रीवा: आयुष्मान अस्पताल में कलेक्टर और एसपी की देर रात हुई जांच के बाद अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रीवा की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार बाणसागर रोड स्थित आयुष्मान अस्पताल के संचालन पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार अन्य सक्षम स्वास्थ्य संस्था में भर्ती कराने और उपचार की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई 23 सितंबर की रात अस्पताल में किए गए औचक निरीक्षण के बाद सामने आई है। प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। इसके बाद अस्पताल संचालक डॉ. प्रियंका सिंह के नाम से कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया। नोटिस में निरीक्षण के दौरान आठ कमियों और अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए तीन दिन के भीतर लिखित जवाब मांगा गया है।
कलेक्टर-एसपी की रात की जांच के बाद बदली तस्वीर
23 सितंबर की रात कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह आयुष्मान अस्पताल पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी में इसे रूटीन निरीक्षण बताया गया था और कहा गया था कि जांच टीम की रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। उस समय अस्पताल में किसी गड़बड़ी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
अब 24 सितंबर को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों ने जांच की अगली स्थिति स्पष्ट कर दी है। विभागीय आदेश में कहा गया है कि शिकायत के आधार पर प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान सामने आए बिंदुओं के आधार पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और इसके बाद अस्पताल संचालन पर आगामी आदेश तक रोक लगाने का आदेश जारी हुआ।
कारण बताओ नोटिस में 8 कमियों का उल्लेख
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से जारी कारण बताओ सूचना पत्र में निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं का उल्लेख किया गया है:
- पैरा-मेडिकल स्टाफ में बदलाव की सूचना नहीं: नोटिस के अनुसार अस्पताल की ओर से पैरा-मेडिकल स्टाफ में किए गए परिवर्तन की सूचना विभाग को प्राप्त नहीं हुई।
- वर्ष 2024 के बाद मृत्यु की सूचना नहीं: नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल से वर्ष 2024 के बाद हुई किसी मृत्यु की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी गई, जबकि अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में विभाग को सूचना देना अपेक्षित है।
- BHMS डॉक्टर की ड्यूटी पर आपत्ति: निरीक्षण में डॉ. के.डी. सिंह के साथ BHMS डॉक्टर के ड्यूटी करने की बात दर्ज की गई है। नोटिस में इसे एलोपैथिक पद्धति से अलग बताते हुए आपत्तिजनक और नियम विरुद्ध बताया गया है।
- 100 बेड के अनुपात में प्रशिक्षित डॉक्टरों की कमी: अस्पताल में निर्धारित 100 बेड के अनुपात में आवश्यक संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक उपलब्ध नहीं पाए जाने और मौजूद चिकित्सकों के पास निर्धारित एलोपैथिक योग्यता नहीं होने का उल्लेख किया गया है।
- रजिस्टर में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं: संशोधित पंजियों में अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज नहीं पाए जाने की बात नोटिस में कही गई है।
- शिकायत बॉक्स नहीं मिला: अस्पताल में आवश्यक शिकायत बॉक्स नहीं पाए जाने का उल्लेख किया गया है।
- शासकीय सेवक डॉक्टर के उपचार को लेकर अनुमति का सवाल: नोटिस में डॉ. के.डी. सिंह को शासकीय सेवक चिकित्सक बताते हुए अस्पताल में उपचार करते पाए जाने और सक्षम अधिकारी से अनुमति नहीं लिए जाने का उल्लेख किया गया है।
- अनैतिक एवं असामाजिक गतिविधि का आरोप: नोटिस में डॉ. के.डी. सिंह द्वारा अनैतिक तथा असामाजिक गतिविधि किए जाने का उल्लेख किया गया है। यह विभागीय नोटिस में दर्ज आरोप/अवलोकन है, इसे अभी अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन का उल्लेख
कारण बताओ नोटिस में जांच के दौरान सामने आए उपरोक्त बिंदुओं को मध्य प्रदेश उपचर्या गृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 तथा इससे संबंधित 1997 के नियमों के संदर्भ में रखा गया है।
नोटिस में नियमों के विभिन्न प्रावधानों और अनुसूचियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि निरीक्षण में सामने आई गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं पाई गईं। विभाग ने इन्हीं आधारों पर अस्पताल संचालक से जवाब मांगा है।
अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने पर भी जवाब मांगा
कारण बताओ नोटिस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अस्पताल की अनुमति से जुड़ा है। नोटिस में अस्पताल के संचालन से संबंधित अनुज्ञप्ति क्रमांक NH/2086/JUL/2024, दिनांक 30 जुलाई 2024 का उल्लेख करते हुए पूछा गया है कि संबंधित अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए उक्त अनुज्ञप्ति को निरस्त क्यों न किया जाए।
अस्पताल संचालक को इस संबंध में अपना लिखित जवाब तीन दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है कि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं मिलने पर एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
24 सितंबर को संचालन पर आगामी आदेश तक रोक
