मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है और 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को तीन महीने के भीतर नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले में 5 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई पूरी हुई थी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस विनय सराफ की विशेष युगलपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है।
2019 में 14% से बढ़ाकर 27% किया गया था OBC आरक्षण
मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 में तत्कालीन सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की सीमा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई। याचिकाओं में आरक्षण की संवैधानिक वैधता और कुल आरक्षण की सीमा सहित कई मुद्दे उठाए गए। इसके बाद बढ़े हुए आरक्षण को लेकर मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में बना रहा। फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर निर्णय के लिए मामला वापस मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भेजा था।
13% पद क्यों रखे गए हैं होल्ड पर?
27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण सरकारी भर्तियों में 87:13 की व्यवस्था अपनाई गई। इसके तहत कई भर्तियों में 87 प्रतिशत पदों के परिणाम घोषित किए गए, जबकि शेष 13 प्रतिशत पदों को मामले के अंतिम निर्णय तक होल्ड पर रखा गया। इन पदों पर नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों का भविष्य आरक्षण विवाद के अंतिम निपटारे से जुड़ा है।
5 अगस्त को पूरी हुई थी अंतिम सुनवाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की विशेष युगलपीठ के सामने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई 5 अगस्त 2026 को पूरी हुई थी। सुनवाई के दौरान आरक्षण की संवैधानिक वैधता, 50 प्रतिशत की सीमा, पिछड़ेपन से संबंधित आंकड़ों और सरकारी नियुक्तियों में लंबित पदों जैसे विषयों पर पक्षकारों ने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। खबर अपडेट की जा रही है।