✍️ विशेष संवाददाता•Published On 13th Sept, 2026 @ 4:32 PM
SBI Research ने Reserve Bank of India से अक्टूबर और दिसंबर 2026 में Repo Rate में 25-25 Basis Points की बढ़ोतरी की सिफारिश की है। अभी Repo Rate 5.25% है। अगर दोनों बढ़ोतरी लागू होती हैं तो यह 5.75% तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट में बढ़ते Crude Oil Prices, महंगाई के व्यापक होने और Geopolitical Uncertainty को प्रमुख वजह बताया गया है। हालांकि RBI ने अभी ऐसी कोई बढ़ोतरी घोषित नहीं की है।
नई दिल्ली। Home Loan, Personal Loan और अन्य Floating-Rate Loans लेने वालों के लिए आने वाले महीने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। SBI Research ने Reserve Bank of India (RBI) को अक्टूबर और दिसंबर 2026 में Repo Rate में 25-25 Basis Points की बढ़ोतरी करने की सलाह दी है। अगर दोनों बढ़ोतरी होती हैं तो वर्तमान 5.25% Repo Rate बढ़कर 5.75% हो सकता है।
हालांकि यहां सबसे जरूरी बात यह है कि RBI ने अभी Repo Rate बढ़ाने का कोई फैसला नहीं किया है। यह State Bank of India की Economic Research Department यानी SBI Research की Policy Recommendation है। अंतिम फैसला RBI की Monetary Policy Committee (MPC) ही करेगी।
अभी कितना है Repo Rate?
RBI का Policy Repo Rate फिलहाल 5.25% है। अगस्त 2026 की Monetary Policy Review में RBI ने इसे लगातार चौथी बार 5.25% पर बरकरार रखा था। अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच निर्धारित है।
SBI Research का अनुमान है कि बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए RBI अक्टूबर में 25 Basis Points और दिसंबर में एक और 25 Basis Points की बढ़ोतरी कर सकता है।
ध्यान दें: 25 Basis Points यानी 0.25 Percentage Point। इसलिए 5.25% में 0.25 Percentage Point की बढ़ोतरी होने पर Repo Rate 5.50% होगा। दो ऐसी बढ़ोतरी के बाद यह 5.75% हो सकता है।
SBI Research ने Rate Hike की सलाह क्यों दी?
SBI Research ने अपनी रिपोर्ट में बदलते Global और Domestic Economic Conditions को Rate Hike की सिफारिश की प्रमुख वजह बताया है। इनमें खास तौर पर Crude Oil Prices, Geopolitical Uncertainty और Inflationary Pressures शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक Crude Oil की कीमत हाल में 100 डॉलर प्रति Barrel के स्तर को पार कर चुकी है। SBI Research ने अपने एक अनुमान में कहा है कि यदि Geopolitical तनाव बना रहता है तो अगले 15 दिनों में Crude Oil 123 डॉलर प्रति Barrel तक पहुंच सकता है। हालांकि यह एक Research Estimate है, वास्तविक कीमत इससे अलग हो सकती है।
महंगाई को लेकर SBI Research की क्या चिंता है?
SBI Research का कहना है कि Retail Inflation अब कुछ व्यापक क्षेत्रों में दबाव दिखा रही है। Report में Crude Petroleum और Natural Gas के अलावा Beverages, Pharmaceuticals और Electronics जैसे क्षेत्रों में Input Costs बढ़ने का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार यदि Oil Prices लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं तो अक्टूबर और नवंबर की Inflation Print 6.5% या उससे ऊपर जा सकती है।
यह अनुमान उस स्थिति पर आधारित है जिसमें ऊंची Oil Prices का असर दूसरे Products और Services की कीमतों तक पहुंचता है।
Home Loan वालों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर RBI Repo Rate बढ़ाता है तो इसका असर उन Loans पर पड़ सकता है जिनकी Interest Rate किसी External Benchmark से जुड़ी है। ऐसे Floating-Rate Home Loans में Bank की Lending Rate बढ़ने पर Borrower's Loan Cost भी बढ़ सकती है।
हालांकि यह जरूरी नहीं है कि Repo Rate में जितनी बढ़ोतरी होगी, Home Loan की Interest Rate भी बिल्कुल उतनी ही बढ़े। इसका वास्तविक असर Bank के Benchmark, Spread और Rate Reset Rules पर निर्भर करेगा।
Rate बढ़ने पर Bank के पास सामान्यतः दो विकल्प होते हैं—EMI बढ़ाना या Loan Tenure बढ़ाना। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव हो सकता है।
EMI कितनी बढ़ सकती है?
यह पूरी तरह आपके Outstanding Loan, Interest Rate, बाकी Tenure और Bank के Rate Reset पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ Repo Rate में 25 bps की संभावित बढ़ोतरी देखकर सभी Borrowers के लिए एक जैसी EMI बताना सही नहीं होगा।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी Borrower का Floating-Rate Home Loan है और Bank की Lending Rate में बदलाव होता है, तो Bank उसकी EMI बढ़ा सकता है या समान EMI रखते हुए Repayment Period बढ़ा सकता है।
यानी Repo Rate में 25 bps की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर Home Loan की EMI सीधे 25 bps के अनुपात में बढ़ जाएगी।
क्या नए Home Loan लेने वालों पर भी असर होगा?
