धर्म डेस्क | 30 सितंबर 2026एस्ट्रो

[ट्रेंडिंग खबर]चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध आज, 30 सितंबर: जानें श्राद्ध विधि, पूजन, मंत्र और मुहूर्त

•5 मिनट पढ़ने का समय
चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर 2026 तर्पण और पिंडदान
30 सितंबर 2026 को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध के अवसर पर पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म का प्रतीकात्मक दृश्य।साभार: The City Express

मुख्य बिंदुQuick Read

  • चतुर्थी श्राद्ध: 30 सितंबर 2026
  • पंचमी श्राद्ध: 30 सितंबर 2026
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: दोपहर 2:55 बजे के आसपास
  • पंचमी तिथि शुरू: दोपहर 2:55 बजे के आसपास
  • श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को प्रमुख माना जाता है।

पितृ पक्ष में इस बार चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध एक ही दिन, 30 सितंबर 2026 बुधवार को किए जाएंगे। चतुर्थी तिथि 29 सितंबर की शाम 5:09 बजे शुरू होकर 30 सितंबर को दोपहर 2:55 बजे समाप्त होगी। इसके तुरंत बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी।

श्राद्ध कर्म में तिथि के साथ अपराह्न काल का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से इस साल पंचमी का श्राद्ध भी 30 सितंबर को ही किया जाएगा।

चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध 30 सितंबर को ही क्यों?

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 सितंबर की शाम से शुरू हुई और 30 सितंबर को दोपहर करीब 2:55 बजे तक रही। इसके बाद पंचमी शुरू हो गई। पंचमी अगले दिन 1 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी, लेकिन 1 अक्टूबर को श्राद्ध के लिए आवश्यक अपराह्न काल में पंचमी तिथि मौजूद नहीं रहेगी। इसलिए दोनों तिथियों का श्राद्ध 30 सितंबर को किया जाएगा।

चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध का शुभ मुहूर्त

अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर के कारण मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। उपलब्ध पंचांग गणनाओं के अनुसार 30 सितंबर को कुतुप मुहूर्त लगभग सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे, रौहिण मुहूर्त लगभग 12:35 बजे से 1:22 बजे और अपराह्न काल लगभग 1:22 बजे से 3:45 बजे तक बताया गया है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

तिथि का समय

  • चतुर्थी प्रारंभ: 29 सितंबर, शाम 5:09 बजे
  • चतुर्थी समाप्त: 30 सितंबर, दोपहर 2:55 बजे
  • पंचमी प्रारंभ: 30 सितंबर, दोपहर 2:55 बजे
  • पंचमी समाप्त: 1 अक्टूबर, दोपहर 12:35 बजे

चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध की विधि

श्राद्ध कर्म अपनी पारिवारिक परंपरा और कुलाचार के अनुसार करना चाहिए। सामान्य रूप से सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा और श्राद्ध के स्थान को साफ करने के बाद पितरों का स्मरण करते हुए संकल्प लें।

इसके बाद पितरों के निमित्त जल से तर्पण करें और परंपरा के अनुसार पिंडदान करें। पितरों को सात्विक भोजन अर्पित करने के बाद ब्राह्मण भोजन या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न-वस्त्र आदि का दान किया जा सकता है। अंत में पितरों का स्मरण करके प्रार्थना करें।

श्राद्ध में कौन-सी सामग्री रखें?

  • काले तिल
  • जौ
  • कुश
  • जल
  • चावल
  • आटा
  • घी
  • दूध
  • शहद
  • मौसमी फल
  • पुष्प
  • सात्विक भोजन

सामग्री और पिंडदान की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए कुलाचार और स्थानीय आचार्य की परंपरा को प्राथमिकता दें।

पितरों के लिए कौन-सा मंत्र पढ़ें?

तर्पण के दौरान पितरों का स्मरण करते हुए सरल रूप से यह मंत्र बोला जा सकता है:

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

पितरों को जल अर्पित करते समय श्रद्धापूर्वक उनका नाम और गोत्र लेकर संकल्प किया जाता है। परिवार में कोई निर्धारित श्राद्ध मंत्र या विधि चली आ रही है तो उसी को प्राथमिकता दें।

श्राद्ध के दिन क्या करें?

  • पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  • सात्विक भोजन तैयार करें।
  • तर्पण और पिंडदान विधि के अनुसार करें।
  • जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अन्न का दान करें।
  • परिवार की परंपरा हो तो ब्राह्मण भोजन कराएं।
  • दिन को शांत और संयमित तरीके से बिताएं।
  • अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करें।

श्राद्ध के दिन क्या न करें?

  • मांसाहार और नशीले पदार्थों से बचें।
  • अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचें।
  • दिखावे के लिए श्राद्ध कर्म न करें।
  • धार्मिक विधि को जल्दबाजी में पूरा करने से बचें।
  • परिवार की परंपरा में जिन चीजों को वर्जित माना गया है, उनका सेवन या उपयोग न करें।

अगर पूर्वज की मृत्यु तिथि पता न हो तो?

यदि किसी पितर की मृत्यु की निश्चित तिथि ज्ञात नहीं है, तो पितृ पक्ष में सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी।

चतुर्थी-पंचमी श्राद्ध का महत्व

पितृ पक्ष में जिस तिथि को पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है। इसलिए जिन परिवारों में पूर्वज की मृत्यु चतुर्थी या पंचमी तिथि को हुई थी, उनके लिए 30 सितंबर का दिन श्राद्ध कर्म के लिए महत्वपूर्ण है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध का उद्देश्य पितरों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता व्यक्त करना है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में श्राद्ध की विधि, सामग्री और मंत्रों में अंतर हो सकता है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़डेस्क
संपादकीय न्यूज़डेस्क • The City Express

द सिटी एक्सप्रेस की केंद्रीय संपादकीय टीम द्वारा सत्यापित, निष्पक्ष और तथ्य-जांच आधारित ताज़ा समाचार व लाइव अपडेट्स।

पाठकों की प्रतिक्रियाएं

खुला मंच
इस खबर पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सबसे पहले अपनी राय साझा करें!

एस्ट्रो की अन्य खबरें

15 खबरें प्रदर्शित

मध्य प्रदेश की मुख्य खबरें

और देखें >

📍मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से समाचार (District Dispatches)

आस-पास के जिले

सतना की बड़ी खबरें

सतना का पूरा पेज >

सीधी की बड़ी खबरें

सीधी का पूरा पेज >

भोपाल की बड़ी खबरें

भोपाल का पूरा पेज >

इंदौर की बड़ी खबरें

इंदौर का पूरा पेज >