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[ट्रेंडिंग खबर]मक्का की मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य के मामले में 2 बांग्लादेशियों को फांसी: ढाका बोला- पहले सूचना नहीं दी गई

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सऊदी अरब में मक्का क्षेत्र की मस्जिद से जुड़े मामले में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने की खबर।
मक्का में दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दिए जाने के बाद बांग्लादेश ने सऊदी अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा।

मुख्य बिंदुQuick Read

  • सऊदी गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों को ताजीर के तहत मौत की सजा दी गई थी।
  • बांग्लादेश के वाणिज्य दूतावास ने कहा कि उसे फांसी से पहले सूचना नहीं मिली।
  • सऊदी अधिकारियों ने दोनों की पहचान नाज़ेरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सिति अख्तर के रूप में की है।
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2026 में 5 अक्टूबर तक सऊदी अरब में कम से कम 175 लोगों को फांसी दी जा चुकी थी।

सऊदी अरब में मक्का क्षेत्र की एक मस्जिद के भीतर कथित अनैतिक कृत्य के मामले में दो बांग्लादेशी नागरिकों को फांसी दे दी गई। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को अदालत से मौत की सजा सुनाई गई थी। सजा 14 अक्टूबर 2026 को लागू की गई। इस मामले में बांग्लादेश सरकार ने चिंता जताई है, क्योंकि उसके जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास को फांसी से पहले इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।

बांग्लादेश ने सऊदी अरब से मांगा आधिकारिक जवाब

बांग्लादेश के जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास ने कहा कि उसे दोनों नागरिकों की फांसी से पहले सऊदी अधिकारियों की ओर से सूचना नहीं मिली थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद दूतावास ने सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा।

बांग्लादेश सरकार की राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि सरकार मामले से जुड़ी अधिक जानकारी जुटा रही है। सऊदी अरब से आधिकारिक जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई पर फैसला किया जाएगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच इस मामले में जानकारी साझा करने का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

सऊदी गृह मंत्रालय ने क्या बताया?

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने जांच के बाद दोनों नागरिकों के खिलाफ आरोप तय किए और मामला सक्षम अदालत में भेजा। अदालत ने आरोपों को साबित मानते हुए ताजीर के तहत मौत की सजा सुनाई। बाद में संबंधित न्यायिक प्राधिकरण ने फैसले को बरकरार रखा और सजा लागू करने का शाही आदेश जारी हुआ।

ताजीर इस्लामी कानून के अंतर्गत ऐसी सजा को कहा जाता है, जिसमें सजा का निर्धारण न्यायिक विवेक के आधार पर किया जाता है। सऊदी गृह मंत्रालय ने कहा कि अपराध की गंभीरता और मस्जिद की पवित्रता के उल्लंघन को सजा का आधार बनाया गया। हालांकि, मंत्रालय के सार्वजनिक बयान में कथित कृत्य की विस्तृत प्रकृति और मस्जिद की पहचान नहीं बताई गई।

दोनों नागरिकों की पहचान बताई गई

सऊदी अधिकारियों के बयान के अनुसार, मृत्युदंड पाने वालों की पहचान नाज़ेरुल इस्लाम अब्दुल बासिर और सिति अख्तर के रूप में हुई है। दोनों बांग्लादेशी नागरिक थे। कुछ रिपोर्टों में उन्हें पति-पत्नी बताया गया है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक बयान में उनके आपसी वैवाहिक संबंध की पुष्टि नहीं की गई है।

इस मामले में आरोपों का विवरण सीमित होने के कारण घटना से जुड़ी परिस्थितियों पर स्वतंत्र निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। फिलहाल सऊदी सरकार का आधिकारिक पक्ष और बांग्लादेश की ओर से मांगा गया स्पष्टीकरण ही मामले की प्रमुख जानकारी है।

सऊदी अरब में मृत्युदंड के आंकड़े

सऊदी अरब में मृत्युदंड का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 22 जून 2026 को बताया था कि उस साल 22 जून तक सऊदी अरब में 96 लोगों को फांसी दी जा चुकी थी। इनमें 61 लोगों को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में मृत्युदंड दिया गया था।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के एक अन्य अपडेट के अनुसार, 5 अक्टूबर 2026 तक सऊदी अरब में कम से कम 175 लोगों को फांसी दी जा चुकी थी। यह आंकड़ा संगठन के उस समय तक उपलब्ध रिकॉर्ड पर आधारित था। मृत्युदंड के मामलों में विदेशी नागरिकों की स्थिति भी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की चिंता का विषय रही है।

श्रीलंकाई नागरिक की मौत की सजा भी रद्द हुई

अक्टूबर 2026 में सऊदी अरब की अदालत ने श्रीलंका के नागरिक अनोजन सिवारासा की मौत की सजा रद्द कर दी थी। उन्हें सोशल मीडिया पर धार्मिक टिप्पणी से जुड़े मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था। श्रीलंका की ओर से कूटनीतिक प्रयास किए जाने के बाद सजा रद्द किए जाने की खबर सामने आई।

बांग्लादेशी नागरिकों के मामले में अब ढाका सऊदी अधिकारियों के जवाब का इंतजार कर रहा है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सऊदी सरकार मामले के संबंध में क्या आधिकारिक जानकारी साझा करती है और बांग्लादेश सरकार उसके बाद क्या कदम उठाती है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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