✍️ विशेष संवाददाता•Published On 27th Aug, 2026 @ 8:37 PM
हैदराबाद से जुड़े खगोलशास्त्री Rohan P. Naidu और उनकी टीम ने James Webb Space Telescope की मदद से शुरुआती ब्रह्मांड में एक ऐसे रहस्यमय स्रोत का अध्ययन किया है, जिसे शोधकर्ता घने गैस आवरण में छिपे ब्लैक होल के रूप में समझा रहे हैं। यह खोज “Little Red Dots” नाम के रहस्यमय खगोलीय पिंडों को समझने की दिशा में अहम कड़ी बन सकती है। इससे यह सवाल भी नए सिरे से उठता है कि बिग बैंग के कुछ ही करोड़ वर्षों बाद विशाल ब्लैक होल इतनी तेजी से कैसे विकसित हुए।
कुछ हफ्ते पहले Rohan P. Naidu की अगुवाई वाली रिसर्च ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नया सवाल खड़ा किया था—क्या शुरुआती ब्रह्मांड में ऐसे खगोलीय पिंड मौजूद थे, जो दिखते तारे जैसे थे, लेकिन उनकी ऊर्जा का असली स्रोत एक विशाल ब्लैक होल था?
अब इस खोज को सिर्फ एक अलग-थलग रहस्यमय वस्तु के तौर पर नहीं देखा जा रहा। James Webb Space Telescope से मिले दूसरे अवलोकन भी इस दिशा में संकेत दे रहे हैं कि शुरुआती ब्रह्मांड में दिखाई देने वाले रहस्यमय Little Red Dots में से कम से कम कुछ वस्तुएं घने गैस आवरण में छिपे विशाल ब्लैक होल हो सकती हैं।
यही वजह है कि Rohan Naidu और उनकी टीम की खोज शुरुआती ब्रह्मांड, पहली आकाशगंगाओं और supermassive black holes के निर्माण को समझने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या है Rohan Naidu की टीम की खोज?
Nature में प्रकाशित रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक दूरस्थ स्रोत का अध्ययन किया, जिसे MoM-BH*-1 नाम दिया गया है। यह प्रकाश उस दौर से आया है, जब ब्रह्मांड बिग बैंग के लगभग 66 करोड़ साल बाद की अवस्था में था।
इस स्रोत के स्पेक्ट्रम में ऐसे असामान्य संकेत मिले, जिन्हें सामान्य तारे या साधारण आकाशगंगा के मॉडल से समझाना आसान नहीं था। शोधकर्ताओं ने इसे एक ऐसे ब्लैक होल के रूप में मॉडल किया है, जो बेहद घने और धूल-रहित गैस के आवरण से घिरा हुआ है।
इस मॉडल में ब्लैक होल के आसपास की गैस गर्म होकर इतनी चमक पैदा करती है कि दूर से यह वस्तु एक विशाल तारे जैसी दिखाई दे सकती है। इसी कारण इसे वैज्ञानिक चर्चा में “black hole star” या BH* scenario से जोड़ा जा रहा है।
सरल भाषा में समझें ‘Black Hole Star’
- यह सामान्य तारा नहीं है, जिसकी ऊर्जा nuclear fusion से बनती है।
- यह सिर्फ खुला हुआ ब्लैक होल भी नहीं है।
- मॉडल के अनुसार इसके केंद्र में तेजी से बढ़ता ब्लैक होल हो सकता है।
- उसके चारों ओर मौजूद बेहद घनी गैस प्रकाश को इस तरह बदल सकती है कि वस्तु तारे जैसी दिखाई दे।
असली सवाल: Little Red Dots क्या हैं?
James Webb Space Telescope ने शुरुआती ब्रह्मांड की तस्वीरों में बड़ी संख्या में छोटे, चमकीले और लाल रंग के स्रोत देखे हैं। इन्हें वैज्ञानिकों ने Little Red Dots नाम दिया है।
इनकी प्रकृति लंबे समय से एक रहस्य बनी हुई है। इनमें से कई वस्तुएं इतनी कॉम्पैक्ट हैं कि इन्हें सामान्य आकाशगंगाओं की तरह समझाना मुश्किल है, लेकिन इनमें कुछ ऐसे संकेत भी नहीं मिलते जो पारंपरिक quasars से अपेक्षित होते हैं।
यहीं पर black-hole-star model महत्वपूर्ण बनता है। अगर किसी विशाल ब्लैक होल को अत्यधिक घनी गैस ने ढक रखा हो, तो वह अपने आसपास की सामग्री से ऊर्जा तो पैदा करेगा, लेकिन उस ऊर्जा का अवलोकित स्वरूप सामान्य active black hole या quasar से अलग हो सकता है।
Rohan Naidu की खोज क्यों अहम हो सकती है?
