✍️ विशेष संवाददाता•Published On 28th Aug, 2026 @ 12:42 AM
आज, 28 अगस्त 2026 शुक्रवार को देशभर में रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और परस्पर सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक है और भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है। इसलिए सुबह का समय राखी बांधने के लिए प्रमुख माना जा रहा है। शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
आज 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास से जुड़ा यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र या राखी बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करती हैं। भाई भी बहन के सम्मान, सहयोग और उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।
रक्षाबंधन को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल इस बार राखी बांधने के समय को लेकर है। वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह लगभग 9:48 बजे तक है। पंचांग के अनुसार भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो चुकी है, इसलिए सुबह पूर्णिमा रहने तक का समय राखी बांधने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रक्षाबंधन 2026: आज का मुख्य मुहूर्त
- तारीख: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: सुबह करीब 9:48 बजे
- भद्रा: सूर्योदय से पहले समाप्त
- दिल्ली में राखी बांधने का समय: सुबह 5:57 से 9:48 बजे तक
नोट: अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के कारण राखी बांधने के शुरुआती समय में अंतर हो सकता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
रक्षाबंधन कब और क्यों मनाया जाता है?
रक्षाबंधन हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा है, लेकिन समय के साथ इसका अर्थ केवल जैविक भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा है।
राखी या रक्षा सूत्र को प्रेम, विश्वास, सम्मान और संरक्षण के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके मंगल की कामना करती है। बदले में भाई उपहार देने के साथ बहन के सम्मान और सहयोग का संकल्प लेता है।
आज के समय में कई लोग इसे भाई-बहन के पारस्परिक स्नेह और जिम्मेदारी के पर्व के रूप में भी देखते हैं। कई जगह बहनें बहनों को, मित्र एक-दूसरे को और परिवार के सदस्य भी रक्षा सूत्र बांधते हैं।
रक्षाबंधन की पूजा थाली में क्या-क्या रखें?
राखी बांधने से पहले पूजा की थाली तैयार की जाती है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में परंपराएं बदल सकती हैं, लेकिन सामान्य तौर पर थाली में ये चीजें रखी जाती हैं:
- राखी या रक्षा सूत्र
- रोली या कुमकुम
- अक्षत यानी चावल
- दीपक
- मिठाई
- फूल
- नारियल या फल, यदि पारिवारिक परंपरा में हो
- पूजा के लिए जल का पात्र
राखी बांधने की सही विधि क्या है?
रक्षाबंधन की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में थोड़ी अलग हो सकती है। सामान्य परंपरा के अनुसार पूजा इस क्रम में की जाती है:
- सबसे पहले घर के मंदिर या पूजा स्थान पर भगवान की पूजा करें।
- भाई को साफ स्थान पर बैठाएं। कई परंपराओं में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठने की परंपरा है।
- कई स्थानों में भाई के सिर पर कपड़ा जैसे रुमाल या तौलिया रखने की भी परंपरा है।
- बहन भाई के माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाती है।
- तिलक पर अक्षत लगाए जाते हैं।
- दीपक से आरती की जाती है।
- इसके बाद भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधा जाता है।
- राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाई जाती है और भाई-बहन एक-दूसरे के मंगल की कामना करते हैं।
राखी बांधते समय बोला जाने वाला पारंपरिक मंत्र
“येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
इस मंत्र का उल्लेख रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जुड़ा है। अलग-अलग परिवारों में मंत्र बोलने या बिना मंत्र के श्रद्धा के साथ राखी बांधने की परंपरा भी हो सकती है।
रक्षाबंधन की शुरुआत से जुड़ी प्रमुख कथाएं
रक्षाबंधन के इतिहास और परंपरा से कई धार्मिक तथा लोककथाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से अलग-अलग कथाओं का उल्लेख विभिन्न परंपराओं और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
1. राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा
रक्षा सूत्र से जुड़ी सबसे चर्चित धार्मिक कथाओं में राजा बलि और भगवान विष्णु की कथा शामिल है। पौराणिक परंपरा में भगवान विष्णु द्वारा राजा बलि से जुड़ी कथा और रक्षा सूत्र के महत्व का उल्लेख मिलता है। इसी संदर्भ में “येन बद्धो बलिराजा…” मंत्र भी प्रचलित है।
2. इंद्र और इंद्राणी की कथा
भविष्य पुराण से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार देवताओं और असुरों के युद्ध के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। इसे रक्षा और विजय की कामना से जोड़ा जाता है।
3. कृष्ण और द्रौपदी की लोकप्रचलित कथा
महाभारत से जुड़ी लोकप्रिय परंपरा में द्रौपदी और श्रीकृष्ण की कथा का भी उल्लेख किया जाता है। लोककथा के अनुसार कृष्ण के घायल होने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक हिस्सा उनकी उंगली पर बांधा था। इसके बदले कृष्ण द्वारा द्रौपदी की रक्षा किए जाने की कथा प्रचलित है।
हालांकि, रक्षाबंधन के आधुनिक भाई-बहन वाले स्वरूप को किसी एक ऐतिहासिक घटना या केवल एक कथा से जोड़कर नहीं देखा जाता। यह त्योहार समय के साथ विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से विकसित हुआ है।
क्या रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन का त्योहार है?
परंपरागत रूप से यह पर्व भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा है, लेकिन रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा का दायरा इससे व्यापक रहा है। कई धार्मिक और सामाजिक परंपराओं में रक्षा सूत्र गुरु, मित्र, परिवार के सदस्य या अन्य प्रिय व्यक्ति को भी बांधा जाता है।
आज के दौर में रक्षाबंधन को केवल “भाई बहन की रक्षा करेगा” वाले एकतरफा अर्थ के बजाय आपसी सम्मान, सुरक्षा, सहयोग और जीवनभर साथ देने के संकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है।
अगर भाई पास नहीं है तो क्या करें?
रक्षाबंधन पर भाई या बहन का एक ही शहर में होना जरूरी नहीं है। आज कई परिवार वीडियो कॉल के जरिए त्योहार मनाते हैं और राखी डाक या कूरियर से भेजते हैं। परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा कर भगवान को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा भी कई घरों में होती है।
रक्षाबंधन पर क्या ध्यान रखें?
- राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देख सकते हैं।
- पूजा की विधि को लेकर हर परिवार की परंपरा अलग हो सकती है।
- राखी बांधते समय सबसे महत्वपूर्ण भाव श्रद्धा और पारिवारिक स्नेह है।
- इस साल पूर्णिमा तिथि सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त हो रही है, इसलिए समय का ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
आज रक्षाबंधन का संदेश क्या है?
रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने और उपहार देने का त्योहार नहीं है। इसका मूल भाव रिश्तों में भरोसा, सम्मान और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का संकल्प है। बदलते समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन भाई-बहन और परिवार के बीच प्रेम का संदेश आज भी इसकी सबसे बड़ी पहचान है।