पितृ पक्ष | 9 अक्टूबर 2026एस्ट्रो

[ट्रेंडिंग खबर]9 अक्टूबर चतुर्दशी श्राद्ध: अकाल मृत्यु वालों के लिए विशेष दिन, तर्पण-पिंडदान का मुहूर्त और विधि जानें

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9 अक्टूबर 2026 चतुर्दशी श्राद्ध में तर्पण और पिंडदान की विधि
9 अक्टूबर 2026 चतुर्दशी श्राद्ध: तर्पण और पिंडदान का मुहूर्तसाभार: TCE

मुख्य बिंदुQuick Read

  • 9 अक्टूबर 2026: चतुर्दशी श्राद्ध
  • चतुर्दशी तिथि: 8 अक्टूबर रात करीब 10:15 बजे से 9 अक्टूबर रात करीब 9:35 बजे तक
  • श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल महत्वपूर्ण
  • 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष समाप्त होगा।

9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को पितृ पक्ष का चतुर्दशी श्राद्ध किया जाएगा। इसे चौदस श्राद्ध, घात चतुर्दशी या घायल चतुर्दशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन उन पितरों के श्राद्ध के लिए विशेष माना जाता है जिनकी मृत्यु दुर्घटना, शस्त्र, हिंसा या अन्य असामान्य परिस्थितियों में हुई हो।

9 अक्टूबर को किसका श्राद्ध किया जाता है?

चतुर्दशी श्राद्ध सामान्य मृत्यु के लिए निर्धारित श्राद्ध से अलग माना जाता है। पंचांग परंपरा के अनुसार दुर्घटना, शस्त्र से मृत्यु, हिंसक घटना या अकाल मृत्यु जैसी परिस्थितियों में दिवंगत हुए लोगों के लिए इस दिन श्राद्ध किया जाता है। ऐसी मृत्यु के लिए चतुर्दशी श्राद्ध को विशेष माना गया है।

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सामान्य परिस्थितियों में हुई थी, तो केवल इस वजह से चतुर्दशी के दिन उनका श्राद्ध करने के बजाय उनकी मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध करना चाहिए। परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह को प्राथमिकता देना उचित है।

चतुर्दशी तिथि कब से कब तक?

पंचांग गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10:15 बजे शुरू होकर 9 अक्टूबर की रात करीब 9:35 बजे तक रहेगी। शहर और पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।

9 अक्टूबर श्राद्ध का मुहूर्त

श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त के साथ अपराह्न काल को महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग शहरों में समय अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए उपलब्ध पंचांग गणना में कुतुप मुहूर्त करीब सुबह 11:30 से दोपहर 12:17 बजे तक, रौहिण मुहूर्त करीब 12:17 से 1:04 बजे तक और अपराह्न काल करीब 1:04 से 3:24 बजे तक बताया गया है। अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतिम समय जरूर देखें।

चतुर्दशी श्राद्ध की विधि

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पितरों का स्मरण करें। श्राद्ध कर्म के लिए सात्विक भोजन तैयार किया जाता है। इसके बाद संकल्प लेकर पितरों के नाम और गोत्र का स्मरण करते हुए तर्पण किया जाता है।

परंपरा के अनुसार जल में काले तिल मिलाकर पितरों को तर्पण दिया जाता है। इसके बाद पिंडदान, श्राद्ध भोजन और दान जैसे कर्म परिवार की परंपरा के अनुसार किए जाते हैं। कई परिवारों में गाय, कौआ और जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने की परंपरा भी है।

तर्पण के समय कौन सा मंत्र बोलें?

तर्पण करते समय पितरों का नाम और गोत्र लेकर श्रद्धा से जल अर्पित किया जा सकता है। सामान्य रूप से यह मंत्र बोला जाता है:

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

परिवार में यदि किसी विशेष पितृ तर्पण या श्राद्ध मंत्र की परंपरा है तो उसी के अनुसार कर्म करना बेहतर माना जाता है।

चतुर्दशी श्राद्ध में क्या करें?

  • पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  • स्थानीय परंपरा के अनुसार तर्पण और पिंडदान करें।
  • काले तिल और जल से तर्पण करें।
  • सात्विक भोजन तैयार करें।
  • ब्राह्मण, जरूरतमंद या पात्र व्यक्ति को भोजन और दान दें।
  • परिवार की परंपरा के अनुसार कौआ और अन्य जीवों को भोजन दें।

श्राद्ध के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

  • नशे और मांसाहार से बचने की परंपरा का पालन करें।
  • अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचें।
  • श्राद्ध कर्म में दिखावा न करें।
  • तर्पण और पिंडदान जल्दबाजी में न करें।
  • परिवार की परंपरा से अलग विधि अपनाने से पहले पुरोहित से सलाह लें।

10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या

चतुर्दशी श्राद्ध के अगले दिन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या होगी। इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा। जिन पितरों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।

इस तरह 9 अक्टूबर का चतुर्दशी श्राद्ध पितृ पक्ष के अंतिम प्रमुख श्राद्ध दिनों में शामिल है, जबकि 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
विशेष संवाददाता • The City Express

The City Express की संपादकीय टीम के अधिकृत सदस्य। समसामयिक मुद्दों, जनसमस्याओं और विंध्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास पर तथ्यपरक और खोजी रिपोर्टिंग।

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