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विश्वकर्मा जयंती आज: पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और मंत्र; जानें शस्त्र-वाहन पूजा का सही तरीका

विश्वकर्मा जयंती 2026 पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और मशीन वाहन पूजा
विश्वकर्मा जयंती पर भगवान विश्वकर्मा के साथ मशीन, औजार, वाहन और कार्यस्थल की पूजा की जाती है।साभार: The City Express

Vishwakarma Jayanti 2026: भगवान विश्वकर्मा को शिल्प, निर्माण, वास्तुकला और तकनीकी कौशल से जुड़ा देवता माना जाता है। इस वर्ष विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जा रही है। यह पर्व कन्या संक्रांति के साथ जुड़ा है और इस दिन कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों, ऑफिस, मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा करने की परंपरा है।

Quick Read

  • विश्वकर्मा जयंती: 17 सितंबर 2026, गुरुवार को।
  • कन्या संक्रांति: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के कारण आज विश्वकर्मा पूजा का पर्व मनाया जा रहा है।
  • Rewa के लिए अभिजीत मुहूर्त: करीब 11:34 AM से 12:23 PM तक; Rahu Kaal करीब 1:31 PM से 3:03 PM तक बताया गया है। स्थान के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।
  • पूजा में भगवान विश्वकर्मा के साथ मशीन, औजार, वाहन और कार्यस्थल की पूजा की जाती है।

विश्वकर्मा जयंती 2026: आज 17 सितंबर 2026, गुरुवार को देशभर में विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें परंपरा में देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला से जुड़े देवता के रूप में माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा विशेष रूप से कारीगरों, इंजीनियरों, तकनीशियनों, मैकेनिकों, निर्माण कार्य से जुड़े लोगों, फैक्ट्री कर्मचारियों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ मशीनों, औजारों, उपकरणों, वाहनों और कार्यस्थल की भी पूजा की जाती है।

17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है विश्वकर्मा जयंती?

विश्वकर्मा पूजा की तिथि सामान्य त्योहारों की तरह केवल चंद्र तिथि से तय नहीं होती। यह पर्व कन्या संक्रांति से जुड़ा है। कन्या संक्रांति उस समय को कहा जाता है जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है। वर्ष 2026 में यह संक्रांति 17 सितंबर को हो रही है, इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी इसी दिन मनाई जा रही है।

उपलब्ध पंचांग और धार्मिक कैलेंडर स्रोतों के अनुसार 17 सितंबर 2026 को विश्वकर्मा जयंती के साथ कन्या संक्रांति भी है। इसी वजह से 16 और 17 सितंबर की तारीख को लेकर बनी भ्रम की स्थिति अब स्पष्ट है और इस वर्ष मुख्य पूजा 17 सितंबर को की जा रही है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा के लिए अलग-अलग पंचांग और स्थान के आधार पर समय में कुछ अंतर मिल रहा है। कुछ पंचांगों में पूजा के लिए सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक का समय बताया गया है। इसी अवधि में अभिजीत मुहूर्त भी आता है।

मध्य प्रदेश के Rewa के लिए उपलब्ध स्थानीय गणना के अनुसार 17 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:34 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा। वहीं Rahu Kaal दोपहर 1:31 बजे से 3:03 बजे तक बताया गया है। इसलिए स्थानीय पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

अन्य पंचांगों में भी 17 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त दोपहर के आसपास बताया गया है, हालांकि सूर्योदय और स्थानीय गणना के अंतर के कारण समय में कुछ मिनट का फर्क हो सकता है।

घर पर विश्वकर्मा पूजा कैसे करें?

विश्वकर्मा पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थल या कार्यस्थल की अच्छी तरह सफाई करें। जिन मशीनों, औजारों, उपकरणों या वाहनों की पूजा करनी है, उन्हें भी साफ करें। इसके बाद पूजा के स्थान पर चौकी रखें और उस पर साफ पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।

चौकी के पास कलश स्थापित किया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प, फल और मिठाई आदि अर्पित करें। गंगाजल से पूजा स्थल का शुद्धिकरण भी किया जाता है।

विश्वकर्मा पूजा की सामग्री

  • भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या प्रतिमा
  • चौकी और पीला या लाल कपड़ा
  • कलश, आम के पत्ते और नारियल
  • रोली, चंदन और हल्दी
  • अक्षत यानी साबुत चावल
  • मौली या कलावा
  • फूल और माला
  • धूप और दीपक
  • घी और कपूर
  • फल और मिठाई
  • गंगाजल
  • जनेऊ, सुपारी और पान
  • इत्र तथा अन्य स्थानीय पूजा सामग्री

पूजा सामग्री में स्थानीय परंपरा के अनुसार कुछ चीजें कम या ज्यादा हो सकती हैं। उपलब्ध धार्मिक विधियों में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा, कलश, रोली, अक्षत, पुष्प, दीप, नैवेद्य और अन्य पूजन सामग्री का उल्लेख मिलता है।

भगवान विश्वकर्मा का मंत्र

पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा के नाम का जाप किया जाता है। सरल और प्रचलित मंत्र है:

ॐ विश्वकर्मणे नमः।

इस मंत्र का श्रद्धा के साथ जाप करते हुए भगवान विश्वकर्मा का ध्यान किया जा सकता है। धार्मिक स्रोतों में भी इस मंत्र को विश्वकर्मा पूजा में शामिल करने की सलाह दी गई है।

मशीन और औजारों की पूजा कैसे करें?

