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[ट्रेंडिंग खबर]फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हुए: 8 लाख तक लोग सड़कों पर उतरे, लिमोज का सिटी हॉल जला

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फ्रांस के लिमोज शहर में प्रदर्शन के दौरान आग से प्रभावित ऐतिहासिक सिटी हॉल।
फ्रांस में 17 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान लिमोज के ऐतिहासिक सिटी हॉल में लगी आग।

मुख्य बिंदुQuick Read

  • प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में वेतन और पेंशन बढ़ाना, महंगाई कम करना और सरकारी सेवाओं में सुधार शामिल हैं।
  • आयोजकों ने करीब 8 लाख प्रदर्शनकारियों का दावा किया, जबकि सरकार का आंकड़ा लगभग 5.5 लाख था।
  • लिमोज के 1883 में उद्घाटित सिटी हॉल में आग से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

फ्रांस में महंगाई, ईंधन की कीमतों और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन 17 अक्टूबर को हिंसक हो गया। देशभर में सैकड़ों स्थानों पर प्रदर्शन हुए। कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, गाड़ियों में आग लगाई गई और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। लिमोज शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने से इमारत को भारी नुकसान पहुंचा।

प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकार और आयोजकों के आंकड़ों में अंतर है। आयोजकों ने करीब 8 लाख लोगों के शामिल होने का दावा किया, जबकि सरकार के अनुसार यह संख्या लगभग 5.5 लाख थी। हिंसक घटनाओं के बीच गिरफ्तारियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग अपडेट सामने आए।

पेरिस समेत कई शहरों में हिंसा और आगजनी

राजधानी पेरिस सहित कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ गया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर वस्तुएं फेंकीं, वाहनों में आग लगाई और दुकानों को निशाना बनाया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया।

रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा सभी प्रदर्शनों में नहीं हुई। बड़ी संख्या में लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा लिया, जबकि कुछ समूहों की गतिविधियों के कारण हालात बिगड़े। अधिकारियों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

लिमोज के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग

लिमोज शहर में नकाबपोश लोगों के एक समूह ने सिटी हॉल पर हमला किया और इमारत में आग लगा दी। आग छत तक पहुंच गई और भवन के बड़े हिस्से को नुकसान हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, इमारत का काफी हिस्सा आग से प्रभावित हुआ।

यह ऐतिहासिक भवन 1883 में उद्घाटित हुआ था। आग के कारण इसे विरासत के लिहाज से बड़ा नुकसान माना गया। घटना के दौरान शहर के अन्य हिस्सों में भी तनाव, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की खबरें आईं।

स्कूलों के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन

फ्रांस में हालिया आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर छात्रों के विरोध से हुई थी। धीरे-धीरे इसमें अभिभावक, शिक्षक, मजदूर संगठन और महंगाई से परेशान दूसरे वर्ग भी शामिल हो गए।

छात्रों की मांग थी कि स्कूलों में शिक्षकों और जरूरी संसाधनों की कमी दूर की जाए। कई इलाकों में स्कूलों के बाहर प्रदर्शन और अवरोध किए गए। बाद में यह आंदोलन शिक्षा से आगे बढ़कर वेतन, पेंशन, महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दों तक फैल गया।

5 अक्टूबर को उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान 15 वर्षीय छात्र का हाथ ग्रेनेड विस्फोट में गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू की गई। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी।

प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें

आंदोलन में शामिल लोगों की मांगें केवल ईंधन की कीमतों तक सीमित नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी।
  • महंगाई पर नियंत्रण और जीवनयापन की लागत कम करना।
  • सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार।
  • स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना और जर्जर इमारतों की मरम्मत करना।

इन मांगों के जरिए प्रदर्शनकारी आर्थिक दबाव और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर सरकार का ध्यान खींचना चाहते हैं। आंदोलन में अलग-अलग सामाजिक समूहों की भागीदारी ने इसके दायरे को बढ़ाया है।

दुकानों में लूटपाट और पुलिस से झड़पें

कुछ शहरों में प्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी युवाओं के समूह सड़कों पर घूमते रहे। कई जगहों पर दुकानों के शीशे तोड़े गए और सुपरमार्केट, कपड़ों के शोरूम तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। कुछ स्थानों पर पुलिस और इन समूहों के बीच झड़पें हुईं।

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, नकाब पहने कुछ लोगों ने संगठित तरीके से दुकानों में घुसकर सामान लूटा। हालांकि, इन घटनाओं में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती।

मैक्रों सरकार ने हिंसा के खिलाफ कार्रवाई का संकेत दिया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की। सरकार ने संकेत दिया कि तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार की चुनौती एक तरफ हिंसक घटनाओं को नियंत्रित करने और दूसरी तरफ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों से निपटने की है। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

2018 के येलो वेस्ट आंदोलन की याद

फ्रांस के मौजूदा प्रदर्शनों की तुलना 2018 के येलो वेस्ट आंदोलन से की जा रही है। उस समय ईंधन पर कर बढ़ाने की योजना के खिलाफ बड़ी संख्या में लोग पीली चमकदार जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरे थे। आंदोलन बाद में महंगाई, कर व्यवस्था और आर्थिक असमानता से जुड़े व्यापक विरोध में बदल गया था।

पीली जैकेट फ्रांस में वाहन चालकों के लिए आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला सुरक्षा परिधान है। प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी पहचान और विरोध के प्रतीक के रूप में अपनाया था। मौजूदा आंदोलन में भी उस विरोध की वापसी की अपीलों का उल्लेख किया जा रहा है।

राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक दबाव

फ्रांस में बढ़ते विरोध के बीच राजनीतिक दलों के लिए भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन और वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलांशों जैसे नेताओं के रुख को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है।

आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस की भूमिका और आर्थिक मांगों पर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों के विचार हैं। आने वाले महीनों में सरकार की प्रतिक्रिया और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर होने वाले फैसले देश की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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