✍️ The City Express Desk•Published On 23rd Aug, 2026 @ 11:48 AM
कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ जमीन सौदे से जुड़े मामले में कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है, जबकि अवैध वसूली और काम में कथित लापरवाही से जुड़े आरोपों पर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया चर्चा में है।
कटनी। कटनी की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। जमीन के एक विवादित सौदे को लेकर दर्ज FIR और निलंबन के बाद अब इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। इसके साथ ही नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पहले सामने आए अवैध वसूली और जांच में कथित लापरवाही जैसे आरोपों को लेकर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया पर नजर है।
मामले में सबसे अहम बात यह है कि अब जांच केवल जमीन के सौदे तक सीमित नहीं रह गई है। अलग-अलग शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस और विभागीय स्तर पर विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। हालांकि किसी भी आरोप को जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता।
निलंबन के बाद SIT जांच, मामला अब बड़े स्तर पर पहुंचा
कटनी में पदस्थ रहीं CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ जमीन खरीद से जुड़े आरोपों के बाद FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर उनके निलंबन की कार्रवाई की गई।
22 अगस्त को इस मामले में एक विशेष जांच दल यानी SIT गठित किए जाने की जानकारी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार SIT मामले की जांच में सहयोग करेगी और जमीन सौदे से जुड़े आरोपों, कथित दबाव और अन्य संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
क्या है जमीन सौदे का मामला?
मामला कटनी जिले की एक जमीन से जुड़ा है। जांच में यह आरोप सामने आया कि हत्या के एक आरोपी और उसके परिवार से जुड़ी जमीन का सौदा कथित दबाव की परिस्थितियों में कम कीमत पर कराया गया।
जांच से जुड़े विवरणों में जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपये से अधिक बताई गई, जबकि रजिस्ट्री लगभग 18 लाख रुपये में होने का आरोप है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जमीन का सौदा किन परिस्थितियों में हुआ और इसमें किसी पद या प्रभाव का कथित रूप से इस्तेमाल हुआ या नहीं।
FIR में किन आरोपों की जांच हो रही है?
कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में नेहा पच्चीसिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस की जांच में धोखाधड़ी, दबाव बनाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
जांच अधिकारियों के सामने जमीन की रजिस्ट्री, रकम के लेनदेन, संबंधित बैंक खातों और कथित दबाव से जुड़े दस्तावेज एवं परिस्थितियां महत्वपूर्ण होंगी। इन तथ्यों की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
एक नजर में पूरा मामला
- जमीन सौदे से जुड़े आरोपों के बाद FIR दर्ज हुई।
- मुख्यमंत्री के निर्देश पर CSP नेहा पच्चीसिया को निलंबित किया गया।
- मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है।
- जांच में जमीन सौदे और कथित दबाव के आरोपों की पड़ताल होगी।
- अवैध वसूली और जांच में कथित लापरवाही से जुड़े मामले भी पहले सामने आ चुके हैं।
- अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद तय होगी।
हत्या के मामले की जांच में लापरवाही का आरोप भी
नेहा पच्चीसिया से जुड़े मामले में जमीन विवाद के अलावा हत्या के एक प्रकरण की जांच में कथित लापरवाही का मुद्दा भी सामने आया है। आरोप है कि मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र पेश करने को लेकर गंभीर सवाल उठे।
उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी जांच के दौरान महत्वपूर्ण बिंदु बना। इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जांच प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
अवैध वसूली के आरोप भी पहले आ चुके हैं सामने
जमीन सौदे का मामला सामने आने से पहले भी नेहा पच्चीसिया पर अवैध वसूली से जुड़े आरोप लगे थे। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की शिकायत के बाद विभागीय स्तर पर जांच शुरू की गई थी। शिकायत में वाहन से संबंधित कार्रवाई के दौरान कथित रूप से पैसे मांगे जाने के आरोप लगाए गए थे।
इन शिकायतों के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करते हुए नेहा पच्चीसिया के अधीन आने वाले कुछ थानों का प्रभार बदला गया था। मामले से जुड़े कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। इन आरोपों की सच्चाई और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
विभागीय कार्रवाई में किन बिंदुओं पर रहेगी नजर?
निलंबन और आपराधिक जांच के साथ विभागीय स्तर पर भी अधिकारियों की भूमिका, कर्तव्य निर्वहन और जांच प्रक्रियाओं से जुड़े पहलुओं की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है। इसमें पहले की शिकायतों, जांच में कथित लापरवाही और पद के दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को भी देखा जा सकता है।
विभागीय जांच और आपराधिक जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं। इसलिए किसी अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों के सिद्ध हो जाने का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसियों को दस्तावेजों, गवाहों, वित्तीय लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना होगा।
पुरानी खबर से कैसे जुड़ा है नया घटनाक्रम?
नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पहले जमीन सौदे से जुड़े आरोपों में FIR दर्ज होने की खबर सामने आई थी। अब इस मामले में निलंबन के बाद SIT जांच का गठन एक नया और महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को अलग खबर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें मामले की जांच का दायरा और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों आगे बढ़े हैं।
आगे क्या होगा?
SIT और संबंधित जांच एजेंसियां अब जमीन सौदे से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच करेंगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल यह मामला FIR, निलंबन और SIT जांच के चरण में है। जांच पूरी होने तक आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। मामले में आगे होने वाली किसी भी कार्रवाई, गिरफ्तारी, चार्जशीट या विभागीय निर्णय को अलग से आधिकारिक अपडेट के आधार पर देखा जाएगा।
नोट: इस खबर में उल्लिखित आरोप जांच और FIR से जुड़े हैं। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।