✍️ विशेष संवाददाता•Published On 2nd Sept, 2026 @ 2:18 PM
रीवा में बारिश और बाढ़ का संकट अगस्त में शहर के बड़े हिस्से को प्रभावित करने के बाद सितंबर में भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 1 सितंबर की सुबह तक IMD के रीवा स्टेशन पर पिछले 24 घंटे में 71 mm बारिश रिकॉर्ड की गई। इसी बीच 1 सितंबर को नगर निगम ने बीहर नदी के किनारे पद्मधर कॉलोनी में Green Belt में बने मकानों के खिलाफ JCB कार्रवाई शुरू की। अब सवाल सिर्फ बारिश से राहत का नहीं, बल्कि बाढ़ के बाद नदी किनारे निर्माण और शहर के जलनिकासी तंत्र की स्थिति का भी है।
रीवा: अगस्त में बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति झेल चुका रीवा सितंबर की शुरुआत में भी बारिश के खतरे से पूरी तरह बाहर नहीं आया है। 1 सितंबर 2026 की सुबह 8:30 बजे तक भारत मौसम विज्ञान विभाग के रीवा स्टेशन पर पिछले 24 घंटे में 71 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान में 2 और 3 सितंबर को भी रीवा में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी।
इसी बारिश और अगस्त की बाढ़ के बीच अब रीवा में एक दूसरा बड़ा मुद्दा सामने आया है। 1 सितंबर को नगर निगम ने बीहर नदी के किनारे पद्मधर कॉलोनी में Green Belt में बने मकानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में नगर निगम की टीम JCB लेकर मौके पर पहुंची।
1 सितंबर को नगर निगम की बड़ी कार्रवाई
बाढ़ की स्थिति के बाद नगर निगम ने बीहर नदी के किनारे Green Belt में बने मकानों को लेकर कार्रवाई शुरू की है। वार्ड नंबर 5 की पद्मधर कॉलोनी में कुछ भवन मालिकों को पहले नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर मकान खाली करने और सामान हटाने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद मंगलवार को नगर निगम, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम JCB मशीनों के साथ मौके पर पहुंची।
कार्रवाई के दौरान इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ भवन मालिकों ने नगर निगम की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अपने पास निर्माण की अनुमति होने का दावा किया। ऐसे में अब यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि जिन निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है, उनकी अनुमति, Land Use, Green Belt की स्थिति और संबंधित रिकॉर्ड की प्रशासनिक स्तर पर किस तरह जांच की गई है। विरोध के बाद निगम को उल्टे पांव लौटना पड़ा।
बाढ़ के बाद नदी किनारे निर्माण पर फोकस
बीहर नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में अगस्त में जलस्तर बढ़ने के बाद शहर के कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी थी। ऐसे में नदी के किनारे बने निर्माण अब प्रशासन के निशाने पर हैं। नगर निगम की कार्रवाई को इसी व्यापक बाढ़ और जलभराव के बाद की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी भी भवन को अवैध घोषित करने से पहले संबंधित निर्माण की स्वीकृति, नक्शा, Land Use और Green Belt से संबंधित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है। इसलिए जिन भवन मालिकों का कहना है कि उनके पास निर्माण की अनुमति है, उनके दावे की भी दस्तावेजों के आधार पर जांच होना जरूरी है।
रीवा में 2026 की बाढ़ कब आई?
रीवा में 2026 की सबसे गंभीर बाढ़ और जलभराव की स्थिति अगस्त के तीसरे सप्ताह में सामने आई। 19-20 अगस्त के आसपास लगातार भारी बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी भर गया। बीहर नदी का जलस्तर बढ़ा और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 20 अगस्त तक स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि राहत शिविरों में प्रभावित लोगों को पहुंचाने की व्यवस्था करनी पड़ी।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रीवा नगर निगम क्षेत्र में 2200 से अधिक प्रभावित लोगों को आठ राहत शिविरों में पहुंचाया गया था। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और दवाइयों की व्यवस्था की गई थी तथा SDRF और NDRF की टीमें भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाई गई थीं।
अगस्त की बाढ़ में शहर के कई हिस्से प्रभावित
अगस्त के दौरान लगातार बारिश के कारण रीवा शहर के कई मोहल्लों में लंबे समय तक जलभराव रहा। गायत्री नगर सहित कई इलाकों में लोगों के घरों में पानी पहुंचने और लंबे समय तक आवागमन प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई। कुछ इलाकों में लोगों को कई दिनों तक जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा।
बाढ़ के दौरान प्रशासन और नगर निगम की ओर से राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और राहत शिविर बनाए गए। इसके बाद अब नदी किनारे और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को लेकर कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ है।
1 सितंबर तक कितनी बारिश हुई?