MoM-BH*-1 को लेकर प्रस्तावित मॉडल Little Red Dots की पूरी समस्या का अंतिम समाधान नहीं है, लेकिन यह एक अहम उदाहरण देता है कि शुरुआती ब्रह्मांड में कुछ रहस्यमय लाल स्रोत वास्तव में किस तरह के हो सकते हैं।
अगर भविष्य के अवलोकन भी इसी मॉडल का समर्थन करते हैं, तो वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि आज जिन आकाशगंगाओं के केंद्र में करोड़ों और अरबों सूर्य के बराबर द्रव्यमान वाले ब्लैक होल दिखाई देते हैं, उनके शुरुआती बीज आखिर बने कैसे और वे इतनी तेजी से बड़े कैसे हुए।
जून में NASA ने भी दिए थे मजबूत संकेत
Rohan Naidu की Nature study से पहले जून 2026 में NASA और ESA से जुड़े Webb observations में एक दूसरे Little Red Dot, GLIMPSE-17775, का गहरा स्पेक्ट्रम अध्ययन किया गया था। उस अध्ययन में भी वैज्ञानिकों को ऐसे कई संकेत मिले थे, जो एक supermassive black hole के घने गैसीय cocoon में छिपे होने वाले मॉडल का समर्थन करते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि सभी Little Red Dots एक ही प्रकार की वस्तुएं हैं। लेकिन अलग-अलग observations में मिलते संकेतों ने इस संभावना को जरूर मजबूत किया है कि इनमें से कुछ objects black-hole-star scenario से जुड़े हो सकते हैं।
फिर क्या Little Red Dots का रहस्य सुलझ गया?
अभी नहीं। वैज्ञानिकों के पास Little Red Dots को समझाने के लिए एक से अधिक मॉडल हैं। हाल के Webb observations में कुछ शोध यह भी संकेत देते हैं कि दूरस्थ आकाशगंगाओं की संरचना और observational limitations के कारण कुछ objects हमारी तस्वीरों में केवल एक छोटे चमकीले लाल स्रोत के रूप में दिखाई दे सकते हैं।
इसलिए Rohan Naidu की खोज को अंतिम फैसला मानने के बजाय एक मजबूत वैज्ञानिक कड़ी के रूप में देखना ज्यादा सही होगा। आने वाले JWST observations और विस्तृत spectroscopy से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कितने Little Red Dots वास्तव में तेजी से बढ़ते ब्लैक होल हैं और कितने अलग प्रकार की आकाशगंगाएं या खगोलीय संरचनाएं हैं।
यह खोज ब्रह्मांड के लिए क्यों मायने रखती है?
आज वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि बिग बैंग के बाद इतने कम समय में विशाल ब्लैक होल कैसे बन गए। अगर black-hole-star जैसी अवस्थाएं वास्तव में शुरुआती ब्रह्मांड में मौजूद थीं, तो वे supermassive black holes के शुरुआती विकास को समझने के लिए एक नया रास्ता दे सकती हैं।
पुरानी खबर में हमने क्या बताया था?
इससे पहले TheCityExpress ने Rohan Naidu की इस रिसर्च और उनकी वैज्ञानिक यात्रा पर विस्तार से खबर प्रकाशित की थी। नई रिसर्च और JWST से सामने आ रहे अतिरिक्त संकेतों के बाद अब यह विषय सिर्फ एक unusual cosmic discovery तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि Little Red Dots और शुरुआती supermassive black holes की बड़ी पहेली से जुड़ गया है।
हैदराबाद के Rohan Naidu की ‘Black Hole Star’ खोज और उनकी पूरी कहानी यहां पढ़ें
आगे क्या होगा?
अब वैज्ञानिकों की नजर Webb और दूसरे भविष्य के observations पर है। अगर MoM-BH*-1 जैसे और objects मिलते हैं और उनके spectra में भी इसी तरह के संकेत दिखाई देते हैं, तो black-hole-star scenario शुरुआती ब्रह्मांड को समझने वाले प्रमुख मॉडलों में शामिल हो सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ी बात यही है कि Rohan Naidu की टीम की खोज ने एक नए संभावित cosmic object का उदाहरण दिया है और उस बहस को मजबूत किया है कि JWST के रहस्यमय Little Red Dots के पीछे शायद तेजी से बढ़ते, गैस से ढके विशाल ब्लैक होल छिपे हो सकते हैं।