✍️ विशेष संवाददाता•Published On 24th Aug, 2026 @ 2:25 AM
मध्य प्रदेश में अंत्योदय अन्न योजना के तहत मिलने वाली रियायती शक्कर का वितरण अप्रैल 2026 से प्रभावित है। AePDS पोर्टल के अनुसार जनवरी से मार्च तक आवंटन हुआ, लेकिन अप्रैल से अगस्त तक आवंटन शून्य दर्ज है। इसका असर मऊगंज के 17,385 अंत्योदय परिवारों पर भी पड़ा है, जिन्हें ₹20 किलो की शक्कर के बजाय बाजार से ₹65 से ₹70 किलो तक खरीदनी पड़ रही है।
रीवा / मऊगंज: मध्य प्रदेश में अंत्योदय अन्न योजना के पात्र परिवारों को मिलने वाली रियायती शक्कर का वितरण पिछले पांच महीने से प्रभावित है। उपलब्ध AePDS पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 तक शक्कर का आवंटन दर्ज हुआ, लेकिन अप्रैल से अगस्त तक आवंटन शून्य रहा। इसका असर मऊगंज जिले के 17,385 अंत्योदय परिवारों पर भी पड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक शासन स्तर से शक्कर का आवंटन नहीं मिलने के कारण उचित मूल्य दुकानों पर इसका वितरण नहीं हो पा रहा है। वहीं बाजार में शक्कर की कीमत 65 से 70 रुपए प्रति किलो तक बताई जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का खर्च बढ़ गया है।
तीन महीने आवंटन हुआ, फिर पांच महीने से शून्य
मऊगंज में वर्ष 2026 की शुरुआत में अंत्योदय परिवारों के लिए शक्कर का आवंटन हुआ था। जनवरी में 13,163 किलो, फरवरी में 15,197 किलो और मार्च में 15,910 किलो शक्कर आवंटित की गई।
इसके बाद अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्त में आवंटन शून्य दर्ज किया गया। हालांकि आधिकारिक पोर्टल पर अंत्योदय अन्न योजना के तहत शक्कर की दर अब भी 20 रुपए प्रति किलो दर्ज है।
17,385 अंत्योदय परिवारों पर असर
मऊगंज जिले में 17,385 अंत्योदय परिवार रियायती दर पर मिलने वाली शक्कर का इंतजार कर रहे हैं। शक्कर का नियमित आवंटन नहीं होने से परिवारों को बाजार से अधिक कीमत पर इसे खरीदना पड़ रहा है।
यदि किसी परिवार को हर महीने एक किलो शक्कर की जरूरत होती है, तो 20 रुपए की जगह 65 से 70 रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदने पर हर महीने करीब 45 से 50 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। पांच महीने की अवधि में यह अतिरिक्त खर्च लगभग 225 से 250 रुपए तक पहुंच सकता है।
₹20 की शक्कर बाजार में ₹65-70 किलो
रियायती शक्कर नहीं मिलने से सरकारी और बाजार भाव के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। स्थानीय बाजार में शक्कर की कीमत 65 से 70 रुपए प्रति किलो तक बताई गई है। यानी पात्र परिवारों को मिलने वाली 20 रुपए किलो की दर की तुलना में करीब 45 से 50 रुपए प्रति किलो अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
कीमतों में बढ़ोतरी का असर घरेलू बजट के साथ छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। शक्कर चाय दुकानों और खाद्य कारोबार में नियमित रूप से इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तु है।
चाय दुकानदारों की बढ़ी लागत
स्थानीय चाय दुकान संचालक राजेश्वर प्रसाद पटेल के अनुसार शक्कर महंगी होने से चाय बनाने की लागत बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि पहले 10 रुपए में चाय बेची जाती थी, लेकिन अब कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण मुनाफे पर असर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि चाय की कीमत बढ़ाने पर ग्राहकों की संख्या प्रभावित होने की आशंका रहती है, इसलिए छोटे दुकानदार बढ़ी हुई लागत का दबाव भी महसूस कर रहे हैं।
प्रदेश के लाखों अंत्योदय परिवारों का इंतजार
मामला सिर्फ मऊगंज तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 12 लाख अंत्योदय परिवार रियायती शक्कर योजना से जुड़े हैं। जनवरी से मार्च तक आवंटन होने के बाद अप्रैल से अगस्त तक आवंटन शून्य रहने की स्थिति सामने आई है।
ऐसे में सवाल यह है कि अगला आवंटन कब जारी होगा और उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से लाभार्थियों को फिर से रियायती शक्कर कब मिलना शुरू होगी। इस संबंध में शासन स्तर से आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
इथेनॉल को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
शक्कर आवंटन बंद होने के मुद्दे पर मऊगंज अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष और जनपद सदस्य शेख मुख्तार सिद्दीकी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस स्थिति को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दल पहले भी चीनी की उपलब्धता और इथेनॉल नीति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि वर्तमान में शक्कर आवंटन बंद होने का कारण इथेनॉल उत्पादन है, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
अब आगे क्या?
अंत्योदय परिवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल अगले शक्कर आवंटन को लेकर है। फिलहाल उचित मूल्य दुकानों पर आवंटन नहीं पहुंचने के कारण लाभार्थियों को बाजार से महंगी शक्कर खरीदनी पड़ रही है। शासन स्तर से नया आवंटन जारी होने के बाद ही वितरण दोबारा शुरू हो सकेगा।
नोट: आवंटन और लाभार्थियों से जुड़े आंकड़े उपलब्ध AePDS पोर्टल एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर हैं। शक्कर आवंटन की आगे की स्थिति शासन के अगले आदेश या आवंटन पर निर्भर करेगी।