रीवा / मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश

डॉक्टर भगवान नहीं, नोट छापने की मशीन बन चुके हैं: डॉक्टरों पर भड़के रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा, बोले- मेडिकल लाइसेंस रद्द कर देने चाहिए

•9 मिनट पढ़ने का समय
Rewa MP Janardan Mishra statement on doctors and government hospital health services
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मेडिकल लाइसेंस रद्द करने की मांग की।

मुख्य बिंदुQuick Read

  • सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों का मेडिकल लाइसेंस रद्द कर चिकित्सा का अधिकार खत्म कर देना चाहिए।
  • उन्होंने निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों से सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी भी निभाने की मांग की।
  • गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद चार स्वास्थ्यकर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी।
  • अक्षत शुक्ला के पिता ने 20 मिनट में टीबी की 14 गोलियां देने का आरोप लगाया है; पुलिस शिकायत की जांच कर रही है।
  • मिथिलेश सिंह ने कंधे के ऑपरेशन में लापरवाही की शिकायत की थी; उनकी मौत के मामले को भी अलग से जांच के संदर्भ में देखना जरूरी है।

रीवा / मध्य प्रदेश: रीवा में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था और इलाज में कथित लापरवाही को लेकर सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर अब भगवान नहीं रह गए हैं, बल्कि पैसे कमाने की मशीन बन चुके हैं। सांसद ने यहां तक कहा कि यदि उनके हाथ में होता तो वह सभी डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा देते और उनका इलाज करने का अधिकार समाप्त कर देते।

सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रीवा में पिछले कुछ महीनों के दौरान इलाज से जुड़ी कई गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इनमें गांधी मेमोरियल अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, गर्भवती महिला की मौत, कंधे के ऑपरेशन में कथित गड़बड़ी और एक युवक को टीबी की दवाएं देने से जुड़ा मामला शामिल है। इन घटनाओं में परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सभी मामलों में आरोपों और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

‘मेरा वश चले तो सभी डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त करवा दूं’

सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा, “मेरा वश चले तो मैं सभी डॉक्टरों का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा दूं। इनका चिकित्सा करने का अधिकार ही समाप्त कर देना चाहिए। ये चिकित्सक नहीं हैं। ये नोट छापने की मशीन बन चुके हैं। जनता अब इन्हें भगवान नहीं, दानव के रूप में देखती है।”

उन्होंने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। सांसद का आरोप है कि कुछ डॉक्टर निजी प्रैक्टिस में अधिक समय देते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त चिकित्सकीय सेवाएं नहीं मिल पातीं।

निजी प्रैक्टिस करें, लेकिन सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी भी निभाएं

जनार्दन मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करने से आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके साथ उन्हें सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। उन्होंने ऐसे डॉक्टरों को सरकारी नौकरी से हटाने और उनकी मेडिकल प्रैक्टिस पर रोक लगाने की मांग की।

सांसद ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करने और चिकित्सा का अधिकार समाप्त करने की बात उनकी व्यक्तिगत राय है। उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में कार्रवाई करने की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के पास

रीवा से भाजपा विधायक राजेंद्र शुक्ल मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं। उनके पास लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ऐसे में रीवा के सांसद जनार्दन मिश्रा का सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठाना स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही से भी जुड़ता है।

यह बयान भाजपा के ही दो जनप्रतिनिधियों के बीच किसी सार्वजनिक राजनीतिक टकराव का प्रमाण नहीं है, लेकिन इससे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर बहस जरूर तेज हो सकती है। सवाल यह है कि इलाज से जुड़ी शिकायतों की जांच किस स्तर तक पहुंची और मरीजों को बेहतर सेवाएं देने के लिए क्या सुधार किए जा रहे हैं।

चार मामलों के बाद उठे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल

रीवा में इलाज को लेकर सामने आए चार मामलों ने मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों को चर्चा में ला दिया है। इनमें दो मामलों में मरीजों की मौत हुई, जबकि अन्य मामलों में भी गंभीर आरोप लगाए गए। इन घटनाओं का विवरण इस प्रकार है।

1. गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत

अगस्त 2026 में रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल में प्रसव के दौरान मनगवां क्षेत्र की कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर समय पर इलाज नहीं देने और दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए थे। घटना के बाद अस्पताल में विरोध हुआ और मामले की जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक कार्रवाई में दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया था। बाद में इस मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ा और एक अन्य डॉक्टर को भी निलंबित किए जाने की खबर सामने आई। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। इस प्रकरण में चिकित्सकीय जिम्मेदारी और मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच की प्रक्रिया अलग से महत्वपूर्ण है।

