विशेष शहर में हुई कीमत वृद्धि को केवल एथेनॉल से जोड़ना बिना स्थानीय बाजार आंकड़ों के सही नहीं होगा।

गुड़ भी महंगा हुआ, 4 दिन में क्या हुआ बदलाव?

गुड़ की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त 2026 को गुड़ का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 60.9 रुपये प्रति किलो के आसपास था, जो 21 अगस्त को 63.19 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। इसी अवधि में थोक औसत कीमत भी बढ़ी है।

गुड़ और चीनी दोनों का मुख्य स्रोत गन्ना है, इसलिए गन्ने की उपलब्धता, उत्पादन, मौसम और बाजार की स्थिति का असर दोनों उत्पादों पर पड़ सकता है। लेकिन चीनी और गुड़ के बाजार, गुणवत्ता, प्रसंस्करण और वितरण व्यवस्था अलग हैं, इसलिए दोनों की कीमतें हमेशा एक ही अनुपात में नहीं बढ़तीं।

21 अगस्त 2026: सरकारी आंकड़ों में क्या हैं दाम?

वस्तु अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य अखिल भारतीय औसत थोक मूल्य
चीनी ₹58.23 प्रति किलो ₹5,381.39 प्रति क्विंटल
गुड़ ₹63.19 प्रति किलो ₹5,570.95 प्रति क्विंटल
गेहूं का आटा ₹37.32 प्रति किलो ₹3,296.93 प्रति क्विंटल

नोट: ये देशभर के औसत सरकारी आंकड़े हैं। आपके शहर या मोहल्ले में कीमत अधिक या कम हो सकती है।

आम आदमी और गृहिणियों को अभी क्या करना चाहिए?

अगर आपके स्थानीय बाजार में चीनी 65 से 70 रुपये किलो मिल रही है, तो घबराकर कई महीनों का स्टॉक खरीदना जरूरी नहीं है। सरकार ने खुद कहा है कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए स्टॉक सीमा तथा आयात जैसे कदम उठाए गए हैं।

  • एक से अधिक दुकानों का भाव जरूर जांचें: खुले बाजार, सुपरमार्केट और थोक विक्रेता के दाम अलग हो सकते हैं।
  • ब्रांडेड और खुली चीनी की तुलना करें: पैकेजिंग और ब्रांडिंग के कारण प्रति किलो कीमत में अंतर हो सकता है।
  • जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें: बड़ी खरीदारी कीमतों में और कृत्रिम दबाव पैदा कर सकती है।
  • मिठाई और घरेलू उपयोग की योजना बनाएं: त्योहारों के दौरान एकमुश्त खरीद की जगह जरूरत के हिसाब से खरीदना बेहतर हो सकता है।
  • गुड़ और मक्के के आटे में स्थानीय कीमत देखें: इन दोनों उत्पादों में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा स्थानीय गुणवत्ता और सप्लाई का असर होता है।

क्या आने वाले दिनों में चीनी सस्ती होगी?

इसका सीधा जवाब अभी निश्चित रूप से नहीं दिया जा सकता। कीमतों की दिशा कई बातों पर निर्भर करेगी—सरकारी स्टॉक नियंत्रण कितना प्रभावी रहता है, शुल्क-मुक्त आयात की चीनी कब और कितनी मात्रा में बाजार तक पहुंचती है, त्योहारों की मांग कितनी बढ़ती है और अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में उत्पादन कैसा रहता है।

फिलहाल केंद्र का दावा है कि देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सरकार कीमतों की निगरानी कर रही है। इसलिए आने वाले सप्ताहों में सबसे महत्वपूर्ण संकेतक स्थानीय खुदरा भाव, थोक बाजार की कीमतें और सरकार की आपूर्ति संबंधी कार्रवाई होगी।

केवल एथेनॉल को दोष देना सही नहीं

चीनी की कीमत 70 रुपये किलो तक पहुंचने की खबर ने स्वाभाविक रूप से लोगों को चिंतित किया है, लेकिन तथ्य यह है कि पूरे देश में कीमत एक जैसी नहीं है। 21 अगस्त के सरकारी आंकड़ों में राष्ट्रीय औसत 58.23 रुपये किलो था, जबकि कुछ स्थानीय बाजारों में कीमत इससे काफी ऊपर पहुंच चुकी है।

केंद्र सरकार के आधिकारिक रुख के अनुसार मौजूदा तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में अपेक्षा से कम उत्पादन, गन्ने की फसल को बीमारी और जलभराव से नुकसान, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, वैश्विक आपूर्ति दबाव और बाजार में जमाखोरी-सट्टेबाजी शामिल हैं। एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल जरूर होता है, लेकिन 2025-26 में इसका अनुपात पहले के मुकाबले कम बताया गया है।

दूसरी ओर, मक्का आधारित एथेनॉल तेजी से बढ़ रहा है और यही वजह है कि मक्का अब खाद्य और पशु आहार के साथ ऊर्जा क्षेत्र का भी महत्वपूर्ण कच्चा माल बन गया है। इसलिए आने वाले समय में रसोई और ईंधन की अर्थव्यवस्था का यह संबंध आम उपभोक्ता के लिए और महत्वपूर्ण होता जाएगा।

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MP IAS Transfer: रीवा जिला पंचायत को मिली नई CEO, सृष्टि देशमुख गोडा की पोस्टिंग; 32 IAS अफसरों का तबादला

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मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने 32 IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव में सृष्टि देशमुख गोडा को जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बनाया गया है।

6 घंटे पहले|दतिया

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Indore Tourism: एक साल में 2.80 करोड़ पर्यटक पहुंचे, उज्जैन के बाद MP का दूसरा सबसे बड़ा टूरिज्म हब बना शहर

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इंदौर की पहचान अब सिर्फ मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी तक सीमित नहीं रह गई है। उपलब्ध 2025 पर्यटन आंकड़ों के अनुसार शहर में 2 करोड़ 80 लाख 70 हजार से ज्यादा पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं। इस आंकड़े ने इंदौर को मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है, जबकि उज्जैन करीब 8.40 करोड़ पर्यटक यात्राओं के साथ सबसे आगे रहा।

6 घंटे पहले|इंदौर
MP IAS Transfer: रीवा जिला पंचायत को मिली नई CEO, सृष्टि देशमुख गोडा की पोस्टिंग; 32 IAS अफसरों का तबादला

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मध्य प्रदेश में शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। राज्य सरकार ने 32 IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। इस बदलाव में सृष्टि देशमुख गोडा को जिला पंचायत रीवा का मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) बनाया गया है।

6 घंटे पहले|शिवपुरी
इंदौर के सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा की बड़ी गड़बड़ी: किचन में चूहे- कॉकरोच, 66 किलो नॉनवेज मिला; लाइसेंस सस्पेंड

इंदौर के सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा की बड़ी गड़बड़ी: किचन में चूहे- कॉकरोच, 66 किलो नॉनवेज मिला; लाइसेंस सस्पेंड

इंदौर के विजय नगर स्थित चर्चित सयाजी होटल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में किचन और स्टोरेज एरिया में चूहे- कॉकरोच, वेज-नॉनवेज सामग्री का साथ रखा जाना, करीब 66 किलो बिना उचित पैकिंग और लेबलिंग वाला नॉनवेज तथा खराब खाद्य सामग्री मिलने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के बाद होटल की खाद्य अनुज्ञप्ति निलंबित कर दोनों किचन और बेकरी सील कर दी गई।

7 घंटे पहले|इंदौर