रीवा संभागायुक्त ने पीआईयू, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल निगम की संभागीय समीक्षा बैठक में ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि टेंडर जारी होने के बाद जमीन की स्थिति के कारण इस्टीमेट में संशोधन करना पड़ता है, तो संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बैठक में निर्माण कार्यों में देरी, ठेकेदारों की मॉनीटरिंग, पेयजल योजनाओं और सरकारी जमीन पर पानी की टंकियों के निर्माण की समीक्षा भी की गई।
रीवा में टेंडर से पहले जमीन की जांच जरूरी: कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने दिए सख्त निर्देश

मुख्य बिंदुQuick Read
- टेंडर से पहले स्थल निरीक्षण: जमीन की स्थिति जांचने के बाद ही निर्माण कार्यों के टेंडर जारी करने के निर्देश।
- रिवाइज्ड इस्टीमेट पर कार्रवाई: निर्माण लागत दोबारा बढ़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जांच होगी।
टेंडर से पहले जमीन की जांच क्यों जरूरी?
कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने कहा कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पीआईयू के अधिकारी भूमि और स्थल का निरीक्षण कर लें। बाद में जमीन पथरीली या उबड़-खाबड़ होने के कारण निर्माण कार्य में परेशानी नहीं आनी चाहिए। स्थल का निरीक्षण करने के बाद ही टेंडर जारी किए जाएं।
उन्होंने चेतावनी दी कि टेंडर जारी होने के बाद इस्टीमेट में संशोधन की जरूरत पड़ने पर संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की जिम्मेदारी तय की जाएगी। बिना स्थल निरीक्षण के ड्राइंग और डिजाइन तैयार करने वाले कंसल्टेंटों की सूची बनाकर अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कमिश्नर ने चीफ इंजीनियरों को निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थ इंजीनियरों से पहले जमीन का मुआयना कराएं। संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र पटेल को रिवाइज्ड इस्टीमेट वाले निर्माण कार्यों की जांच के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण में देरी पर ठेकेदारों के खिलाफ होगी कार्रवाई
समीक्षा बैठक में कमिश्नर ने निर्माण कार्यों में एक से दो वर्ष तक की अनावश्यक देरी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि काम समय पर पूरा नहीं होने से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ती है और शासन को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
सभी महाप्रबंधकों को ठेकेदारों के काम की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए। निर्धारित समय सीमा में निर्माण पूरा नहीं करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ अनुबंध समाप्त करने और ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई करने को कहा गया।
कमिश्नर ने यह भी निर्देश दिए कि बजट आवंटन में देरी होने पर भी निर्माण कार्य अनावश्यक रूप से बंद नहीं होने चाहिए। इसके लिए सक्षम ठेकेदारों का चयन करने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त टीम तथा मशीनें लगाकर काम तेज करने को कहा गया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित विभाग को अनिवार्य रूप से हैंडओवर भी किया जाए।
स्कूल, छात्रावास और स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण की समीक्षा
बैठक में पीआईयू के तहत बन रहे उप स्वास्थ्य केंद्र, सांदीपनि स्कूल, सर्किट हाउस, हाई स्कूल, छात्रावास, नर्सिंग कॉलेज, चिकित्सा महाविद्यालय में कक्ष, कुटुंब न्यायालय और पानी की टंकियों सहित विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।
जानकारी दी गई कि कुछ स्कूल भवनों, छात्रावासों, उप स्वास्थ्य केंद्रों, शासकीय आवासों, रिकॉर्ड रूम, सर्किट हाउस, सांदीपनि स्कूल और पानी की टंकियों के निर्माण कार्य भूमि आवंटन, ड्राइंग-डिजाइन को अंतिम रूप नहीं मिलने या बजट आवंटन की कमी के कारण धीमी गति से चल रहे हैं। कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं का निराकरण कर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
निजी जमीन पर पानी की टंकी बनाने पर नाराजगी
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि संभाग में 1,467 एकल नल ग्राम योजनाएं और 4,374 समूह जल योजनाएं संचालित हैं। कमिश्नर ने सभी स्वीकृत नल-जल योजनाओं का काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में यह भी बताया गया कि संभाग के कुछ जिलों में नल-जल योजना के तहत पानी की टंकियां सरकारी जमीन के बजाय निजी भूमि पर बनाई गई हैं। इस पर कमिश्नर ने नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि पानी की टंकी का निर्माण शुरू करने से पहले स्थानीय पटवारी से भूमि की स्थिति की जानकारी अनिवार्य रूप से ली जाए। टंकियों का निर्माण सरकारी जमीन पर ही किया जाए। यदि निजी जमीन पर टंकी बन चुकी है, तो नियमानुसार भूमि अदला-बदली की प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए।
जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन की स्थिति
बैठक में बताया गया कि संभाग में घरेलू नल कनेक्शन यानी एफएचटीसी के कुल 3,86,413 कनेक्शन का लक्ष्य प्रस्तावित था। इसके मुकाबले अब तक 3,45,080 कनेक्शन पूरे किए जा चुके हैं। कमिश्नर ने नल-जल योजनाओं का काम पूरा करने के साथ कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से जारी करने के निर्देश दिए।
जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन, उच्च स्तरीय पानी की टंकियों और संपवेल के निर्माण की अद्यतन स्थिति की भी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने नल-जल योजनाओं के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने और संबंधित अधिकारियों से शत-प्रतिशत मरम्मत पूरी होने का प्रमाण पत्र लेने को कहा।
जल निगम की टंकियों का निर्माण डेढ़ महीने में पूरा करने के निर्देश
जल निगम के कार्यों की समीक्षा के दौरान रीवा बाणसागर, टमस समूह जलप्रदाय, कंदेला समूह जलप्रदाय, गोंडा देवसर जल समूह और बैढ़न एक एवं दो समूह जलप्रदाय योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई।
कमिश्नर शीलेंद्र सिंह ने निर्देश दिए कि जिन पानी की टंकियों का निर्माण जल निगम शुरू कर चुका है, उनका काम डेढ़ महीने के भीतर पूरा किया जाए। बैठक में संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र पटेल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।