मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच विवाद बढ़ गया है। योजना में निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका निभाने और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को लेकर पटवारियों की आपत्ति के बीच प्रदेश में 102 पटवारियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। इनमें 27 पटवारियों को बर्खास्त और 75 को निलंबित किया गया है। कार्रवाई के विरोध में कई जिलों में पटवारियों ने राजस्व संबंधी कामकाज बंद कर दिया है।
सबसे बड़ी जिला-स्तरीय कार्रवाई रीवा में सामने आई, जहां 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी है। दूसरी ओर, कई जिलों में पटवारियों को नोटिस और आरोप-पत्र भी दिए गए हैं। इस विवाद के बीच पटवारी संघ के प्रतिनिधियों की अधिकारियों के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका।
रीवा में 15 पटवारी एक साथ सस्पेंड
रीवा में स्वामित्व योजना के काम में लापरवाही के आरोप में 15 पटवारियों को निलंबित किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देश पर संबंधित एसडीएम ने निलंबन के आदेश जारी किए। प्रशासन का कहना है कि पटवारियों को योजना के तहत सर्वे, सत्यापन और अभिलेख तैयार करने से जुड़े काम सौंपे गए थे।
प्रशासन के अनुसार, निर्धारित समय में काम पूरा नहीं करने और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण कार्रवाई की गई। संबंधित पटवारियों को पहले काम पूरा करने के निर्देश दिए गए थे और नोटिस भी जारी किए गए थे। प्रशासन का दावा है कि इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
ग्वालियर, जबलपुर और सागर में भी कार्रवाई
स्वामित्व योजना को लेकर जारी विवाद के बीच प्रदेश के अन्य जिलों में भी पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। इन कार्रवाइयों के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारी संघ के सदस्यों ने राजस्व कामकाज बंद रखकर विरोध जताया।
देवास में पटवारी बुधवार देर रात तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते रहे। पटवारियों का कहना है कि स्वामित्व योजना में निष्पादक की भूमिका को लेकर उनकी आपत्तियों पर विचार किया जाना चाहिए। संघ कार्रवाई वापस लेने और उनकी भूमिका स्पष्ट करने की मांग कर रहा है।
कई जिलों में नोटिस, छिंदवाड़ा में 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को अंतिम नोटिस
कार्रवाई केवल निलंबन और बर्खास्तगी तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। रतलाम में 12 पटवारियों को शासकीय कार्यों में लापरवाही के आरोप में आरोप-पत्र दिए गए हैं।
छिंदवाड़ा में स्वामित्व योजना का काम नहीं करने के मामले में 32 परिवीक्षाधीन पटवारियों को बर्खास्तगी का अंतिम नोटिस दिया गया है। बताया गया है कि पटवारी 17 तारीख से काम नहीं कर रहे थे। गुरुवार को उन्होंने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपत्तियां रखीं। अंतिम नोटिस के बाद इस मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा विवाद, PRC की बैठक बेनतीजा
पटवारियों के विरोध और विभिन्न जिलों में हुई कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। इसी बीच प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की बैठक हुई। हालांकि, बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका और विवाद का समाधान नहीं निकल पाया।
पटवारी प्रतिनिधिमंडल की डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में प्रस्तावित बैठक भी टल गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डिप्टी सीएम की व्यस्तता के कारण बैठक नहीं हो सकी। ऐसे में पटवारियों की मांगों और उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
पटवारी संघ को आपत्ति क्यों?
पटवारी संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर करने से भविष्य में जमीन संबंधी विवादों में पटवारियों को भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। संघ की आशंका है कि लीज डीड में नाम शामिल होने पर जमीन के मालिकाना हक या अन्य विवादों के दौरान उन्हें पक्षकार बनाया जा सकता है।
इसी वजह से संघ निष्पादक की भूमिका से हटाने की मांग कर रहा है। पटवारियों का कहना है कि जब तक उनकी मुख्य आपत्ति का समाधान नहीं होता, तब तक विवाद बना रहेगा। संघ ने कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है। दूसरी ओर, प्रशासन ने काम में देरी और निर्देशों के पालन में लापरवाही को कार्रवाई की वजह बताया है।
50 लाख ग्रामीण संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी
मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर सरकार का खर्च 3,800 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान बताया गया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज लोगों को संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराना है।
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्तियों का सर्वे कर अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं। अब इन संपत्तियों के मालिकाना हक को रजिस्ट्री के माध्यम से दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसी प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका को लेकर असहमति सामने आई है।
फिलहाल विवाद का समाधान नहीं निकलने से योजना के काम और राजस्व संबंधी सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। आगे की स्थिति मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली चर्चा, राजस्व विभाग के निर्णय और पटवारी संघ की मांगों पर होने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगी।