टेलीकॉम कंपनियों के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस्तेमाल को लेकर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) नई व्यवस्था तैयार कर रहा है। इसके लिए 30 अक्टूबर 2026 को जिम्मेदार AI इस्तेमाल से जुड़ी ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की गई हैं। प्रस्ताव के तहत जियो, एयरटेल सहित टेलीकॉम सेवाएं देने वाली कंपनियों और नेटवर्क ऑपरेटरों को AI के इस्तेमाल के लिए बोर्ड से मंजूर आंतरिक नीति बनानी होगी।
नए प्रस्ताव में AI सिस्टम को हाई, मीडियम और लो रिस्क की तीन श्रेणियों में बांटने की बात कही गई है। कंपनियों को हर AI सिस्टम का रिकॉर्ड रखना होगा और उसके इस्तेमाल से पहले निर्धारित अधिकारी की मंजूरी लेनी होगी। इसके अलावा, AI से जुड़ी गंभीर गड़बड़ी या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की जानकारी TRAI को देनी होगी।
यह अभी अंतिम नियम नहीं, बल्कि हितधारकों से सुझाव मांगने के लिए जारी किया गया ड्राफ्ट है। TRAI ने इस पर 27 नवंबर 2026 तक टिप्पणियां मांगी हैं।
किन कंपनियों पर लागू हो सकता है नया प्रस्ताव?
TRAI का प्रस्ताव उन टेलीकॉम कंपनियों और अधिकृत संस्थाओं पर लागू होगा, जो टेलीकॉम सेवाएं देने या नेटवर्क स्थापित करने, चलाने, बनाए रखने और विस्तार करने का काम करती हैं तथा अपने नेटवर्क या सेवाओं में AI का इस्तेमाल करती हैं या करने की योजना बना रही हैं।
इसमें जियो और एयरटेल जैसे टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ नेटवर्क से जुड़ी दूसरी अधिकृत कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं। इसका उद्देश्य टेलीकॉम नेटवर्क, ग्राहक सेवाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में AI के इस्तेमाल को सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।
AI सिस्टम को 3 कैटेगरी में बांटना होगा
ड्राफ्ट गाइडलाइंस के अनुसार, हर कंपनी को अपने AI सिस्टम का जोखिम के आधार पर वर्गीकरण करना होगा। इसके लिए तीन श्रेणियां प्रस्तावित हैं:
- हाई रिस्क: ऐसे AI सिस्टम जिनकी खराबी से नेटवर्क संचालन, सेवाओं या ग्राहकों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
- मीडियम रिस्क: ऐसे सिस्टम जिनसे संचालन या ग्राहकों को मध्यम स्तर का नुकसान होने की आशंका हो सकती है।
- लो रिस्क: ऐसे AI सिस्टम जिनका नेटवर्क और उपभोक्ताओं पर संभावित प्रभाव तुलनात्मक रूप से कम हो।
यह वर्गीकरण इस आधार पर होगा कि संबंधित AI सिस्टम टेलीकॉम नेटवर्क और सेवाओं के लिए कितना महत्वपूर्ण है। इसके साथ कंपनी के वित्तीय और परिचालन कामकाज तथा ग्राहकों पर पड़ने वाले संभावित असर को भी ध्यान में रखा जाएगा।
AI इस्तेमाल करने से पहले लेनी होगी अधिकारी की मंजूरी
प्रस्ताव के अनुसार, कोई भी टेलीकॉम कंपनी निर्धारित अधिकारी की मंजूरी के बिना AI सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सकेगी। कंपनियां AI सिस्टम की जोखिम श्रेणी के आधार पर मंजूरी देने की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को सौंप सकेंगी।
हाई रिस्क वाले AI सिस्टम के लिए वरिष्ठ स्तर के अधिकारी की मंजूरी की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं, कम जोखिम वाले सिस्टम के लिए उपयुक्त स्तर के अधिकारी को अधिकार दिया जा सकता है।
कंपनियों को अपने AI सिस्टम की एक अपडेटेड सूची भी रखनी होगी। इसमें सक्रिय, निष्क्रिय और बंद किए जा चुके सभी AI सिस्टम का विवरण दर्ज करना होगा। इस रिकॉर्ड में सिस्टम का स्रोत, उद्देश्य और उसकी रिस्क कैटेगरी शामिल होगी। सूची में दर्ज किए बिना किसी AI सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
AI की गलती पर इंसानों की निगरानी जरूरी
TRAI के ड्राफ्ट में AI सिस्टम पर मानवीय निगरानी यानी Human Oversight को भी जरूरी बताया गया है। कंपनियों की आंतरिक AI नीति में यह तय करना होगा कि AI सिस्टम की गतिविधियों पर इंसानों की उचित निगरानी कैसे रखी जाएगी।
