✍️ विशेष संवाददाता•Published On 31st Aug, 2026 @ 3:02 PM
मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में लगातार भारी बारिश के बाद हालात बेहद खराब हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर अधिकतम बाढ़ स्तर से करीब 6 मीटर ऊपर पहुंच चुका है। निचले इलाकों में पानी घुसने के साथ सड़कें कीचड़ और मलबे से पट गई हैं। मानिकपुर क्षेत्र में बांध के ओवरफ्लो होने के बाद सतना-मानिकपुर रेलखंड तक प्रभावित हुआ। प्रशासन अब तक 700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अगले 2-3 दिनों को बेहद अहम बताया है।
सतना/चित्रकूट: मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में लगातार हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। नदियों और नालों के उफान पर आने के बाद कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। सड़कों पर पानी उतरने के बाद अब कीचड़, मलबे और बहकर आई मिट्टी की मोटी परत लोगों के लिए नई परेशानी बन गई है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रशासन को 700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अधिकतम बाढ़ स्तर से करीब 6 मीटर ऊपर पहुंच गया था। रामघाट, निर्मोही अखाड़ा और दूसरे निचले इलाकों में पानी भर गया। सतना जिले के बिरसिंहपुर, नागौद और आसपास के कई क्षेत्रों में भी जलभराव ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया है।
चित्रकूट से सतना तक सड़कें कीचड़ और मलबे से पटीं
बाढ़ का पानी कुछ इलाकों में उतरने के बाद अब सड़कों पर जमा कीचड़ लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। चित्रकूट से सतना और मानिकपुर की तरफ जाने वाले कई मार्गों पर पानी, मिट्टी और मलबे की वजह से आवागमन प्रभावित है। तस्वीरों और ग्राउंड रिपोर्ट में सड़कें ऐसी नजर आ रही हैं जैसे भारी बाढ़ अपने साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी बहाकर ले आई हो।
इसी वजह से स्थानीय स्तर पर सड़कों की तुलना नेपाल में बाढ़ के बाद दिखाई देने वाले कीचड़ भरे इलाकों से की जा रही है। हालांकि, इसे किसी आधिकारिक माप या तुलना के तौर पर नहीं, बल्कि मौके की स्थिति का वर्णन समझना चाहिए।
मंदाकिनी ने बदली चित्रकूट की तस्वीर
धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने सबसे ज्यादा असर डाला है। नदी का जलस्तर अधिकतम बाढ़ स्तर से करीब छह मीटर ऊपर पहुंचने के बाद रामघाट और आसपास के निचले इलाके जलमग्न हो गए। प्रशासन ने लोगों और श्रद्धालुओं से नदी तथा घाटों से दूर रहने की अपील की।
बाढ़ के कारण घरों और दुकानों में पानी घुसा। कई जगहों पर पानी उतरने के बाद कीचड़ और मलबा जमा है। प्रशासन और राहत दल प्रभावित इलाकों में सफाई, राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के काम में जुटे हैं।
700 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू
सतना जिला प्रशासन के अनुसार बाढ़ जैसे हालात के बीच 700 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव अभियान में SDRF के साथ NDRF तथा सेना की सहायता भी ली गई। कुछ स्थानों पर रास्ते बाधित होने के कारण हवाई मदद का इस्तेमाल किया गया। सेना के हेलीकॉप्टर से भी लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
बिरसिंहपुर में पानी से घिरे एक व्यक्ति को SDRF की टीम ने सुरक्षित बाहर निकाला। प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और निचले इलाकों के लोगों को राहत शिविरों में जाने की सलाह दी जा रही है।
10 राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्था
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए हैं। उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी के अनुसार चित्रकूट में चार और पूरे सतना जिले में कुल 10 राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों ने इन शिविरों में शरण ली है। यहां भोजन, पेयजल, दवाइयां और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मानिकपुर-सतना मार्ग पर कई जगह संपर्क टूटा
चित्रकूट के मानिकपुर क्षेत्र में बाढ़ ने सड़क संपर्क को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। कई पुल, रपटे और पुलिया तेज बहाव में क्षतिग्रस्त या बह गए। इसके चलते मानिकपुर से सतना आने-जाने वाले कई रास्तों पर यातायात रुक गया। रिपोर्टों के अनुसार करीब 50 गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ और बड़ी आबादी को आवागमन की परेशानी का सामना करना पड़ा।
कुछ संपर्क मार्गों पर सड़क का हिस्सा भी बह गया है। कई जगह दोपहिया वाहनों तक का निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाना भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
डोडा बांध के ओवरफ्लो होने से बढ़ी मुश्किल
