रीवा। गांधी जयंती के मौके पर 2 अक्टूबर को केंद्रीय जेल रीवा से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 7 बंदियों को विशेष परिहार के तहत रिहा किया गया। मध्यप्रदेश शासन के जेल विभाग के आदेश के अनुसार, इन बंदियों ने 14 साल की वास्तविक सजा पूरी कर ली थी। परिहार अवधि को जोड़ने के बाद 20 साल की सजा अवधि पूरी होने पर उन्हें रिहाई दी गई।
रिहा किए गए 7 बंदियों में अनूपपुर के 2, शहडोल के 2 और सिंगरौली के 3 बंदी शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सभी बंदी भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत दोषसिद्ध थे और आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
गांधी जयंती पर विशेष परिहार के तहत रिहाई
मध्यप्रदेश में पात्र दंडित बंदियों को साल में निर्धारित विशेष अवसरों पर समयपूर्व रिहाई या सजा में छूट देने की व्यवस्था है। इनमें 26 जनवरी, 14 अप्रैल, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर और 15 नवंबर शामिल हैं। अच्छे आचरण और शासन के निर्धारित मापदंडों के आधार पर पात्र बंदियों को इस व्यवस्था का लाभ दिया जाता है।
इसी व्यवस्था के तहत गांधी जयंती पर केंद्रीय जेल रीवा में बंद 7 आजीवन कारावास के बंदियों को विशेष परिहार का लाभ मिला। रिहाई के बाद ये बंदी जेल से बाहर आ गए।
शहडोल के दो बंदियों को मिली रिहाई
जारी सूची के मुताबिक शहडोल जिले के अमृतलाल बैगा (41) और श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54) को विशेष परिहार के तहत रिहा किया गया। दोनों आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और निर्धारित अवधि पूरी कर चुके थे।
अनूपपुर के दो बंदी भी रिहा
अनूपपुर जिले के बच्चेलाल बसोर (58) और शंकरदयाल चौकसे (56) को भी विशेष परिहार के तहत रिहाई दी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों ने निर्धारित सजा अवधि पूरी कर ली थी।
सिंगरौली के तीन बंदियों की रिहाई
सिंगरौली जिले से शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37) और गुलाब सिंह गोंड़ (38) को रिहा किया गया। तीनों आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और विशेष परिहार के तहत रिहाई के लिए निर्धारित अवधि पूरी कर चुके थे।
रीवा जेल से रिहा हुए 7 बंदियों की सूची
- अनूपपुर: बच्चेलाल बसोर (58), शंकरदयाल चौकसे (56)
- शहडोल: अमृतलाल बैगा (41), श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54)
- सिंगरौली: शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37), गुलाब सिंह गोंड़ (38)
विशेष परिहार के तहत कैसे मिलती है राहत?
मध्यप्रदेश सरकार की व्यवस्था के अनुसार जेलों में निरुद्ध पात्र दंडित बंदियों को वर्ष में पांच विशेष अवसरों पर सजा में छूट या समयपूर्व रिहाई का लाभ दिया जाता है। इसका उद्देश्य निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले बंदियों को राहत देने के साथ उनके पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराना भी है। सरकार की ओर से पहले भी इन अवसरों पर दंडित बंदियों को समयपूर्व रिहाई और सजा में छूट दी जाती रही है।