इसके साथ ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा, शिकायतों का निपटारा और AI के कारण होने वाले संभावित नुकसान को कम करने की व्यवस्था भी बनानी होगी। यदि किसी ग्राहक को AI सिस्टम के इस्तेमाल से परेशानी या नुकसान होता है और वह शिकायत दर्ज करता है, तो कंपनी को निर्धारित शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत उचित समय में उसका समाधान करना होगा।
गंभीर AI गड़बड़ी की जानकारी TRAI को देनी होगी
ड्राफ्ट में AI से जुड़ी घटनाओं के प्रबंधन के लिए अलग व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है। कंपनियों को हर AI Incident का रिकॉर्ड रखना होगा और उसकी गंभीरता के आधार पर वर्गीकरण करना होगा। इसके लिए चार श्रेणियां प्रस्तावित हैं:
- क्रिटिकल सीवेरिटी: अत्यंत गंभीर AI घटना।
- हाई सीवेरिटी: गंभीर AI घटना।
- मॉडरेट सीवेरिटी: मध्यम स्तर की घटना।
- लो सीवेरिटी: कम गंभीरता वाली घटना।
क्रिटिकल और हाई सीवेरिटी वाली घटनाओं की जानकारी निर्धारित प्रारूप और समय-सीमा के भीतर TRAI को देनी होगी। कंपनियों को ऐसी घटनाओं का रिकॉर्ड रखने, जांच करने और उनसे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए Standard Operating Procedure (SOP) भी तैयार करनी होगी।
AI Governance and Safety Committee बनाने का प्रस्ताव
ड्राफ्ट में प्रत्येक संबंधित टेलीकॉम संस्था के लिए बोर्ड की मंजूरी से AI Governance and Safety Committee बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह समिति कंपनी में AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की निगरानी करेगी।
समिति में नेटवर्क ऑपरेशन, सर्विस डिलीवरी, IT, डेटा मैनेजमेंट, रेगुलेटरी अफेयर्स और कंज्यूमर अफेयर्स से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसकी अध्यक्षता वरिष्ठ अधिकारी करेंगे, जिन्हें AI Governance and Safety Officer की जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रस्ताव के अनुसार, समिति को कम से कम हर वित्त वर्ष में एक बार AI सिस्टम के प्रदर्शन और उससे जुड़े जोखिमों की समीक्षा करनी होगी। जरूरत पड़ने पर किसी AI सिस्टम में बदलाव करने या उसे बंद करने की सिफारिश भी की जा सकती है।
नया AI सिस्टम लागू करने से पहले करना होगा परीक्षण
कंपनियों को नया AI सिस्टम लागू करने या पहले से इस्तेमाल हो रहे सिस्टम में बड़ा बदलाव करने से पहले उसका सत्यापन और प्रभाव आकलन करना होगा। इसमें AI की सटीकता, मजबूती, निष्पक्षता, पारदर्शिता और समय के साथ उसके व्यवहार में होने वाले बदलावों का मूल्यांकन शामिल होगा।
TRAI के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कंपनी अपने नेटवर्क या सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले AI सिस्टम के परिणामों के लिए जवाबदेह होगी। यह जिम्मेदारी तब भी बनी रहेगी, जब AI सिस्टम कंपनी ने खुद तैयार किया हो या किसी तीसरी कंपनी से खरीदा अथवा आउटसोर्स कराया हो।
कंपनियों को अपनी आंतरिक AI नीति और उसमें किए गए बदलाव लागू होने के सात कार्यदिवस के भीतर TRAI के पास जमा कराने होंगे। नीति की कम से कम हर वित्त वर्ष में समीक्षा का भी प्रस्ताव है।
27 नवंबर तक दे सकते हैं सुझाव और आपत्तियां
TRAI ने इन प्रस्तावित गाइडलाइंस पर संबंधित हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। आधिकारिक वेबसाइट पर जारी जानकारी के अनुसार, टिप्पणियां जमा करने की अंतिम तारीख 27 नवंबर 2026 है।
इस प्रक्रिया के बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। इसके आधार पर अंतिम दिशानिर्देश तैयार किए जा सकते हैं। फिलहाल जियो, एयरटेल और अन्य संबंधित कंपनियों के लिए ये प्रावधान प्रस्तावित हैं, इन्हें लागू हो चुके नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
