जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अवमानना प्रकरण में छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने और अवमानना नोटिस के बावजूद न्यायालय के समक्ष उपस्थिति नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए SP को 1 अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष पेश कराने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट की तामील पुलिस महानिरीक्षक, जबलपुर के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। मामला एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी की पत्नी की ओर से दायर अवमानना याचिका से संबंधित है, जिसमें पूर्व में पारित न्यायालयीन आदेश के अनुपालन का मुद्दा उठाया गया था।
रिटायर्ड पुलिसकर्मी की पत्नी ने दायर की थी अवमानना याचिका
यह मामला जबलपुर के सुहागी निवासी सीता तिवारी की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिका के अनुसार उनके पति संतोष पांडे छिंदवाड़ा में पुलिस विभाग में पदस्थ थे। सेवानिवृत्ति के बाद उनका निधन हो गया था। इसके बाद विभाग की ओर से 2 लाख 24 हजार रुपये की रिकवरी की कार्रवाई की गई थी।
रिकवरी की कार्रवाई के खिलाफ सीता तिवारी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनके पक्ष में राहतकारी आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया, जिसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई।
6 नवंबर 2025 को जारी हुआ था अवमानना नोटिस
अवमानना प्रकरण की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि 6 नवंबर 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी। रिकॉर्ड के अनुसार, छिंदवाड़ा SP की ओर से 11 फरवरी 2026 को गृह विभाग के अवर सचिव, वल्लभ भवन भोपाल को पत्र भेजा गया था।
पत्र में अवमानना याचिका का नोटिस प्राप्त होने और आवश्यक मंजूरी के लिए गृह विभाग को पत्र भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। कोर्ट के अनुसार, इसके बावजूद न्यायालय के समक्ष न तो अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई और न ही संबंधित अधिकारियों की ओर से न्यायालयीन कार्यवाही में अपेक्षित तरीके से भागीदारी की गई।
कोर्ट ने कहा- सिर्फ नोटिस मिलने की सूचना पर्याप्त नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना नोटिस प्राप्त होने की जानकारी देना मात्र पर्याप्त नहीं था। संबंधित अधिकारियों को न्यायालय के समक्ष विधिवत उपस्थित होकर मामले में आवश्यक कदम उठाने थे और आदेश के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी थी।
कोर्ट ने अधिकारियों के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की और इसे अत्यंत निंदनीय बताया। न्यायालय के अनुसार परिस्थितियों से यह प्रतीत होता है कि संबंधित अधिकारी अवमानना क्षेत्राधिकार के समक्ष अपेक्षित तरीके से उपस्थित होने से बचते रहे। इन्हीं परिस्थितियों में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
1 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश करने का आदेश
मामले की परिस्थितियों को देखते हुए एकलपीठ ने छिंदवाड़ा SP के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। कोर्ट ने वारंट की तामील पुलिस महानिरीक्षक, जबलपुर के माध्यम से कराने और अजय पांडे को 1 अक्टूबर 2026 को न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश कराने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई लंबित अवमानना प्रकरण में न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन और न्यायालयीन प्रक्रिया से संबंधित है। गैर-जमानती वारंट जारी होना इस प्रकरण के आधार पर किसी अलग आपराधिक मामले में दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं है। मामले में आगे की कार्रवाई 1 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में तय होगी।
