भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 26 अगस्त तक देश में कुल मानसूनी बारिश सामान्य से 13% कम रही। इस अवधि में 577.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 664.7 मिमी मानी जाती है।
लेकिन राष्ट्रीय औसत पूरी कहानी नहीं बताता। मानसून हर जगह एक समान बारिश नहीं करता। कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक कम बारिश हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में कुछ घंटों या कुछ दिनों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। यही असमान वितरण कई जगह बाढ़ और जलभराव का कारण बनता है।
| मानसून अपडेट |
स्थिति |
| आंकड़ों की अवधि |
1 जून से 26 अगस्त 2026 |
| वास्तविक बारिश |
577.8 मिमी |
| सामान्य बारिश |
664.7 मिमी |
| राष्ट्रीय कमी |
13% |
| Deficient श्रेणी वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश |
14 |
राष्ट्रीय औसत के पीछे छिपी असमान बारिश की कहानी
मानसून की कुल कमी का मतलब यह नहीं है कि देश के हर हिस्से में कम बारिश हुई है। IMD के आंकड़ों में कई जिले बारिश की कमी वाली श्रेणी में हैं, जबकि कुछ इलाकों में सामान्य से अधिक या अत्यधिक बारिश दर्ज की गई है।
यही कारण है कि एक ही समय में देश के कुछ हिस्सों में बारिश की कमी और दूसरे हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति दिखाई दे सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के लिए इसे क्षेत्रीय और समय के हिसाब से बारिश के असमान वितरण के रूप में देखा जाता है।
नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड, 95 लोगों की मौत
भारत के पड़ोसी नेपाल में हिमालयी सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है।
आपदा के बाद सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं। प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी यात्री और पर्यटक भी मौजूद थे। रिपोर्टों के अनुसार, लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में हुए इस घटनाक्रम में नदी में अचानक अत्यधिक पानी और मलबा आने से कई इलाकों में घर, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए। राहत और बचाव अभियान जारी है।
फ्लैश फ्लड की वजह क्या बताई जा रही है?
इस आपदा के कारणों को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के नदी प्रणाली में आने तथा नदी के बहाव में अचानक बदलाव जैसी परिस्थितियों का जिक्र किया गया है। कुछ रिपोर्टों में भूकंपीय गतिविधि के बाद हिमस्खलन जैसी घटना की संभावना भी बताई गई है।
हालांकि, इस घटना के सटीक कारणों की आधिकारिक और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी एक कारण को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार और UP क्यों अलर्ट पर?
नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों से निकलने वाली कई नदियां भारत के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। ऐसे में नेपाल में अचानक नदी प्रवाह बढ़ने या किसी जलधारा में असामान्य स्थिति बनने का असर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
इसी संभावित जोखिम को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ाई है। खासतौर पर नेपाल से आने वाली नदी प्रणालियों के जलस्तर और बहाव की निगरानी की जा रही है।
बिहार में प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव तैयारियों को सक्रिय किया है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई की गई है और संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए आपदा एजेंसियों को तैयार रखा गया है।
गंडक और सीमावर्ती इलाकों पर विशेष नजर
नेपाल से आने वाली नदियों के कारण बिहार के कई सीमावर्ती और निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की आशंका को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। गंडक नदी के किनारे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियां की जा रही हैं।
उत्तर प्रदेश में भी नेपाल सीमा से जुड़े नदी तंत्र और संभावित डाउनस्ट्रीम प्रभाव पर नजर रखी जा रही है। लोगों को अफवाहों के बजाय स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक आपदा चेतावनियों पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
भारत में भी कई राज्यों में भारी बारिश का दौर
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी, पूर्वोत्तर और प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों में मौसम सक्रिय बना हुआ है।
इसका मतलब यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर कुल मानसून बारिश कम होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर कम समय में बहुत अधिक बारिश की घटनाएं जारी रह सकती हैं।
‘कम मानसून’ और ‘ज्यादा बाढ़’ साथ-साथ कैसे संभव है?
इसे समझने के लिए एक साधारण उदाहरण लिया जा सकता है। अगर किसी राज्य में पूरे मौसम में बारिश कम हो, लेकिन एक-दो दिन में बहुत तेज बारिश हो जाए, तो कुल मौसमी आंकड़ा सामान्य से कम रह सकता है। इसके बावजूद अचानक हुई भारी बारिश से नदी, नाले और शहरी ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ सकता है।
यानी कुल बारिश की मात्रा और बारिश की तीव्रता एक ही चीज नहीं हैं। यही वजह है कि 13% की राष्ट्रीय बारिश कमी के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में बाढ़ और फ्लैश फ्लड जैसी स्थितियां बन रही हैं।
अभी सबसे बड़ा खतरा क्या है?
नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के साथ सबसे बड़ी चिंता नदी प्रणालियों में आगे होने वाले बदलाव और प्रभावित इलाकों में दोबारा अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका है। शुरुआती रिपोर्टों में प्रभावित नदी के ऊपरी हिस्से में अवरोध के कारण अतिरिक्त जोखिम की चेतावनी भी दी गई है।
भारत में बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि नेपाल से आने वाले जलप्रवाह के संभावित असर का समय रहते आकलन किया जाए और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखा जाए।
एक नजर में
- भारत में 1 जून से 26 अगस्त तक मानसूनी बारिश 13% कम रही।
- कुल बारिश 577.8 मिमी, जबकि सामान्य 664.7 मिमी है।
- 14 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश Deficient श्रेणी में हैं।
- इसके बावजूद कई क्षेत्रों में केंद्रित भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति बनी।
- नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र की फ्लैश फ्लड में नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत हुई।
- सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है।
- नेपाल की नदी प्रणालियों के संभावित डाउनस्ट्रीम असर को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश में सतर्कता बढ़ाई गई है।
- गंडक सहित नेपाल से आने वाली नदी प्रणालियों की निगरानी की जा रही है।
नेपाल में मृतकों और लापता लोगों की संख्या राहत एवं बचाव अभियान के दौरान बदल सकती है। नदी जलस्तर और बाढ़ से जुड़ी चेतावनियां भी स्थानीय प्रशासन की नई एडवाइजरी के अनुसार अपडेट हो सकती हैं।