यहां Rainfall Data को लेकर एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। 1 सितंबर 2026 की सुबह 8:30 बजे तक IMD के रीवा स्टेशन पर पिछले 24 घंटे में 71 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। यानी सितंबर की शुरुआत में भी रीवा में बारिश का जोर बना हुआ था।
अलग-अलग Rain Gauge Stations पर बारिश की मात्रा अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक स्टेशन के 71 मिलीमीटर आंकड़े को पूरे रीवा जिले की कुल मानसूनी बारिश मानना सही नहीं होगा। उपलब्ध सार्वजनिक IMD Data में 1 जून से 1 सितंबर तक पूरे रीवा जिले का एकल Cumulative आंकड़ा इस रिपोर्ट के लिए स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं मिला है। इसलिए बिना आधिकारिक जिला Rainfall Statement के कोई अनुमानित कुल आंकड़ा देना उचित नहीं होगा।
204.5 mm बारिश का क्या मतलब है?
1 सितंबर की मौसम संबंधी जानकारी में 204.5 मिलीमीटर से अधिक बारिश का उल्लेख दिखाई दे सकता है। इसे किसी निश्चित स्थान पर होने वाली बारिश की पक्की मात्रा नहीं समझना चाहिए। IMD के Rainfall Classification में 204.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश को 24 घंटे की अवधि में Extremely Heavy Rainfall की श्रेणी में रखा जाता है।
इसका अर्थ है कि यदि किसी स्थान पर 24 घंटे में 204.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड होती है, तो वह Extremely Heavy Rainfall मानी जाती है।
1 सितंबर को भी बारिश का असर
1 सितंबर को रीवा में लगातार बारिश का असर दिखाई दिया। इसी दौरान मनगवां क्षेत्र के कुआं गांव में सुबह करीब 5 बजे लगातार बारिश के बीच एक जर्जर मकान गिर गया, जिसमें चार लोग घायल हुए। सभी घायलों को उपचार के लिए संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया गया।
यह घटना बताती है कि लगातार बारिश के बीच केवल नदी किनारे के इलाकों ही नहीं, बल्कि जर्जर भवनों में रहने वाले परिवारों के लिए भी खतरा बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल: बाढ़ के बाद स्थायी समाधान क्या?
रीवा में अगस्त की बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान तो चलाया गया, लेकिन अब असली चुनौती शहर को अगली भारी बारिश के लिए तैयार करने की है। नदी और नालों के किनारे निर्माण, Green Belt, जलनिकासी मार्ग, निचले इलाकों में बस्तियां और पुराने-जर्जर भवन—इन सभी की अलग-अलग स्तर पर जांच जरूरी हो गई है।
नगर निगम की 1 सितंबर की कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता भी जरूरी है। यदि किसी निर्माण को Green Belt या नदी क्षेत्र में होने के कारण हटाया जा रहा है, तो संबंधित रिकॉर्ड और कार्रवाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए। वहीं यदि किसी भवन के पास वैध निर्माण अनुमति है, तो उस अनुमति की भी प्रशासनिक जांच होनी चाहिए।
बारिश अभी खत्म नहीं हुई
IMD के रीवा शहर पूर्वानुमान में 2 और 3 सितंबर को Heavy Rain तथा उसके बाद भी Moderate Rain की संभावना दिखाई गई थी। इसका मतलब है कि अगस्त की बाढ़ के बाद सितंबर की शुरुआत में भी प्रशासन को संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत है।
अगस्त की बाढ़ ने रीवा में यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल बारिश के दौरान राहत अभियान पर्याप्त नहीं है। नदी किनारे निर्माण, जलनिकासी व्यवस्था, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर स्थायी योजना जरूरी है। 1 सितंबर की नगर निगम कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कार्रवाई कितने निर्माणों तक पहुंचती है और क्या प्रशासन समान मानकों के आधार पर सभी संवेदनशील निर्माणों की जांच करता है।