नई दिल्ली। जीएसटी चोरी और टैक्स से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी के नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है। जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली बैठक में अधिकारियों के गिरफ्तारी अधिकार को खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्ताव का उद्देश्य जीएसटी कानून में गिरफ्तारी और आपराधिक कार्रवाई को गंभीर मामलों तक सीमित करना है। अगर प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो इसके लिए संबंधित कानून में बदलाव करना होगा।
अभी क्या है नियम?
मौजूदा केंद्रीय जीएसटी कानून में गंभीर अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। CGST Act की धारा 69 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में कमिश्नर गिरफ्तारी की अनुमति दे सकते हैं। इसमें फर्जी इनवॉइस, बिना वास्तविक सप्लाई के इनवॉइस जारी करना और फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर नहीं की जा सकती। कानून में संबंधित अधिकारी के पास गिरफ्तारी को लेकर निर्धारित आधार और सामग्री होना जरूरी है।
72,393 मामलों में 887 गिरफ्तारियां
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों के स्तर पर 72,393 GST अपराध के मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में 887 गिरफ्तारियां हुईं। इसमें राज्य जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं।
जीएसटी चोरी के मामलों में फर्जी बिलिंग और गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं। सरकार की ओर से ऐसे मामलों में जांच और कार्रवाई जारी है।
क्या गिरफ्तारी पूरी तरह खत्म हो जाएगी?
प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि हर तरह की जीएसटी धोखाधड़ी पर कार्रवाई बंद हो जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार गंभीर और जानबूझकर किए गए टैक्स फ्रॉड के मामलों में आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का प्रस्ताव है। बदलाव मुख्य रूप से जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति और छोटे या कम गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई के दायरे से जुड़ा है।
7 अक्टूबर को हो सकती है बड़ी चर्चा
GST काउंसिल की 57वीं बैठक में गिरफ्तारी के अलावा इनपुट टैक्स क्रेडिट, रिफंड, छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन व्यवस्था और जीएसटी प्रशासन को आसान बनाने से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
अलग-अलग रिपोर्टों में गंभीर GST अपराधों में आपराधिक कार्रवाई के लिए अधिक ऊंची सीमा तय करने का प्रस्ताव भी बताया गया है। हालांकि, इन प्रस्तावों का अंतिम स्वरूप GST काउंसिल की चर्चा और उसके बाद होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
कानून बदलने के बाद ही लागू होगा फैसला
अगर GST काउंसिल गिरफ्तारी संबंधी बदलाव को मंजूरी देती है, तो केवल बैठक में फैसला होने से मौजूदा कानून तुरंत नहीं बदल जाएगा। संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में विधायी बदलाव लाए जाने की संभावना है।
इसलिए फिलहाल कारोबारियों और करदाताओं के लिए मौजूदा GST कानून और लागू प्रक्रियाएं ही प्रभावी हैं। नए प्रस्ताव को अंतिम नियम समझना सही नहीं होगा।
