पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस में मंगलवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने तलाशी ली। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में की गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 5 अक्टूबर के आदेश के बाद CBI ने मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित कैंप ऑफिस के अलावा राजबीर सिंह घुम्मन के घर और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी CBI की टीमें पहुंचीं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार घुम्मन के घर के अलावा मोहाली में उनके एक रिश्तेदार से जुड़े ठिकाने पर भी तलाशी की गई। जांच के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI की कार्रवाई
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के DGP को भेजी गई तीन चिट्ठियों से जुड़ा है। ED ने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए FIR दर्ज करने की मांग की थी। आरोपों में सरकारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, टेंडर, लाइसेंस और अन्य सरकारी मंजूरियों को प्रभावित करने जैसी बातें शामिल थीं।
5 अक्टूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपते हुए FIR दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने पंजाब सरकार और पुलिस को CBI को सहयोग करने को कहा है। CBI को दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट देने का निर्देश भी दिया गया है।
OSD राजबीर घुम्मन पर क्या आरोप हैं?
ED के अनुसार, नितिन गोहल नाम का व्यक्ति कथित तौर पर सरकारी कामकाज से जुड़े लाभ चाहने वाले लोगों और मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के बीच बिचौलिए की भूमिका निभाता था। ED के आरोपों में ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्रभावित करने, सरकारी दस्तावेजों तक कथित पहुंच, हथियार लाइसेंस और सरकारी मंजूरियां दिलाने जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है।
ED ने हाईकोर्ट के सामने रखे गए अपने मटीरियल में WhatsApp चैट और अन्य डिजिटल सामग्री का भी उल्लेख किया था। एजेंसी के अनुसार कुछ चैट कथित तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर और लाइसेंस से जुड़े मामलों की ओर इशारा करती हैं। इन आरोपों की वास्तविकता अब CBI की जांच में तय होगी।
ED ने नकदी बरामदगी का भी दावा किया
ED ने हाईकोर्ट में बताया था कि उसकी जांच के दौरान नितिन गोहल से जुड़े ठिकानों पर तलाशी में दस्तावेज और डिजिटल सामग्री मिली। एजेंसी ने 20.98 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी दावा किया था। यह सामग्री ED के आरोपों का हिस्सा है और इसकी जांच अब CBI की प्रक्रिया में होगी।
मामला जमीन और CLU जांच से कैसे जुड़ा?
ED की कार्रवाई मूल रूप से मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़े एक मामले से सामने आई थी। इसमें GMADA से संबंधित जमीन, Change of Land Use (CLU), प्रॉपर्टी लेन-देन और सरकारी मंजूरियों से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच का संदर्भ सामने आया। ED ने इसी जांच से मिली जानकारी पंजाब पुलिस के साथ साझा की थी।
हाईकोर्ट ने CBI जांच क्यों सौंपी?
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ED की ओर से साझा की गई सामग्री प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध की ओर इशारा करती है और उचित जांच के लिए FIR दर्ज करना जरूरी है। कोर्ट ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की जरूरत बताते हुए मामला CBI को सौंप दिया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपों की सच्चाई जांच के दौरान सामने आएगी। हाईकोर्ट का आदेश अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता है।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने मंगलवार तड़के करीब 1:42 बजे सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की। सरकार ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उसी दिन सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को सूचीबद्ध करने की कोशिश की जाएगी।
सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सुनवाई के दौरान चुनाव के समय इस तरह के मामलों को उठाए जाने और संघीय ढांचे से जुड़े सवालों का मुद्दा उठाया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल मंगलवार को सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की।
भगवंत मान ने CBI कार्रवाई पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने CBI की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र की जांच एजेंसियों का इस्तेमाल उनकी सरकार और उन्हें बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। ये मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
वहीं, मामले में लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को राजबीर सिंह घुम्मन और अन्य संबंधित लोगों की ओर से पहले खारिज किया गया है। अब CBI की जांच से आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल CBI की जांच जारी है और एजेंसी मामले से जुड़े लोगों, दस्तावेजों तथा डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। हाईकोर्ट ने CBI से दो महीने के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की SLP की सुनवाई इस मामले की आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।