2. दीपा गुप्ता और गर्भस्थ शिशु की मौत पर परिजनों ने लगाए थे आरोप

अक्टूबर 2025 में सतना से रेफर होकर रीवा के संजय गांधी अस्पताल आई गर्भवती दीपा गुप्ता और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान दो दिनों तक उचित इलाज नहीं किया गया। इस घटना के बाद परिवार ने अस्पताल परिसर में विरोध भी किया था।

दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया था। अस्पताल के तत्कालीन सीएमओ ने बताया था कि महिला को गंभीर हालत में रेफर किया गया था। उनके मुताबिक, महिला को पीलिया था और पेशाब नहीं हो रहा था। ऑपरेशन से बच्चे को निकालने के बाद महिला का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

इस मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष दोनों सामने आए थे। इसलिए इसे जांच के निष्कर्ष के बिना साबित चिकित्सकीय लापरवाही के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

3. कंधे के ऑपरेशन में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाली मिथिलेश सिंह की मौत

सितंबर 2026 में हुजूर तहसील क्षेत्र की मिथिलेश सिंह ने कंधे के ऑपरेशन में कथित लापरवाही को लेकर रीवा कलेक्टर को शिकायत दी थी। महिला ने संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर पर गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि ऑपरेशन के बाद भी दर्द से राहत नहीं मिली और आगे इलाज के लिए उन्हें दूसरे अस्पताल जाना पड़ा।

मिथिलेश सिंह की शिकायत में कंधे के इलाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद अक्टूबर में रीवा के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में एक किराए के कमरे में आग लगने की घटना में उनकी मौत हो गई। दोनों घटनाओं का उल्लेख एक साथ सामने आया, लेकिन ऑपरेशन में चिकित्सकीय लापरवाही और महिला की मौत के बीच किसी सीधे संबंध को जांच के निष्कर्ष के बिना स्थापित नहीं किया जा सकता।

4. अक्षत शुक्ला की मौत, पिता ने 20 मिनट में 14 टीबी गोलियां देने का आरोप लगाया

अक्टूबर 2026 में रीवा के खुटेही निवासी 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उनके पिता सुभाष शुक्ला ने आरोप लगाया कि संजीवनी अस्पताल में भर्ती बेटे को करीब 20 मिनट के भीतर टीबी की 14 गोलियां दी गईं। पिता का कहना था कि इससे कुछ घंटे पहले की मेडिकल रिपोर्ट में टीबी का उल्लेख नहीं था।

परिजनों के मुताबिक, दवाएं दिए जाने के बाद अक्षत की हालत बिगड़ गई। इसके बाद उसे प्रार्थना अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पिता ने दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ समान थाने में शिकायत देकर जांच की मांग की है। इस मामले में पुलिस जांच की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी सामने आई है। पिता के आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और सरकारी अस्पतालों की जवाबदेही पर बहस

सांसद जनार्दन मिश्रा के बयान ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, निजी प्रैक्टिस और मरीजों के इलाज की गुणवत्ता जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को समय पर डॉक्टर, जरूरी जांच, दवाएं और उचित इलाज मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की बुनियादी जिम्मेदारी है।

वहीं, किसी डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगने और जांच में उसकी जिम्मेदारी साबित होने के बीच अंतर है। ऐसे मामलों में मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार की प्रक्रिया, संबंधित डॉक्टरों का पक्ष और जांच रिपोर्ट के आधार पर ही जवाबदेही तय की जा सकती है। सांसद ने डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन अलग-अलग मामलों में अंतिम जिम्मेदारी जांच के आधार पर ही तय होगी।

संपादकीय लेखक एवं रिपोर्टर
सत्यापित रिपोर्टर
द सिटी एक्सप्रेस न्यूज़ डेस्क
संपादकीय न्यूज़ डेस्क • The City Express

द सिटी एक्सप्रेस (The City Express) का केंद्रीय संपादकीय न्यूज़ डेस्क। मध्य प्रदेश, विंध्य, बुंदेलखंड और देश-दुनिया की ताज़ा, तथ्यपरक और निष्पक्ष ख़बरों का सत्यापित केंद्र।

पाठकों की प्रतिक्रियाएं

खुला मंच
इस खबर पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। सबसे पहले अपनी राय साझा करें!

मध्य प्रदेश की अन्य खबरें

8 खबरें प्रदर्शित

मध्य प्रदेश की मुख्य खबरें

और देखें >

📍मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से समाचार (District Dispatches)

आस-पास के जिले

सतना की बड़ी खबरें

सतना का पूरा पेज >

मऊगंज की बड़ी खबरें

मऊगंज का पूरा पेज >

मैहर की बड़ी खबरें

मैहर का पूरा पेज >

सीधी की बड़ी खबरें

सीधी का पूरा पेज >

भोपाल की बड़ी खबरें

भोपाल का पूरा पेज >

इंदौर की बड़ी खबरें

इंदौर का पूरा पेज >