नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। उनका नाम रात के गहरे अंधकार और काल से जुड़ा है। धार्मिक मान्यता में वे भय और संकट से रक्षा करने वाली देवी मानी जाती हैं। उग्र रूप के बावजूद भक्त उन्हें ‘शुभंकरी’ कहते हैं।
कैसा है मां कालरात्रि का स्वरूप
मां कालरात्रि का वर्ण श्याम बताया गया है। उनके चार हाथ हैं और वे गर्दभ यानी गधे पर सवार रहती हैं। उनके दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में होते हैं, जबकि बाएं हाथों में खड्ग और लोहे का अस्त्र बताया गया है। यह स्वरूप बुराई से संघर्ष और भक्तों को निर्भयता देने का प्रतीक माना जाता है।
क्या है मां कालरात्रि की कथा
नवदुर्गा की लोकपरंपरा में मां कालरात्रि को देवी के उस उग्र रूप के तौर पर याद किया जाता है जो अधर्म और दुष्ट शक्तियों का नाश करता है। उनसे जुड़ी कथाओं में शुंभ-निशुंभ और उनके सेनापतियों के साथ देवी के युद्ध का प्रसंग आता है।
देवीमाहात्म्य के युद्ध-प्रसंग में अंबिका के क्रोध से काली प्रकट होती हैं। वे चंड और मुंड का वध करती हैं, जिसके बाद देवी उन्हें ‘चामुंडा’ नाम देती हैं। रक्तबीज के प्रसंग में भी काली उसके रक्त को धरती पर गिरने से रोकने में सहायता करती हैं। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में इन कथाओं और देवी-स्वरूपों का संबंध अलग ढंग से बताया जाता है।
मां कालरात्रि का मंत्र
पूजा के दौरान श्रद्धा से इस सरल मंत्र का जप किया जा सकता है:
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
जप की संख्या के लिए कोई एक अनिवार्य नियम नहीं है। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र दोहरा सकते हैं।
पूजन विधि
- पूजा-स्थान को साफ करें और मां दुर्गा के सामने दीप जलाएं।
- मां कालरात्रि का ध्यान कर पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। गुड़ का भोग चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है।
- मंत्र का जप करें या देवी स्तुति का पाठ करें।
- अंत में आरती कर पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।
पूजा की सामग्री और क्रम क्षेत्र तथा परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
व्रत में क्या रखें ध्यान
नवरात्रि व्रत में कुछ लोग फलाहार करते हैं, कुछ एक समय भोजन लेते हैं और कुछ निर्जल उपवास रखते हैं। अपनी क्षमता, स्वास्थ्य और घर की परंपरा के अनुसार तरीका चुनें। बीमारी, गर्भावस्था, दवा या अन्य स्वास्थ्य स्थिति में उपवास से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
पूजा और व्रत में क्या न करें
- व्रत को अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कठिन न बनाएं और पानी या जरूरी दवा छोड़ने का दबाव न लें।
- किसी एक क्षेत्रीय रीति को सभी के लिए अनिवार्य नियम न मानें।
- मंत्र या पूजा के नाम पर डराने वाले दावों और अप्रमाणित उपायों पर भरोसा न करें।
- पूजा में जल्दबाजी या दिखावे के बजाय श्रद्धा और साफ-सफाई का ध्यान रखें।
इस साल सप्तमी कब है
2026 में शारदीय नवरात्रि की सप्तमी 17 अक्टूबर को है और इस दिन मां कालरात्रि की पूजा बताई गई है। सप्तमी तिथि अगले दिन सुबह तक रहने की गणना है, इसलिए पूजा का स्थानीय समय और तिथि अपने क्षेत्र के पंचांग से देख लें।