मानिकपुर के पास डोडा बांध के ओवरफ्लो होने के बाद स्थिति और बिगड़ी। इसके चलते आसपास के इलाकों में पानी तेजी से फैला। इसका असर सड़क और रेल यातायात पर भी पड़ा। सतना-मानिकपुर रेलखंड पर चितहरा स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक जलमग्न होने की सूचना सामने आई।
रेलवे ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ट्रैक की जांच कराई। रिपोर्ट के अनुसार पानी ट्रैक के ऊपर तक पहुंच गया था और इस वजह से कई यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में देरी हुई। करीब 28 यात्री ट्रेन और 20 मालगाड़ियों के प्रभावित होने की जानकारी रेलवे की ओर से दी गई थी।
सड़क पर पानी, रेलवे ट्रैक पर भी बाढ़ का असर
सतना-मानिकपुर क्षेत्र की स्थिति सिर्फ सड़क यातायात तक सीमित नहीं रही। रेलवे ट्रैक पर पानी आने के बाद कर्मचारियों ने सुरक्षा जांच की। कुछ स्थानों पर रेलकर्मी पानी के बीच ट्रैक की स्थिति देखते हुए आगे बढ़े। रेलवे ने स्पष्ट किया कि ट्रेनों को सुरक्षा जांच के बाद ही आगे बढ़ाया गया।
बाढ़ का असर एक नजर में
- मंदाकिनी का जलस्तर अधिकतम बाढ़ स्तर से करीब 6 मीटर ऊपर पहुंचा।
- 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
- चित्रकूट में 4 और सतना जिले में कुल 10 राहत शिविर संचालित।
- मानिकपुर-सतना मार्ग के कई पुल और रपटे प्रभावित।
- चितहरा के पास रेलवे ट्रैक पर पानी पहुंचा।
- रामघाट और अन्य निचले इलाकों में पानी भरा।
- बाढ़ के बाद सड़कों पर कीचड़ और मलबे की मोटी परत जमा।
रामघाट और आसपास के इलाकों में तबाही
चित्रकूट के रामघाट क्षेत्र में बाढ़ का असर बेहद गंभीर रहा। मंदाकिनी के तेज बहाव ने घाट और आसपास के ढांचों को नुकसान पहुंचाया। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक ऐतिहासिक तुलसी घाट को भी भारी नुकसान हुआ और कई दुकानें जलमग्न हुईं। कुछ घरों में पानी दूसरी मंजिल तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
पानी उतरने के बाद अब इन इलाकों में बाढ़ से हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ रही है। प्रशासन ने क्षति का सर्वे शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पैदल पहुंचकर देखा हाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया और बाद में कीचड़ तथा जलभराव के बीच पैदल चलकर प्रभावित परिवारों के घरों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और अधिकारियों को भोजन, पेयजल, चिकित्सा तथा दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिया।
अगले 2-3 दिन क्यों अहम हैं?
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों को चित्रकूट में रहकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अगले दो से तीन दिन इसलिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि बारिश और जलस्तर की स्थिति में बदलाव के साथ निचले इलाकों में दोबारा जलभराव का खतरा बना हुआ है। :contentReference[oaicite:12]{index=12}
अधिकारियों को पूरे सतना जिले में घर-घर जाकर नुकसान का सर्वे करने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही यह जांचने की बात कही गई है कि कहीं अतिक्रमण या निर्माण गतिविधियों ने बाढ़ की गंभीरता बढ़ाने में भूमिका तो नहीं निभाई।
प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती अब क्या है?
पानी का स्तर कम होने के बाद राहत अभियान का अगला चरण शुरू हो गया है। सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक भोजन, पीने का पानी और चिकित्सा सहायता पहुंचाने के साथ-साथ सड़क संपर्क बहाल करना है। जहां पुल और रपटे बह गए हैं, वहां वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था भी जरूरी है।
दूसरी बड़ी चुनौती बाढ़ के बाद जमा कीचड़ और मलबे को हटाने की है। सड़कें साफ होने के बाद ही कई गांवों और बाजारों तक सामान्य आवागमन पूरी तरह बहाल हो सकेगा।
क्या स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है?
अभी नहीं। कुछ इलाकों में पानी कम होने से राहत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन प्रशासन ने अगले दो-तीन दिनों को महत्वपूर्ण माना है। कई मार्ग अभी बाधित हैं और बाढ़ प्रभावित परिवारों के नुकसान का सर्वे जारी है। इसलिए लोगों से नदी, घाट और निचले इलाकों से दूर रहने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
अब आगे क्या होगा?
प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का विस्तृत आकलन करेगा। जिन परिवारों के घर, दुकान, फसल या अन्य संपत्ति को नुकसान हुआ है, उनका सर्वे कर नियमानुसार राहत और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने भी अधिकारियों को नुकसान का आकलन कर प्रभावितों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, फंसे लोगों का रेस्क्यू, राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं और बाधित सड़क एवं रेल संपर्क को बहाल करना है।