PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत मध्य प्रदेश में सोलर सिस्टम लगाने वाले घरों की संख्या बढ़ी है, लेकिन योजना तक पहुंचने के लिए आवेदन करने के मामले में प्रदेश कई बड़े राज्यों से पीछे है। 5 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मप्र में करीब 2.27 लाख आवेदन आए, जिनमें से 1.61 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में PM Surya Ghar योजना शुरू की थी। इसका लक्ष्य देशभर में 1 करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाना है।
मप्र में 71% आवेदनों पर लग चुका सोलर
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मप्र में आए करीब 2.27 लाख आवेदनों में से 1.61 लाख में सोलर सिस्टम लग चुका है। यानी आवेदन से इंस्टॉलेशन तक पहुंचने का अनुपात करीब 71% है।
इन इंस्टॉलेशन से करीब 1.66 लाख परिवारों को लाभ मिला है। प्रदेश में कुल करीब 602 मेगावाट रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित हुई है और केंद्र की ओर से लगभग 1,131 करोड़ रुपए की सब्सिडी जारी की गई है।
असली अंतर आवेदन में दिखाई देता है
मध्य प्रदेश की स्थिति को देखें तो सोलर सिस्टम लगने के बाद उसे पूरा करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। समस्या ज्यादा आवेदन आने की है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक गुजरात में करीब 11.78 लाख आवेदन आए, जबकि मप्र में यह संख्या 2.27 लाख के आसपास रही। गुजरात में योजना से लाभ पाने वाले परिवारों की संख्या करीब 11.27 लाख बताई गई है।
बैंक के भरोसे सोलर: करीब 60% सिस्टम कर्ज से
24 जुलाई तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में 92,213 लोन आवेदन मंजूर हुए। यह उस समय तक लगे करीब 1.55 लाख सिस्टम का लगभग 60% था। इनमें से 84,963 आवेदकों को कर्ज मिल चुका था। कुल करीब 1,505 करोड़ रुपए का लोन वितरित हुआ।
प्रति आवेदक औसत राशि करीब 1.77 लाख रुपए रही और मंजूर हुए कर्जों में लगभग 92% का वितरण हो चुका था।
मप्र में 95% सिस्टम 3 किलोवाट से ज्यादा क्षमता वाले
24 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में लगे करीब 1.47 लाख यानी 95% सिस्टम 3 किलोवाट से ज्यादा क्षमता वाले थे। 2 से 3 किलोवाट के 7,360 और 2 किलोवाट तक के सिर्फ 120 सिस्टम लगे थे।
3 किलोवाट तक मिलती है अधिकतम 78 हजार रुपए की सब्सिडी
PM Surya Ghar योजना में 1 किलोवाट सिस्टम पर 30 हजार रुपए, 2 किलोवाट पर 60 हजार रुपए और 3 किलोवाट या उससे ज्यादा के सिस्टम के लिए अधिकतम 78 हजार रुपए तक केंद्रीय वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
3 किलोवाट से अधिक क्षमता बढ़ाने पर अतिरिक्त क्षमता के लिए केंद्रीय सब्सिडी नहीं बढ़ती। मप्र में प्रति सिस्टम औसतन करीब 70 हजार रुपए की सब्सिडी जाने की बात उपलब्ध आंकड़ों में सामने आती है।
मप्र की सोलर योजना की तस्वीर
मध्य प्रदेश में उपलब्ध आंकड़ों को आवेदन, इंस्टॉलेशन और वित्तीय सहायता के आधार पर देखा जा सकता है। आवेदन की संख्या गुजरात जैसे राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन आवेदन आने के बाद सिस्टम लगाने की दर करीब 71% बताई गई है। वहीं सोलर सिस्टम लगवाने वालों में बैंक लोन का इस्तेमाल भी काफी अधिक दिखाई देता है।
हालांकि केवल इन आंकड़ों के आधार पर आवेदन कम होने का एकमात्र कारण निर्धारित नहीं किया जा सकता।
