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US Green Card Rule: TCS, Infosys, Wipro समेत 8 IT कंपनियों पर ट्रंप ने लगाईं रोक, हजारों विदेशी कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित

•5 मिनट पढ़ने का समय
TCS Infosys Wipro HCL समेत 8 IT कंपनियों पर US PERM Green Card Program की रोक
अमेरिका ने TCS, Infosys, Wipro और HCL समेत 8 IT कंपनियों को PERM ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया।साभार: TCE

मुख्य बिंदुQuick Read

  • 8 कंपनियां प्रभावित: TCS, Infosys, Wipro, HCL, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe।
  • PERM आवेदन पर रोक: नए आवेदन स्वीकार और लंबित आवेदन प्रोसेस नहीं किए जाएंगे।
  • H-1B वीजा सीधे रद्द नहीं: मौजूदा H-1B कर्मचारियों पर यह रोक सीधे लागू नहीं होती।
  • अमेरिकी प्रशासन ने कार्रवाई को विदेशी श्रमिक कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी नौकरियों पर असर की जांच से जोड़ा है।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी श्रम विभाग ने 8 अक्टूबर 2026 को आठ बड़ी टेक और IT कंपनियों को Permanent Labor Certification Program यानी PERM से निलंबित कर दिया। इस सूची में भारत की प्रमुख IT कंपनियां TCS, Infosys, Wipro और HCL Technologies के साथ Cognizant और Capgemini शामिल हैं। Microsoft और Adobe पर भी कार्रवाई की गई है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदन भी फिलहाल प्रोसेस नहीं किए जाएंगे। इस कार्रवाई से उन विदेशी कर्मचारियों की स्थायी निवास की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिनके लिए उनकी कंपनियां रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड को स्पॉन्सर कर रही हैं।

किन 8 कंपनियों पर हुई कार्रवाई?

अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार PERM प्रोग्राम से निलंबित कंपनियों में Tata Consultancy Services (TCS), Infosys, Wipro, HCL Technologies, Cognizant, Capgemini, Microsoft और Adobe शामिल हैं। इनमें TCS, Infosys, Wipro और HCL भारतीय IT सेक्टर की प्रमुख कंपनियां हैं।

PERM प्रोग्राम क्या है?

PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिका में रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी Green Card की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। सामान्य तौर पर नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि किसी खास पद के लिए योग्य, इच्छुक और उपलब्ध अमेरिकी कर्मचारी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, काम की परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

PERM स्वीकृत होने के बाद रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की आगे की इमिग्रेशन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसलिए इस स्तर पर रोक लगने से प्रभावित कंपनियों के विदेशी कर्मचारियों के स्थायी निवास की प्रक्रिया में देरी या रुकावट आ सकती है।

क्या H-1B वीजा भी रद्द हो जाएगा?

नहीं। मौजूदा जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई सीधे तौर पर कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा को रद्द नहीं करती। H-1B एक अस्थायी वर्क वीजा है, जबकि PERM ग्रीन कार्ड के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा है।

हालांकि, जिन H-1B कर्मचारियों की कंपनियां उनके लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही थीं, उनके लिए PERM पर रोक लंबे समय की इमिग्रेशन योजना को प्रभावित कर सकती है। Reuters के मुताबिक, इस कदम से हजारों विदेशी टेक कर्मचारियों के अमेरिका में स्थायी निवास के रास्ते पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी प्रशासन ने क्यों लिया फैसला?

अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई को विदेशी श्रमिक वीजा कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा से जोड़ा है। उप राष्ट्रपति JD Vance और श्रम सचिव Keith Sonderling ने 8 अक्टूबर को कार्रवाई की घोषणा की। प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियों द्वारा विदेशी श्रमिक कार्यक्रमों के इस्तेमाल से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार और वेतन पर असर पड़ सकता है।

Microsoft और Adobe के मामले में संघीय जांच का भी उल्लेख किया गया है। प्रशासन ने विदेशी श्रमिक कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच तेज करने की बात कही है। कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी; TCS ने टिप्पणी करने से इनकार किया।

भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन भारतीय और अन्य विदेशी IT professionals पर पड़ सकता है, जिनका रोजगार आधारित Green Card आवेदन इन कंपनियों के माध्यम से PERM चरण में है या जिसकी प्रक्रिया शुरू होनी थी। नए आवेदन स्वीकार नहीं होने और लंबित मामलों की प्रक्रिया रुकने से स्थायी निवास पाने की टाइमलाइन प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कितने भारतीय कर्मचारियों की प्रक्रिया कितने समय तक प्रभावित होगी। अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई की कोई निश्चित अवधि सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए प्रभावित कर्मचारियों के व्यक्तिगत मामलों में वास्तविक असर उनके PERM आवेदन की स्थिति और आगे की इमिग्रेशन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

अमेरिका में विदेशी वर्कर प्रोग्राम पर बढ़ी सख्ती

यह कार्रवाई ट्रंप प्रशासन की विदेशी श्रमिक कार्यक्रमों पर बढ़ती निगरानी के बीच हुई है। अमेरिकी अधिकारियों ने टेक कंपनियों के अलावा कुछ प्रमुख विश्वविद्यालयों से जुड़े J-1 Exchange Visitor Visa कार्यक्रमों की भी जांच की घोषणा की है। प्रशासन का कहना है कि इन कार्यक्रमों में संभावित दुरुपयोग और अमेरिकी श्रमिकों के हितों पर असर की जांच की जा रही है।

फिलहाल 8 अक्टूबर की कार्रवाई का सीधा असर PERM प्रक्रिया पर है। मौजूदा H-1B वीजा को रद्द करने का आदेश इस फैसले में नहीं है, लेकिन प्रभावित कंपनियों के विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में स्थायी निवास की राह अधिक अनिश्चित हो गई है।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
संपादकीय मंडल (Board)
आर्यन पुनीत द्विवेदी
संस्थापक एवं प्रधान संपादक • The City Express

द सिटी एक्सप्रेस (रीवा रियासत प्राइवेट लिमिटेड) के संस्थापक एवं प्रधान संपादक। डिजिटल मीडिया रणनीति, खोजी पत्रकारिता और संपादकीय दूरदर्शिता के साथ संस्थान के संपादकीय सिद्धांतों और विश्वसनीयता के प्रमुख संरक्षक।

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