कारण बताओ नोटिस के साथ ही विभाग ने अगले स्तर की कार्रवाई करते हुए 24 सितंबर को अलग आदेश जारी किया। इस आदेश में कहा गया है कि प्राप्त शिकायत की जांच के दौरान संस्था में चिकित्सक द्वारा अनैतिक तथा असामाजिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के कारण अस्पताल संचालन पर आगामी आदेश तक अंतरिम रोक लगाई जाती है।
इसका सीधा मतलब है कि यह केवल जांच या नोटिस तक सीमित कार्रवाई नहीं रही। विभाग ने जांच पूरी होने और आगे का आदेश जारी होने तक अस्पताल का संचालन रोक दिया है।
भर्ती मरीजों के लिए भी दिए गए निर्देश
अस्पताल संचालन पर रोक लगाने के साथ विभाग ने भर्ती मरीजों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति के अनुसार उन्हें अन्य सक्षम स्वास्थ्य संस्था में भर्ती/इलाज की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस निर्देश का उद्देश्य संचालन पर रोक के दौरान अस्पताल में उपचाराधीन मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित न होने देना है। मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार दूसरे सक्षम अस्पताल में स्थानांतरित करने की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन को करनी होगी।
डॉ. प्रियंका सिंह को जारी हुआ नोटिस
कारण बताओ सूचना पत्र डॉ. प्रियंका सिंह, संचालक, आयुष्मान अस्पताल, जिला रीवा के नाम जारी किया गया है। नोटिस में निरीक्षण के दौरान मिली कमियों का उल्लेख करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
विभागीय दस्तावेज के अनुसार यह कार्रवाई स्वास्थ्य सेवाएं, मध्य प्रदेश भोपाल के पूर्व निर्धारित निरीक्षण संबंधी प्रावधानों के तहत की गई जांच के बाद सामने आई है।
पहले रूटीन जांच बताया गया था, अब सामने आया कार्रवाई का आदेश
23 सितंबर की देर रात जब कलेक्टर और एसपी अस्पताल पहुंचे थे, तब शुरुआती जानकारी में निरीक्षण को रूटीन जांच बताया गया था। उस समय यह भी कहा गया था कि जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही किसी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
अब 24 सितंबर को जारी स्वास्थ्य विभाग के दोनों दस्तावेजों से स्पष्ट है कि निरीक्षण के बाद मामला आगे बढ़ा और विभाग ने पहले कारण बताओ नोटिस तथा फिर अस्पताल संचालन पर अंतरिम रोक का आदेश जारी किया।
क्या अस्पताल हमेशा के लिए बंद कर दिया गया है?
फिलहाल उपलब्ध आदेश की भाषा के अनुसार अस्पताल पर स्थायी रूप से बंद करने का अंतिम आदेश नहीं कहा गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से “आगामी आदेश तक” संचालन पर रोक की बात कही गई है। साथ ही कारण बताओ नोटिस में अस्पताल की अनुज्ञप्ति निरस्त करने के संभावित कदम पर जवाब मांगा गया है।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि अस्पताल का लाइसेंस अंतिम रूप से रद्द हो चुका है। फिलहाल स्थिति यह है कि संचालन पर अंतरिम रोक है और संचालक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। आगे की कार्रवाई जवाब और विभागीय प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
क्या 8 आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। कारण बताओ नोटिस में जिन आठ बिंदुओं का उल्लेख है, वे निरीक्षण के दौरान विभाग की ओर से दर्ज की गई कमियां और आरोप हैं। अस्पताल संचालक को इन पर जवाब देने का अवसर दिया गया है। इसलिए इन्हें अभी न्यायिक या अंतिम रूप से सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
खास तौर पर डॉ. के.डी. सिंह से जुड़ी बातों को भी विभागीय नोटिस में लगाए गए आरोप/आपत्ति के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंतिम कार्रवाई संबंधित जवाब और विभागीय प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में तीन स्तर पर स्थिति स्पष्ट होगी। पहला, अस्पताल संचालक द्वारा तीन दिन के भीतर दिए जाने वाले स्पष्टीकरण से। दूसरा, विभाग द्वारा उस जवाब और निरीक्षण में मिले दस्तावेजों की समीक्षा से। तीसरा, अस्पताल की अनुज्ञप्ति को लेकर अंतिम निर्णय से।
यदि विभाग को जवाब संतोषजनक नहीं मिलता है तो नोटिस में संकेतित अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं अस्पताल प्रबंधन को अपने पक्ष में संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
आयुष्मान अस्पतालों की निगरानी क्यों अहम है?
आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों में मरीजों को निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में अस्पताल की पंजीयन स्थिति, योग्य चिकित्सकों की उपलब्धता, स्टाफ, रिकॉर्ड, मरीजों की उपचार व्यवस्था और शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाओं की निगरानी महत्वपूर्ण होती है।
रीवा के इस मामले में विभागीय जांच के दौरान इन्हीं में से कई पहलुओं से जुड़े बिंदु सामने रखे गए हैं। अब आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पताल प्रबंधन इन बिंदुओं पर क्या स्पष्टीकरण देता है और विभाग उस स्पष्टीकरण को किस तरह देखता है।
फिलहाल अस्पताल संचालन पर रोक, मरीजों की शिफ्टिंग की व्यवस्था
24 सितंबर के आदेश के बाद फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि आयुष्मान अस्पताल का संचालन आगामी आदेश तक रोक दिया गया है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए अन्य सक्षम स्वास्थ्य संस्थाओं में उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश हैं। वहीं अस्पताल संचालक को कारण बताओ नोटिस का जवाब देना है।
आगे अस्पताल की अनुज्ञप्ति को लेकर क्या निर्णय होता है और विभागीय जांच में सामने आए बिंदुओं पर क्या अंतिम कार्रवाई की जाती है, यह अगले आदेश के बाद स्पष्ट होगा।