विश्वकर्मा पूजा में मशीनों और औजारों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। सबसे पहले मशीन, औजार या उपकरण को अच्छी तरह साफ करें। बड़ी मशीनों को उनकी जगह से हटाने की जरूरत नहीं होती। वहीं छोटे औजारों को पूजा स्थल के पास रखा जा सकता है।

इसके बाद मशीन या औजार पर रोली, चंदन और अक्षत लगाएं। फूल या माला अर्पित करें और दीप-धूप दिखाएं। भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद सभी कर्मचारी या परिवार के सदस्य मिलकर आरती कर सकते हैं। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।

कई स्थानों पर इस दिन मशीनों और औजारों का नियमित इस्तेमाल नहीं किया जाता और उन्हें एक दिन के लिए विश्राम देकर पूजा की जाती है। यह स्थानीय परंपरा और कार्यस्थल की व्यवस्था पर निर्भर करता है।

शस्त्र पूजा की विधि क्या है?

कुछ परिवारों और संस्थानों में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर शस्त्रों और विशेष उपकरणों की भी पूजा की जाती है। इसे भी पहले साफ-सफाई और सुरक्षित तरीके से पूजा स्थल पर रखने से शुरू किया जाता है। शस्त्र पर रोली या चंदन से तिलक लगाकर अक्षत, पुष्प और दीप-धूप अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान और मंत्र जाप किया जाता है।

शस्त्र पूजा के दौरान सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। वास्तविक शस्त्रों को पूजा के समय सुरक्षित स्थिति में रखें और उन्हें चलाने, जांचने या प्रदर्शित करने के बजाय केवल धार्मिक पूजन तक सीमित रखें। बच्चों या अनधिकृत लोगों की पहुंच से भी इन्हें दूर रखा जाना चाहिए।

वाहन पूजा की विधि

विश्वकर्मा जयंती पर कार, बाइक, ट्रैक्टर, ट्रक, ऑटो, मशीनरी वाहन और दूसरे कामकाजी वाहनों की पूजा करने की भी परंपरा है। सबसे पहले वाहन की सफाई करें और उसे सुरक्षित स्थान पर खड़ा करें। इसके बाद वाहन पर रोली या चंदन से तिलक लगाएं, अक्षत और पुष्प अर्पित करें तथा फूलों की माला चढ़ाएं।

वाहन के सामने दीपक और धूप दिखाकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान किया जाता है। परंपरा के अनुसार कलावा भी बांधा जा सकता है। नारियल या अन्य नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा कई स्थानों पर है। पूजा के बाद आरती और प्रसाद वितरण किया जाता है। वाहन पूजा की विधि में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

फैक्ट्री, दुकान और ऑफिस में पूजा का तरीका

फैक्ट्री या वर्कशॉप में विश्वकर्मा पूजा से पहले पूरे परिसर की सफाई की जाती है। मशीनों और कार्यस्थल को व्यवस्थित करने के बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। कर्मचारी सामूहिक रूप से पूजा में शामिल होते हैं। मशीनों और उपकरणों पर तिलक, अक्षत और पुष्प अर्पित करने के बाद आरती की जाती है।

इस पूजा का उद्देश्य धार्मिक परंपरा के साथ काम के साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करना भी माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को तकनीकी कौशल, निर्माण और शिल्प से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और तकनीकी कार्यों से जुड़े संस्थानों में इस पर्व का विशेष महत्व रहता है।

विश्वकर्मा पूजा में किन बातों का ध्यान रखें?

पूजा से पहले मशीनों और औजारों की सफाई करें। पूजा के दौरान बिजली से चलने वाली मशीनों को सुरक्षित स्थिति में रखें और पूजा के लिए उन्हें बंद रखना बेहतर है। बड़े औद्योगिक उपकरणों के पास दीपक या ज्वलनशील सामग्री रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। वाहन पूजा के दौरान वाहन को सुरक्षित स्थान पर खड़ा करें और पूजा पूरी होने तक उसे अनावश्यक रूप से संचालित न करें।

पूजा के शुभ समय को लेकर अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इसलिए यदि पूजा किसी विशेष शहर या बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान में की जा रही है तो वहां के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त लेना अधिक उपयुक्त रहेगा।

विश्वकर्मा जयंती का धार्मिक और कार्यक्षेत्र से जुड़ा महत्व

धार्मिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और वास्तुकार माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भवनों, नगरों और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया। इसी परंपरा के कारण विश्वकर्मा जयंती पर निर्माण, शिल्प, मशीनरी और तकनीकी कार्य से जुड़े उपकरणों की पूजा की जाती है।

आधुनिक समय में यह पर्व इंजीनियरों, कारीगरों, मैकेनिकों, तकनीशियनों, फैक्ट्री कर्मचारियों, मशीन ऑपरेटरों, बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए विशेष अवसर बन गया है। इस दिन लोग भगवान विश्वकर्मा से कार्य में सफलता, सुरक्षा, उन्नति और समृद्धि की कामना करते हैं।

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