हां, अगर RBI की Rate Hike के बाद Banks अपनी Lending Rates बढ़ाते हैं तो नए Borrowers के लिए Loan महंगा हो सकता है। इससे समान Loan Amount पर Interest Cost बढ़ सकती है।
लेकिन यहां भी अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि Banks Repo Rate के बदलाव को अपनी Lending Rates में कितनी जल्दी और कितनी मात्रा में Transfer करते हैं।
पुराने Home Loan Borrowers क्या करें?
अगर आपके पास Floating-Rate Home Loan है तो सबसे पहले अपने Bank से यह पता करें कि आपका Loan किस Benchmark से जुड़ा है और अगला Rate Reset कब होना है।
अगर Interest Rate बढ़ती है तो Borrower के पास अपनी Financial Situation के अनुसार कुछ विकल्प हो सकते हैं:
- EMI बढ़ाकर Loan जल्दी खत्म करना।
- अगर Cash Flow अनुमति देता है तो Partial Prepayment करना।
- दूसरे Bank की कम Interest Rate वाली Refinancing/Balance Transfer Offer की तुलना करना।
- Loan Tenure बढ़ाने से पहले कुल अतिरिक्त Interest Cost देखना।
इनमें से कोई भी विकल्प सभी Borrowers के लिए समान रूप से सही नहीं है। Decision लेने से पहले Processing Fees, Prepayment Rules, New Interest Rate और कुल बचने वाली Interest Cost की तुलना करना जरूरी है।
FD वालों के लिए अच्छी खबर हो सकती है?
Rate Hike का असर केवल Borrowers पर नहीं पड़ता। यदि Banks की Funding Cost और Deposit Rates बढ़ती हैं तो आगे चलकर कुछ Banks नए Fixed Deposits पर अधिक Interest Rate दे सकते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सभी Banks तुरंत FD Rates बढ़ा देंगे। मौजूदा FD आम तौर पर उस Rate पर चलती रहती है जिस Rate पर उसे Book किया गया था। इसलिए Rate बढ़ने का फायदा मुख्य रूप से नई FD खोलने या Maturity के बाद Renewal करने वालों को मिल सकता है।
Personal Loan और Car Loan पर भी असर?
अगर Bank की Lending Rates बढ़ती हैं तो इसका असर Home Loan के अलावा अन्य Floating-Rate Borrowings पर भी पड़ सकता है। Personal Loan और Auto Loan का वास्तविक असर Loan Product, Interest Rate Structure और Lender की Pricing Policy पर निर्भर करेगा।
इसलिए “Repo Rate बढ़ते ही हर Loan की EMI बढ़ जाएगी” कहना सही नहीं होगा। पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित Loan की Interest Rate किस Benchmark और Reset Mechanism से जुड़ी है।
क्या RBI अक्टूबर में Rate बढ़ाएगा?
अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। SBI Research ने अक्टूबर में 25 bps की बढ़ोतरी की सिफारिश की है, लेकिन यह RBI के आगामी निर्णय का संकेत या घोषणा नहीं है।
RBI की Monetary Policy Committee आर्थिक आंकड़ों, Inflation, Growth, Liquidity, Global Conditions और अन्य Factors का आकलन करने के बाद Policy Rate पर फैसला करेगी।
अक्टूबर में क्या होगा?
RBI की अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। इसी बैठक में Policy Repo Rate पर अगला फैसला सामने आएगा।
यदि RBI Rate को 25 bps बढ़ाता है तो Repo Rate 5.25% से 5.50% हो जाएगा। यदि दिसंबर में भी एक और 25 bps की बढ़ोतरी होती है तो यह 5.75% तक पहुंच सकता है।
| स्थिति |
Repo Rate |
| वर्तमान |
5.25% |
| अक्टूबर में 25 bps बढ़ोतरी होने पर |
5.50% |
| दिसंबर में फिर 25 bps बढ़ोतरी होने पर |
5.75% |
Inflation बढ़ी तो RBI के सामने चुनौती क्या होगी?
RBI के सामने Growth और Inflation के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। एक तरफ ऊंची Interest Rates Borrowing Cost बढ़ा सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ बहुत अधिक Inflation Household Budgets और Consumer Spending पर दबाव डाल सकती है।
SBI Research का ताजा अनुमान इसी Inflation Risk को ध्यान में रखकर Rate Hike की वकालत करता है।
क्या यह Rate Hike तय मानें?
नहीं। इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यही है कि SBI Research की Recommendation को RBI का फैसला नहीं माना जाना चाहिए। अभी Repo Rate 5.25% है और अगला Policy Decision अक्टूबर में होगा।
इसके अलावा Inflation और Crude Oil Prices जैसे Factors तेजी से बदल सकते हैं। इसलिए अक्टूबर और दिसंबर में वास्तविक Policy Decision मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर अलग भी हो सकता है।
SBI Research ने RBI को 2026 के बाकी हिस्से में दो बार Repo Rate बढ़ाने की सलाह दी है। अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps की बढ़ोतरी होने पर Repo Rate 5.25% से बढ़कर 5.75% हो सकता है।
इसका संभावित असर Floating-Rate Home Loans और दूसरे Borrowings की Cost पर पड़ सकता है, जबकि आगे की नई FD Rates में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। लेकिन अभी RBI ने Rate Hike का फैसला नहीं किया है। इसलिए Borrowers को फिलहाल इसे संभावित बदलाव के रूप में देखना चाहिए, न कि तय घोषणा के रूप में।