रीवा के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर विरोध तेज हो गया है। शनिवार शाम ग्राम पंचायत सरई कला के रोझौही गांव में जमीन की प्रारंभिक जांच और बोरहोल के लिए पहुंची दो बोरिंग मशीनों को ग्रामीणों के विरोध के बाद वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम सभा की असहमति के बावजूद परियोजना से जुड़ा काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, एमएस फुग्रो कंपनी की टीम प्रस्तावित टाटा पावर न्यूक्लियर पावर प्लांट की प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत जमीन की जांच के लिए पहुंची थी। यहां कुल 8 बोरहोल किए जाने थे। इनमें 4 बोरहोल करीब 100 मीटर और 4 बोरहोल करीब 50 मीटर गहराई तक किए जाने की बात ग्रामीणों ने बताई है।
मशीनें पहुंचते ही जुटे ग्रामीण, काम रुकवाया
रोझौही गांव में बोरिंग मशीनें पहुंचने की जानकारी मिलते ही सरई कला और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने मशीनों से होने वाले काम का विरोध किया और कंपनी की टीम के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विरोध के बाद दोनों बोरिंग मशीनों को वापस लौटना पड़ा।
ग्रामीणों का दावा है कि रोझौही समेत आसपास के करीब 100 गांवों के लोग प्रस्तावित परियोजना को लेकर विरोध में हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में परमाणु बिजली संयंत्र की स्थापना को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान किए बिना आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
ग्राम सभा की असहमति के बावजूद काम पर सवाल
ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कलेक्टर के पत्र क्रमांक 117 के विरोध में ग्राम सभा की बैठक में असहमति का प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम सभा के फैसले की लिखित सूचना सरपंच और सचिव की ओर से शासन-प्रशासन को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि ग्राम सभा ने अपनी असहमति दर्ज करा दी है तो इसके बावजूद पंचायत क्षेत्र में परियोजना से जुड़ी जमीन की जांच के लिए बोरिंग मशीनें कैसे पहुंचीं। इसी मुद्दे को लेकर मौके पर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली।
ग्रामीणों ने जमीन, पानी और भविष्य को लेकर जताई चिंता
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने कहा कि रोझौही और आसपास के गांवों में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ग्राम सभा में असहमति का प्रस्ताव पारित होने के बाद भी यदि जमीन की जांच के लिए मशीनें पहुंच रही हैं तो प्रशासन को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
स्थानीय निवासी आशीष जायसवाल ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण अपनी जमीन, पानी और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि ग्राम सभा की असहमति के बावजूद बोरिंग मशीनें पहुंचने से ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ी है।
8 बोरहोल की तैयारी, ग्रामीणों ने जताया विरोध
ग्रामीणों के अनुसार, प्रस्तावित प्रारंभिक जांच के तहत कुल 8 बोरहोल किए जाने थे। इनमें 4 की गहराई करीब 100 मीटर और 4 की गहराई करीब 50 मीटर रखी जानी थी। हालांकि, ग्रामीणों के विरोध के चलते शनिवार को पहुंची दोनों मशीनों से काम आगे नहीं बढ़ सका।
कंपनी और प्रशासन का पक्ष सामने नहीं आया
मामले में खबर लिखे जाने तक संबंधित कंपनी और प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के आरोपों तथा बोरिंग मशीनों के पहुंचने को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए ग्राम सभा की असहमति, मशीनों के पहुंचने की अनुमति और प्रस्तावित परियोजना की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित अधिकारियों या कंपनी के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट होगी।
टाटा पावर ने 2026 में मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों में न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए साइट स्टडी शुरू करने की जानकारी दी थी। कंपनी ने कहा था कि वह साइट स्टडी और परियोजना से जुड़े तकनीकी विकल्पों पर काम कर रही है।
फिलहाल रोझौही में ग्रामीणों के विरोध के बाद बोरिंग मशीनों के लौटने से प्रस्तावित परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विवाद और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने कहा है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका विरोध जारी रहेगा।
