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₹70 तक पहुंची चीनी, अब कब घटेंगे दाम? ISMA ने कहा- देश में कमी नहीं, सरकार ने खोला इंपोर्ट का रास्ता

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नई दिल्ली | महंगाई और बाजार अपडेट: ₹70 तक पहुंची चीनी, अब कब घटेंगे दाम? ISMA ने कहा- देश में कमी नहीं, सरकार ने खोला इंपोर्ट का रास्ता
₹70 तक पहुंची चीनी, अब कब घटेंगे दाम? ISMA ने कहा- देश में कमी नहीं, सरकार ने खोला इंपोर्ट का रास्तासाभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • कई बाजारों में खुदरा चीनी की कीमत 65-70 रुपए किलो तक पहुंचने की रिपोर्ट।
  • ISMA का दावा- देश में त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध।
  • केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी।
  • सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए स्टॉक सीमा सहित कई कदम उठाए हैं।

Sugar Price Update: देश के कई हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपए किलो तक पहुंचने की खबरों के बीच सरकार और चीनी उद्योग ने राहत देने वाला दावा किया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

हालांकि, आम उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है, तो बाजार में कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ीं और क्या आने वाले दिनों में 65-70 रुपए किलो तक पहुंची खुदरा कीमतों में राहत मिलेगी?

सरकार के आंकड़ों में भी तेजी से बढ़ी कीमत

केंद्र सरकार के अनुसार, चीनी की औसत कीमत 20 जुलाई 2026 को ₹48.18 प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर ₹55.70 प्रति किलो पहुंच गई। यानी एक महीने के भीतर औसत कीमत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सरकार का कहना है कि उत्पादन अनुमान से कम रहना, त्योहारों से पहले बढ़ती मांग, गन्ने की फसल को मौसम और बीमारियों से नुकसान, वैश्विक बाजार में सप्लाई का दबाव और कुछ स्तर पर जमाखोरी व सट्टेबाजी जैसे कारणों ने कीमतों को प्रभावित किया है।

ISMA बोला- देश में चीनी की कमी नहीं

चीनी उद्योग के संगठन ISMA ने बाजार में बनी कमी की आशंका को खारिज करते हुए कहा है कि देश में उपलब्ध स्टॉक त्योहारों के मौसम की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। उद्योग का मानना है कि कीमतों में आई हालिया तेजी वास्तविक सप्लाई संकट से अधिक बाजार की धारणा और सट्टेबाजी से प्रभावित हो सकती है।

भारत में अगस्त से नवंबर के बीच गणेशोत्सव, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों के कारण चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। इसी अवधि में मिठाई, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उद्योगों की खपत भी बढ़ती है।

सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को दी मंजूरी

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन यानी 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह फैसला घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।

आयात की अनुमति अक्टूबर के अंत तक के लिए दी गई है। हालांकि, विदेश से आने वाली नई खेप को भारत पहुंचने में समय लगेगा। ऐसे में इसका पूरा असर तुरंत खुदरा बाजार में दिखाई देना जरूरी नहीं है।

पुराने स्टॉक से भी बढ़ सकती है सप्लाई

सरकार के फैसले के तहत कुछ पोर्ट-आधारित रिफाइनरियों को आयातित कच्ची चीनी से तैयार चीनी घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति का रास्ता भी मिला है। इससे बाजार में अपेक्षाकृत जल्दी अतिरिक्त सप्लाई आने की संभावना जताई जा रही है।

जमाखोरी पर भी सरकार की नजर

केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच जमाखोरी रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। देशभर में चीनी डीलरों के लिए स्टॉक सीमा लागू की गई है और सरकार ने चीनी मिलों व व्यापारियों के स्टॉक की निगरानी और भौतिक सत्यापन की बात भी कही है।

सरकार का मानना है कि कृत्रिम कमी पैदा करने और अनावश्यक मूल्य वृद्धि को रोकना जरूरी है, ताकि त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

क्या अक्टूबर से मिल सकती है राहत?

सरकार ने राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से पेराई शुरू करने की दिशा में तैयारी करने को कहा है। सरकार के अनुसार, इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले 10 लाख टन से अधिक तक पहुंच सकता है।

नई फसल से उत्पादन शुरू होने, आयातित चीनी की उपलब्धता बढ़ने और जमाखोरी पर कार्रवाई जैसे कदमों का असर कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, खुदरा बाजार में चीनी कितनी जल्दी सस्ती होगी, यह स्थानीय सप्लाई, परिवहन, व्यापारिक मार्जिन और बाजार की स्थिति पर भी निर्भर करेगा।

देश में चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा

सरकार के अनुसार, चालू सीजन में चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है। पहले उत्पादन करीब 343 लाख टन रहने का अनुमान था, जबकि बाद में इसे करीब 306 लाख टन बताया गया।

गन्ने की फसल पर रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ-साथ अत्यधिक बारिश और जलभराव का असर भी उत्पादन पर पड़ा है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल- ₹70 वाली चीनी कब सस्ती होगी?

देश में पर्याप्त स्टॉक होने के दावे के बावजूद कई बाजारों में उपभोक्ताओं को महंगी चीनी खरीदनी पड़ रही है। सरकार और उद्योग दोनों का कहना है कि सप्लाई बढ़ाने और जमाखोरी रोकने के कदमों से बाजार की स्थिति सुधर सकती है।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीनी तुरंत किसी निश्चित कीमत तक नीचे आ जाएगी। लेकिन 10 लाख टन आयात, अतिरिक्त घरेलू सप्लाई और अक्टूबर में नए पेराई सीजन की शुरुआत के बाद कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जरूर जताई जा रही है।

एक नजर में चीनी की कीमतों पर सरकार के कदम

मुद्दा स्थिति
20 जुलाई 2026 की औसत कीमत ₹48.18 प्रति किलो
20 अगस्त 2026 की औसत कीमत ₹55.70 प्रति किलो
आयात की अनुमति 10 लाख टन कच्ची चीनी
आयात शुल्क शून्य शुल्क वाली अनुमति
नई पेराई शुरू करने का लक्ष्य 15 अक्टूबर 2026 से
सरकार का दावा नए सीजन तक मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक

नोट: चीनी की खुदरा कीमतें शहर, राज्य, ब्रांड और स्थानीय बाजार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। सरकार और उद्योग की ओर से उपलब्धता पर्याप्त होने के दावे के बावजूद उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलेगी, यह आने वाले दिनों में बाजार की कीमतों से स्पष्ट होगा।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
विशेष संवाददाता

मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और राष्ट्रीय घटनाक्रमों पर द सिटी एक्सप्रेस की विशेष रिपोर्टिंग टीम।

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