उज्जैन की छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के सड़क चौड़ीकरण से जुड़े विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भड़काऊ और भ्रामक पोस्ट को लेकर पुलिस की जांच तेज हो गई है। पुलिस के मुताबिक, कुछ पोस्ट और AI से तैयार सामग्री में मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने जैसी गलत तस्वीरें दिखाई गईं, जबकि विवाद सड़क की जद में आ रहे मस्जिद के एक हिस्से को हटाने से जुड़ा है।
इन पोस्टों के प्रसार और उनसे लोगों के जुटने की परिस्थितियों की पुलिस जांच कर रही है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में कई FIR दर्ज की गई हैं और पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी नामजद किए गए हैं।
AI तस्वीरों और वीडियो से अफवाह फैलाने की जांच
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ऐसी AI-जनरेटेड तस्वीरें और वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें शाही मस्जिद को पूरी तरह गिराए जाने जैसा दृश्य दिखाया गया। पुलिस का कहना है कि वास्तविक कार्रवाई मस्जिद के उस हिस्से को हटाने से जुड़ी थी, जो सड़क चौड़ीकरण की जद में आता है।
पुलिस अब केवल मूल पोस्ट डालने वाले अकाउंट्स की ही नहीं, बल्कि उन लोगों की गतिविधियों की भी जांच कर रही है जिन्होंने इन सामग्री को आगे प्रसारित किया।
पांच सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पुलिस की जांच में
सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भ्रामक या भड़काऊ सामग्री प्रसारित करने के आरोप में पांच कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों में बताया गया है कि इन लोगों पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने, वैमनस्य बढ़ाने और गलत सूचना प्रसारित करने से संबंधित धाराओं में मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री और उसके बाद घटनास्थल पर लोगों के जुटने के बीच संबंध की भी जांच की जा रही है। हालांकि, किसी पोस्ट या व्यक्ति को घटना का कारण मानने से पहले जांच में उसकी भूमिका का प्रमाणित होना जरूरी होगा।
दूसरे राज्यों से आने वाली पोस्ट भी जांच के दायरे में
दूसरे जिलों तथा राज्यों से सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले लोगों की गतिविधियों की भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस की जांच का एक हिस्सा यह पता लगाना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किस अकाउंट से शुरू हुई, उसे किन लोगों ने आगे साझा किया और क्या पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीर या वीडियो वास्तविक थी या AI से तैयार की गई थी।
पुलिस अधिकारियों ने अफवाहों से बचने की अपील की
उज्जैन में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
ADG राकेश गुप्ता के हवाले से कहा गया है कि मस्जिद कमेटी और समाज के लोग सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों द्वारा AI से तैयार तस्वीरों के जरिए भड़काऊ पोस्ट किए जा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया की पोस्ट पर भरोसा नहीं करने और ऐसी सामग्री डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने पर क्या हुआ?
शाही मस्जिद का जो हिस्सा सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा था, उसे हटाने को लेकर प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच सहमति बनी थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मुस्लिम समाज के सदस्यों ने प्रभावित हिस्से को स्वयं हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
इसी दौरान मौके पर भीड़ जुटी और पुलिस पर पथराव की घटना हुई। पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और अन्य उपायों का इस्तेमाल किया। बाद में सुरक्षा बढ़ाई गई और CCTV तथा ड्रोन के जरिए निगरानी की गई।
पुलिस अब किन बिंदुओं की जांच कर रही है?
- भड़काऊ या भ्रामक पोस्ट सबसे पहले किस अकाउंट से अपलोड हुई।
- पोस्ट में इस्तेमाल तस्वीर या वीडियो वास्तविक था या AI से तैयार किया गया।
- सामग्री को आगे किन-किन अकाउंट्स ने शेयर किया।
- पोस्ट के बाद घटनास्थल पर लोगों के जुटने की परिस्थितियां क्या थीं।
- उज्जैन के बाहर से पोस्ट करने वाले लोगों की घटना से कोई प्रत्यक्ष भूमिका थी या नहीं।
- पथराव और अन्य घटनाओं में सोशल मीडिया सामग्री की भूमिका क्या रही।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।
