✍️ आर्यन द्विवेदी•Published On 2nd Sept, 2026 @ 12:14 PM
रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले में शासन ने अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया है। उनकी जगह सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंक शर्मा को अस्पताल की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि जच्चा-बच्चा की मौत के लिए चिकित्सकीय और प्रशासनिक रूप से वास्तविक जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
रीवा: संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले में अब एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। शासन ने अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया है। उनकी जगह सर्जरी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंक शर्मा को संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह बदलाव घटना के करीब सात दिन बाद हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया। डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाए जाने के बाद अब इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
रीवा निवासी कल्पना मिश्रा को पहली डिलीवरी के लिए गांधी स्मारक चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 26 अगस्त 2026 की रात कल्पना मिश्रा और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। मौत से पहले का एक वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रदेश स्तर पर चर्चा में आया। वीडियो में कल्पना बेहद परेशान दिखाई दे रही थीं और परिजनों से मदद की गुहार लगाती सुनाई दी थीं।
परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए और जिम्मेदार चिकित्सकों एवं अस्पताल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। अस्पताल प्रशासन की ओर से उपचार को चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किए जाने की बात भी सामने आई थी। इसलिए मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारण और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पहले दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारी निलंबित
मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दो चिकित्सकों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए समिति गठित की गई।
इस जांच का उद्देश्य उपचार के दौरान हुई घटनाओं, चिकित्सकीय निर्णयों, ड्यूटी व्यवस्था और मरीज को उपलब्ध कराई गई चिकित्सा सेवाओं से जुड़े तथ्यों की पड़ताल करना है। जांच समिति द्वारा अस्पताल पहुंचकर मामले से संबंधित दस्तावेजों की जांच किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
अब डॉ. राहुल मिश्रा को अधीक्षक पद से हटाया गया
घटना के लगभग एक सप्ताह बाद शासन ने अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंक शर्मा को नई जिम्मेदारी दी गई है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाए जाने की कार्रवाई को उनके वायरल वीडियो और उसमें परिजनों से बातचीत के दौरान की गई विवादित टिप्पणी से जुड़े विवाद के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में बताया गया है। इसे सीधे तौर पर कल्पना मिश्रा की मौत के लिए उनकी चिकित्सकीय दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
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वायरल वीडियो से बढ़ा था विवाद
कल्पना मिश्रा की मौत के बाद उनके परिजन अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगने पहुंचे थे। इसी दौरान डॉ. राहुल मिश्रा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उनकी ओर से महिला की कम उम्र में गर्भावस्था को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हुआ। इस भाषा को लेकर परिजनों और राजनीतिक स्तर पर भी आपत्ति जताई गई।
विवाद बढ़ने के बाद डॉ. राहुल मिश्रा ने अपने बयान पर खेद जताते हुए माफी मांगी थी। इसके बावजूद मामला शांत नहीं हुआ और अब उन्हें अधीक्षक पद से हटा दिया गया है।
लेकिन मूल सवाल अभी बाकी हैं
डॉ. राहुल मिश्रा को अधीक्षक पद से हटाए जाने के बाद भी कल्पना मिश्रा मौत मामले के मूल सवाल खत्म नहीं हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उपचार के दौरान आखिर क्या हुआ था और जच्चा-बच्चा की मौत के लिए चिकित्सकीय या प्रशासनिक स्तर पर यदि कोई जिम्मेदारी बनती है, तो वह किसकी है?
जांच समिति को यह स्पष्ट करना होगा कि मरीज की भर्ती के समय उसकी चिकित्सकीय स्थिति कैसी थी, उपचार के दौरान कौन-कौन से निर्णय लिए गए, संबंधित चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे या नहीं, मरीज की हालत बिगड़ने पर क्या तत्काल कदम उठाए गए और उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हुआ या नहीं।
डीन की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को शासन ने जांच से बाहर कर दिया है या उन्हें किसी प्रकार का 'अभयदान' दिया गया है। ऐसी बात के लिए आधिकारिक जांच या शासन के आदेश में स्पष्ट तथ्य जरूरी होंगे।
इसी तरह यह भी अभी स्थापित तथ्य नहीं है कि घटना के समय डीन मौके पर मौजूद नहीं थे और इसी आधार पर उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह जांच का विषय है कि उस समय किस अधिकारी की क्या भूमिका और जिम्मेदारी थी।
अब जांच रिपोर्ट सबसे अहम
डॉ. राहुल मिश्रा को पद से हटाने के बाद अब पूरे मामले की अगली दिशा जांच रिपोर्ट से तय होगी। यदि जांच में किसी चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी होगा। वहीं यदि किसी अधिकारी के खिलाफ आरोप जांच में प्रमाणित नहीं होते हैं, तो उसे भी तथ्यों के आधार पर स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत एक गंभीर और बेहद दुखद घटना है। ऐसे मामले में कार्रवाई केवल किसी एक अधिकारी को पद से हटाने तक सीमित रहने के बजाय पूरी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच जरूरी है। परिवार को यह जानने का अधिकार है कि इलाज के दौरान वास्तव में क्या हुआ और उनकी बेटी तथा उसके बच्चे की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी।
अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट और शासन की अगली कार्रवाई पर है। असली जवाबदेही तभी तय होगी, जब जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चिकित्सकीय और प्रशासनिक दोनों स्तरों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जाएगी।